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सीबीएसई पेपर लीक: प्रश्नपत्र तैयार होने से छात्रों तक पेपर पहुंचने के 7 स्टेप, 4 कमजोर कड़ी

यहां वो सबकुछ एकसाथ जो पेपर लीक के बारे में आप समझना चाहते हैं।

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 11:36 AM IST
पेपर लीक मामले के विराेध में 29 पेपर लीक मामले के विराेध में 29

नई दिल्ली. इस हफ्ते सबसे चर्चित रहा सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई पेपर लीक मामला। इसने यह भी साफ कर दिया कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा हॉल तक पहुंचने की श्रृंखला में कई ऐसी कड़ियां हैं, जहां गड़बड़ी की आशंका है। ऐसे में यहां वो सबकुछ एकसाथ जो पेपर लीक के बारे में आप समझना चाहते हैं। साथ में इस एक्जाम सिस्टम की 4 कमजोर कड़ियां।

क्वेश्चन पेपर के सेट होने से लेकर सेंटर तक जाने के बीच 7 चरण

1) एक्सपर्ट- परीक्षा से तीन-चार महीने पहले नवंबर-दिसंबर में सीबीएसई तीन या चार विषय विशेषज्ञों (पेपर सेटर) से प्रश्नपत्र मंगवाता है। हर एक विशेषज्ञ प्रश्नपत्रों के तीन-चार सेट बोर्ड को भेजता है। एेसे में इन्हें खुद पता नहीं होता कौन से प्रश्न परीक्षा में आएंगे।

2) सीबीएसई(पहली कमजाेर कड़ी )- इसके बाद सीबीएसई हेडक्वार्टर में क्वेश्चन पेपर कमेटी के सदस्य प्रश्नों को फाइनल करते हैं। तीन सेट में पेपर तैयार करते हैं। यह काम दिसंबर-जनवरी में होता है। सभी सेट हाथ से लिखे होते हैं, ताकि लीक होने पर हैंडराइटिंग से पहचान हो सके। फिर भी पेपर सुरक्षित नहीं।

2004 में यहीं के कर्मचारी पर लगे थे आरोप

सीबीएसई-पीएमटी से पहले दिल्ली पुलिस के हाथ फिजिक्स और केमिस्ट्री के प्रश्नों का ऐसा सेट लगा, जो असल प्रश्नपत्र से हू-ब-हू मेल खाता था। इसमें उत्तर भी थे। पुलिस ने मामले में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय के एक कर्मचारी को आरोपी बनाया। उस पर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक को प्रश्नपत्र बेचने के आरोप थे।

- इस मामले की तरह 2011 में नागपुर में भी सीबीएसई के एक सीनियर अफसर प्रीतम सिंह को पैसों के लालच में एआईईईई के पत्र बेचने का आरोपी बनाया गया था। वे 2005 से यह काम करते आ रहे थे।

3) प्रिंटिंग प्रेस(दूसरी कमजोर कड़ी ): सेट में तैयार पेपर जनवरी में प्रिंट के लिए जाते हैं। कई तरह के सेट प्रिंटिंग के लिए भेजे जाते हैं, ताकि पता न चले कौन-सा फाइनल है। प्रिंटिंग प्रेस देश में कहीं भी हो सकती है। फिर यह कमजोर कड़ी है।

2011 में प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी के शामिल होने की जांच

सीबीएसई द्वारा आयोजित एआईईईई के प्रश्नपत्र लीक मामले में उस प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी, जहां पेपर छापे गए थे। यह जानकारी बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट में दी। इतना ही नहीं मौजूदा पेपर लीक मामले में भी पुलिस मध्य दिल्ली के एक प्रिंटिग प्रेस और कोचिंग संचालकों के बीच साठगांठ का पता लगाने में जुटी है।

4) परिवहन: प्रिंट हो चुके प्रश्नपत्र सील बंद बॉक्स में एक बार फिर सीबीएसई के ‘सीक्रेसी’ डिपार्टमेंट पहुंचते हैं। यहां से ये करीब एक हफ्ते पहले अलग-अलग शहरों के लिए रवाना कर दिए जाते हैं।

5) बैंक( तीसरी कमजोर कड़ी ): इन्हें सीधे सेंटर नहीं भेजा जाता। ये शहर के किसी बैंक में रख दिए जाते हैं। मगर यहां भी सेंध लग चुकी है।

2006 में बैंक मैनेजर शामिल मिल

इस बेहद चर्चित मामले में कक्षा 12वीं का बिजनेस स्टडीज पेपर लीक हुआ। सीबीएसई के इस प्रश्नपत्र के लीक हो जाने की जानकारी पुलिस को वाराणसी बम ब्लास्ट से जुड़ी पड़ताल के दौरान मिली। तब पुलिस आरोपियों की तलाश में हरियाणा के पानीपत शहर में होटल तथा ढाबों पर छापे मार रही थी। आरोपी तो हाथ नहीं लगे, लेकिन पुलिस को लीक प्रश्नपत्र मिल गए। बाद में पुलिस ने इस मामले में 6-7 लोगों की गिरफ्तारी की। इनमें एक बैंक मैनेजर और कैशियर भी शामिल था।

