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तलाक-ए-बिद्दत देने पर शौहर को हो सकेगी 3 साल की जेल, संसद में आज बिल पेश करेगी सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए दिया था 6 महीने का समय।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 28, 2017, 06:30 AM IST

    • Video- लोकसभा में कानून मंत्री बोले- ये इतिहास बनाने का दिन...

      नई दिल्ली. 1400 साल पुरानी ट्रिपल तलाक प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत के खिलाफ बिल लोकसभा में 7 घंटे के भीतर पास हो गया। गुरुवार को 12:33 pm पर बिल लोकसभा में पेश हुआ और 7:34 pm पर पास हो गया। इस दौरान कई संशोधन पेश किए गए, लेकिन सब खारिज हो गए। इनमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी तीन संधोधन थे, लेकिन ये भी खारिज हो गए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने फाइनल जवाब में कहा, "ये बिल धर्म, विश्वास और पूजा का मसला नहीं है, बल्कि जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वालिटी से जुड़ा मसला है। अगर देश की मुस्लिम महिलाओं के हित में खड़ा होना अपराध है तो हम ये अपराध 10 बार करेंगे।" कांग्रेस ने बिल को सपोर्ट तो किया, लेकिन ये भी कहा कि इसमें खामिया हैं, जिन्हें दूर करने के लिए इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। बिल शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

      ओवैसी के 3 अमेंडमेंट खारिज

      - AIMIM लीडर असदुद्दीन ओवैसी ने बिल में 3 संशोधन रखे। पहले दोनों संशोधन ध्वनिमत फिर वोटिंग के वक्त खारिज हो गए। दोनों संशोधन के पक्ष में उन्हें सिर्फ दो-दो वोट मिले। इसके बाद तीसरे संशोधन में ओवैसी को केवल 1 वोट मिला।

      - लोकसभा में बिल पास होने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "इससे मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ नहीं मिलेगा। ये बिल शादियों को तोड़ने के लिए है। इस बिल के जरिए मुसलमानों को टारगेट किया जाएगा।"

      रविशंकर प्रसाद ने इस्लामिक देशों के कानूनों का हवाला दिया

      बांग्लादेश

      - कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "मैं बांग्लादेशी कानून का क्लॉज 7 पढ़ रहा हूं। कोई भी शख्स जो अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है, वो तलाक के किसी भी तरीके के इस्तेमाल के बाद चेयरमैन को लिखित में इसके बारे में बताएगा। इसकी एक कॉपी उसकी पत्नी को दी जाएगी। इसका उल्लंघन करने वाले को एक साल तक जेल और जुर्माने या जेल के साथ जुर्माने की सजा दी जा सकती है।"

      पाकिस्तान

      - प्रसाद ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी देश है, ये हम सभी जानते हैं। लेकिन, यहां कुछ लोग हैं जो पाकिस्तान से प्रभावित होते हैं इसलिए मैें वहां का कानून भी बता रहा हूं।

      - उन्होंने कहा, "कोई भी शख्स जो अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है। किसी भी तरह का तलाक देने के बाद ऐसा करने की लिखित में सूचना देगा और इसकी एक कॉपी पत्नी को भी उपलब्ध कराएगा। ऐसा ना करने पर जुर्माना या एक साल की जेल या फिर जेल के साथ 5000 रुपए का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।"

      इन देशों का भी जिक्र

      - कानून मंत्री ने कहा, "अफगानिस्तान, ट्यूनीशिया, तुर्की, मोरक्को, इंडोनेशिया, इजिप्ट, श्रीलंका, ईरान ने ट्रिपल तलाक को बैन कर रखा है। जब इस्लामिक देशों में ट्रिपल तलाक पर रेगुलेशन है तो हमारे सेकुलर देश में क्यों नहीं? ये धर्म, विश्वास और पूजा का मसला नहीं है। ये जेंडर डिग्निटी, जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वॉलिटी का मसला है।"

      बिल के बारे में कानून मंत्री ने क्या कहा?

