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चाबहार पोर्ट के फर्स्ट फेज का ईरान के प्रेसिडेंट करेंगे इनॉगरेशन, गडकरी भी रहेंगे मौजूद

चाबहार पोर्ट के फर्स्ट फेज का ईरान के प्रेसिडेंट करेंगे इनॉगरेशन, गडकरी भी रहेंगे मौजूद

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 03, 2017, 11:22 AM IST

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    नई दिल्ली. ईरान में चाबहार पोर्ट के पहले फेज का प्रेसिडेंट हसन रूहानी ने रविवार को इनॉगरेशन किया। इस माैके पर इस मौके पर भारत, अफगानिस्तान और इलाके के कई दूसरे देशों के रिप्रेजेंटेटिव्स मौजूद रहे। अफगानिस्तान की तोलो न्यूज ने यह जानकारी दी है। ईरान के दक्षिण पूर्व सिस्तान बलूचिस्तान प्रॉविंस में मौजूद इस पार्ट से भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक नया स्ट्रैटेजिक रूट खुलेगा। इस पोर्ट का शुरू होना भारत के लिए स्ट्रैटेजिक और ट्रेड समेत कई मायनों में फायदेमंद है।

    भारत को इससे क्या फायदा?

    - इस पोर्ट के जरिए भारत अब बिना पाकिस्तान गए ही अफगानिस्तान और उससे आगे रूस, यूरोप से जुड़ सकेगा। अभी तक भारत को पाकिस्तान होकर अफगानिस्तान जाना पड़ता था।

    - चाबहार पोर्ट को भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच नए स्ट्रैटेजिक रूट माना जा रहा है।

    - इस पोर्ट के जरिए भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच कारोबार में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

    सुषमा स्वराज ने की ईरानी विदेश मंत्री से चर्चा

    - चाबहार प्रोजेक्ट के पहले फेज को शाहिद बेहेश्टी पोर्ट के तौर पर जाना जाता है।

    - इसके इनॉगरेशन से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके ईरानी काउंटरपार्ट जावेद जरीफ ने तेहरान में एक बैठक की और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट समेत दूसरे मुद्दों पर चर्चा की।
    - बता दें, सुषमा रूस के सोची शहर से लौटते वक्त तेहरान में रूकी हैं। वे शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन की सालाना समिट में हिस्सा लेने के लिए रूस गई थीं।

    ईरान ने कहा- भारत के साथ साझेदारी मजबूत होगी

    - ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जरीफ ने शाहिद बेहेश्टी पोर्ट का जिक्र किया और कहा कि यह ईरान-भारत के आपसी और क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूती देगा।

    - जरीफ ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र के विकास में पोर्ट और सड़कों की अहमियत को दिखाता है, जो मध्य एशियाई देशों को दुनिया के दूसरे देशों से ओमान सागर और हिंद महासागर के जरिए जोड़ता है।

    भारत ने हाल ही में तेज किया है INSTC का काम

    - ईरान के चाबहार पोर्ट से भारत तक 7200 किलोमीटर लंबा इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ कॉरिडोर (INSTC) बनाया जा रहा है।

    - भारत ने हाल ही में इसका काम तेज किया है। माना जा रहा है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) पॉलिसी की चलते इस काम में तेजी लाई गई है।

    - इससे भारत की सेंट्रल एशियाई देशों (कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान), रूस और यूरोप तक पहुंच हो जाएगी।

    - बता दें कि चीन, पाक के ग्वादर पोर्ट से शिनजियांग तक चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बना रहा है, जो पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा। ये कॉरिडोर चीन के OBOR प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है। भारत, CPEC को लेकर अपना विरोध जता चुका है।

    भारत, चाबहार से 883 KM की सड़क बना चुका

    - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भारत चाबहार पोर्ट से अफगानिस्तान के बॉर्डर से लगे शहर जरांज तक 883 किमी की सड़क बना चुका है। इसे 2009 में भारत के बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने बनाया था।
    - इस रोड से अफगानिस्तान के 4 शहरों हेरात, कंधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ को जोड़ा गया है।
    - इसी साल अगस्त में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ईरान दौरे पर गए थे। वहां उन्होंने कहा था कि चाबहार से अफगानिस्तान तक रेलवे लाइन और सड़क बनाने पर बात चल रही है। इससे हमें रूस तक एक्सेस मिल जाएगा।
    - गडकरी ने ये भी कहा था, "उम्मीद है कि 12-18 महीने में चाबहार शुरू हो जाएगा। इससे व्यापार के लिए कई मौके मिलेंगे। यह भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए एक गेटवे की तरह काम करेगा।"
    - बता दें कि सितंबर, 2014 में ईरान की रिक्वेस्ट पर भारत सरकार ने चाबहार पोर्ट पर डेवलपमेंट करने की बात कही थी।

    आगे की स्लाइड में पढ़ें, 17 साल पहले हुई INSTC की स्थापना...

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    ईरान के चाबहार पोर्ट से भारत तक 7200 किलोमीटर लंबा इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ कॉरिडोर (INSTC) बनाया जा रहा है। -फाइल

    17 साल पहले हुई INSTC की स्थापना
    - इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) की स्थापना 12 सितंबर 2000 को सेंट पीटर्सबर्ग में ईरान, रूस और भारत ने की थी। इसका मकसद मेंबर कंट्रीज के बीच ट्रांसपोर्टेशन की मदद को बढ़ाना था।

    कहां से कहां तक पहुंचेगा INSTC?
    - यह कॉरिडोर हिंद महासागर (India Ocean) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को कैस्पियन सागर से ईरान के जरिए जोड़ेगा, फिर फिर रूस से होते हुए नॉर्थ यूरोप तक पहुंचेगा।

    CPEC और INSTC की कुल कितनी लंबाई?
    - चीन से पाकिस्तान के बीच बने CPEC की कुल लंबाई करीब 3000 किलोमीटर है। इसके मुकाबले INSTC की लंबाई 7200 किलोमीटर है।

    गैस का भंडार है यहां
    - बता दें कि सेंट्रल एशियन रिपब्लिक (कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान) में नेचुरल गैस और तेल का भंडार है।
    - चाबहार को पाकिस्तान उसके लिए खतरा बता रहा है। यह पोर्ट पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से सिर्फ 72 किलोमीटर दूर है।

    कैसे हैं भारत-ईरान के रिश्ते?
    - मई, 2016 में नरेंद्र मोदी ईरान के दौरे पर गए थे। वे 15 साल में पहली बार ईरान जाने वाले भारतीय पीएम थे।
    - उन्होंने चाबहार पोर्ट के लिए 50 करोड़ डॉलर की मदद देने का एलान किया था।

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    पिछले साल नरेंद्र मोदी ईरान दौरे पर गए थे, तब उन्होंने इस पोर्ट के लिए 50 करोड़ डॉलर की मदद देने का एलान किया था। -फाइल
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    सुषमा रूस के सोची शहर से लौटते वक्त तेहरान में रूकीं। वे शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन की सालाना समिट में हिस्सा लेने के लिए रूस गई थीं।
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    ईरान के दक्षिण पूर्व सिस्तान बलूचिस्तान प्रॉविंस में मौजूद इस पाेर्ट से भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक नया स्ट्रैटेजिक रूट खुलेगा।
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