6) पर्यवेक्षक : परीक्षा की सुबह हर सेंटर के लिए सीबीएसई द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों को एसएमएस से जानकारी मिलती है कि उन्हें प्रश्नपत्रों का कौन सा सेट बैंक से लेना है। ये सेट लेकर परीक्षा हॉल तक पहुंचते हैं। मगर ध्यान रखते हैं कि पेपर 1 घंटे से ज्यादा पहले सेंटर न पहुंचे।

7) परीक्षा केंद्र(चौथी कमजोर कड़ी)

- सेंटर पर परीक्षा से 15 मिनट पहले प्रश्नपत्रों की सील खोली जाती है। अगर ऐसा न हो तो गड़बड़।

2011 में प्रिंसिपल दोषी

निकोबार में सीबीएसई की 12वीं का फिजिक्स व गणित का पेपर लीक हुआ था। मामले में पोर्ट ब्लेयर की विशेष कोर्ट ने नवंबर 2011 में चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसमें लापैथी के सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल कृष्णन राजू भी शामिल था। इस मामले में पेपर बैंक में नहीं, प्रिंसिपल के पास सुरक्षित थे।

ताजा केस में क्या-क्या हुआ?

28 मार्च: सीबीएसई ने 10वीं के गणित तथा 12वीं के इकोनॉमिक्स का पेपर रद्द कर दिया। माना कि हाथ से लिखे पेपर जो वॉट्सऐप पर छात्रों के पास पहुंचे वे हू-ब-हू असल प्रश्न-पत्र जैसे ही हैं।

29 मार्च: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन। दावा किया कि सीबीएसई के सभी पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने 18 स्टूडेंट्स और पांच कोचिंग सेंटर संचालकों सहित 25 लोगों से पूछताछ की। झारखंड के चतरा में भी छह छात्रों और कोचिंग संचालक हिरासत में।

30 मार्च: दिल्ली में सीबीएसई ऑफिस के सामने छात्रों का धरना। 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर की तारीख 25 अप्रैल तय। क्राइम ब्रांच ने गूगल को पत्र लिख सीबीएसई चेयरपर्सन को मेल भेजने वाले की जानकारी मांगी। पुलिस ने व्हाट्स-एप पर प्रश्नपत्र फॉरवर्ड करने वाले फोन नंबरों की चेन खंगाली। 10वीं के 24 और 12वीं के 10 छात्र के नंबरों की जांच।

31 मार्च: छात्रों का सीबीएसई कार्यालय के सामने ‌‌‌विरोध प्रदर्शन जारी। पुलिस ने झारखंड के चतरा से 2 कोचिंग सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया। यहां चार और छात्र हिरासत में।

1 अप्रैल: दिल्ली से 2 टीचर और एक कोचिंग संचालक को गिरफ्तार किया गया।

आगे क्या?

जानकारों का मानना है कि पेपर लीक करने वाला काफी चालाक है। इसलिए उसने पेपर हाथ से लिखे। वह इन्हें गैस पेपर बता सकता है। क्योंकि परीक्षा के दिनों में गैस पेपर बाजार में आना सामान्य बात है।

बोर्ड को चेताया या चुनौती दी?

कक्षा 10वीं का गणित का जो प्रश्न-पत्र लीक हुआ है, उसकी एक कॉपी एक दिन पहले सीबीएसई चेयरपर्सन के मेल पर भेजी गई थी। यानी पेपर लीक करने वाले गिरोह ने सीबीएसई के सामने खुली चुनौती पेश की। या फिर एक दिन पहले सीबीएसई को पेपर लीक की जानकारी देकर कोई व्हिसलब्लोअर का काम करना चाहता था?

12वीं के 8 लाख छात्र- इन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी। 10वीं के 16.38 लाख छात्र, लेकिन सभी की इन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी। 10वीं के 16.38 लाख छात्र, लेकिन सभी की दोबारा परीक्षा नहीं होगी।

1000 छात्र - इसससेे ज्यादा तक पहुंच चुका था, सीबीएसई का लीक प्रश्नपत्र, ऐसी पुलिस ने आशंका जताई है।

देशभर के छात्र क्यों हुए प्रभावित?

इस बार सीबीएसई का पेपर लीक होने सेदेशभर के छात्र प्रभावित हुए हैं। इसलिए कि सीबीएसई नेदेशभर में एक्जाम को सेंट्रलाइज्ड कर दिया। पहले रीजन के लिहाज से प्रश्नपत्र अलग होते थे। इतना ही नहीं पेपर के कई सेट बनते थे। अलग-अलग सेट्स में सवालों में अंतर भी होता था। इस बार सीबीएसई ने परंपरा तोड़ी और इकोनॉमिक्स के प्रश्नपत्र का एक ही सेट बनाया। इससेदेशभर के 12वीं के छात्र प्रभावित हुए।

ये एसएससी जैसा लीक या अलग?

स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी एसएससी द्वारा इस साल 17 से 22 फरवरी तक हुई कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के दूसरे चरण से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक हुए थे। एसएससी ने 21 फरवरी का पेपर-वन रद्द करने की घोषणा तीन दिन बाद की। लीक सोशल मीडिया पर हुआ, लेकिन अंतर यह है कि एसएससी अॉनलाइन थीं, सीबीएसई ऑफलाइन।

(सोर्स: सीबीएसई सूत्रों और प्रमुख शिक्षाविदों से बातचीत के आधार पर)