      - रविशंकर प्रसाद ने कहा, "हमने बहुत छोटा सा बिल बनाया है। इसमें तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी बताया गया है। अगर आप ट्रिपल तलाक कहेंगे तो आप जेल जाएंगे। आपको अपनी पत्नी और बच्चों को मुआवजा देना होगा। आपकी पत्नी को नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांगने का हक होगा। आरोपी को पुलिस से बेल नहीं मिलेगी, वो कोर्ट में मजिस्ट्रेट के पास बेल के लिए अप्लाई कर सकता है। मजिस्ट्रेट के पास वो पावर है कि वो हैसियत और इनकम देखकर मामले पर विचार करेगा।"

      कानून मंत्री ने की 4 अपील

      पहली अपील:कानून मंत्री ने कहा, "इस बिल को सियासत के नजरिए से ना देखा जाए।"

      दूसरी अपील: "हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत से अपील है कि इस बिल को दलों की दीवारों में ना बांधा जाए।"

      तीसरी अपील: "इस बिल को मजहब के तराजू में ना तौला जाए।"

      चौथी अपील: "इस बिल को वोट बैंक के खाते से ना परखा जाए। ये बिल हमारी बहनों-बेटियों की इज्जत-आबरू-इसांफ का बिल है। ये सदन कई बार ऊंचाइयों पर खड़ा होता है। उसी ऊंचाई की विरासत से अपील करता हूं कि हम अपने सियासी झगड़ों को छोड़कर भारत की मुस्लिम बहनों और बेटियों के लिए खड़े हो जाएं। ये कहें कि अगर आपको इंसाफ नहीं मिलता तो ये सदन आपको इंसाफ देगा।"

      ट्रिपल तलाक देने पर कितनी सजा?

      - बिल के मुताबिक, "जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एकसाथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देना गैरकानूनी और गैर जमानती होगा। तीन तलाक देने वाले पति को

      तीन साल की सजा के अलावा जुर्माना भी होगा। साथ ही इसमें महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ते का दावा भी कर सकेगी।"

      कितना सख्त है ट्रिपल तलाक कानून?

      - मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा। जिसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सएेप, ईमेल, एसएमएस) के जरिये भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है।

      - अॉफिशियल्स के मुताबिक, हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्राॅविजन इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके। इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी।’

      - देश में पिछले एक साल से तीन तलाक के मुद्दे पर छिड़ी बहस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इस बिल का मसौदा तैयार किया। सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक को

      बुनियादी हक के खिलाफ और गैरकानूनी बता चुका है।

      कांग्रेस को किस बात पर है एतराज?

      - कांग्रेस ने तीन तलाक बिल पर कहा है कि सरकार यदि मनमानी करती है और बिल सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शंस के दायरे में नहीं होगा तो वह इसका विरोध करेगी।
      - कांग्रेस के स्पोक्सपर्सन अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अभी जो खबरें आ रही हैं, वे ठीक नहीं हैं। खबरों में कहा जा रहा है कि बिल में कड़े प्राॅविजन्स किए गए हैं, जो अदालत के

      निर्देशों के मुताबिक नहीं हैं।
      - वहीं, बिल को पास कराने के लिए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरी अपोजिशन पार्टीज को लेटर लिखा है।

      मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का क्या कहना है?

      - ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के तीन तलाक बिल को महिलाओं के हक के खिलाफ बताया है। साथ ही दावा किया कि इससे कई परिवार बर्बाद हो जाएंगे।

      बोर्ड ने कहा कि यह मुस्लिम पुरुषों से तलाक का हक छीनने की बहुत बड़ी साजिश है। बिल को गैर कानूनी बताते हुए बोर्ड ने सरकार से इसे वापस लेने की अपील की है।
      - महिला बोर्ड की चेयरपर्सन शाइस्ता अंबर का कहना है कि निकाह एक कॉन्ट्रैक्ट होता है। जो भी इसे तोड़े, उसे सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, अगर बिल कुरान और संविधान के

      मुताबिक नहीं है तो कोई भी मुस्लिम महिला इसे मंजूर नहीं करेगी।

      कानून बनाने के लिए कितना वक्त दिया था SC ने?

      - 23 अगस्त को 1400 साल पुरानी तीन तलाक की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक

      कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इललीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने कहा था कि सरकार तीन

      तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

      किस तलाक को खारिज किया, कौन-सा तलाक बरकरार है?

      - सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत को खारिज कर दिया था, लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के पास दो ऑप्शन बरकरार हैं। पहला है तलाक-ए-अहसन और दूसरा है तलाक-ए-हसन।
      - तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है। अगर 90 दिन में सुलह की कोशिश नाकाम रहती है तो तीन महीने में तीन बार

      तलाक कहकर पति अपनी पत्नी से अलग हो जाता है। इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है। इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।
      - तलाक-ए-हसन के तहत पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल (माहवारी) के दौरान तलाक कहता है। तीन साइकिल में तलाक कहने पर डिवोर्स पूरा हो जाता है।
      - सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया है।

      आगे की स्लाइड में पढ़िए- पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या अपील की?

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