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मोदी के फोन से भी नहीं माने चंद्रबाबू: केंद्र से TDP के मंत्रियों का इस्तीफा, NDA का हिस्सा रहेगी पार्टी

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मैं 29 बार दिल्ली गया लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिला।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 09, 2018, 10:14 AM IST

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    नई दिल्ली/अमरावती. आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सीएम चंद्र बाबू नायडू को फोन किया। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। बाद में शाम को 6 बजे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के दो केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी ने पीएम से मिलने 7 लोककल्याण मार्ग पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंपा दिया। इससे पहले चंद्रबाबू नायडू ने सरकार से अलग होने का फैसला किया था। चंद्रबाबू ने यह भी बताया था- "मैं 29 बार दिल्ली गया, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिला। गठबंधन के सदस्य होने के नाते ये मेरी जिम्मेदारी बनती है कि प्रधानमंत्री को पार्टी के फैसले से अवगत कराऊं। मेरे ओएसडी ने पीएम के ओएसडी से बात की लेकिन मोदी फोनलाइन पर नहीं आए।"

    1) नायडू ने मोदी को बताई सरकार से हटने की वजह

    -एएनआई ने डीटीपी सूत्रों के हवाले से बताया कि एपी सीएम नायडू और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत हुई। इस दौरान नायडू ने नरेंद्र मोदी को टीडीपी के केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे और सरकार से हटने की वजह बताई। फिलहाल बातचीत की पूरी डिटेल नहीं मिल पाई है।

    - उधर, पीएम से मुलाकात के बाद टीडीपी सांसद वायएस चौधरी ने कहा- "हम एनडीए हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन सरकार में कोई भी पोजिशन नहीं लेंगे। मैं नहीं समझता कि इसमें कुछ गलत है।"

    2 ) आखिर क्या है टीडीपी की मांग?

    आंध्रप्रदेश की दलील है कि हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाने से रेवेन्यू का काफी नुकसान हुआ है। बदले में राज्य को मदद दी जानी थी। इसके लिए विशेष दर्जे का वादा किया गया था। अब केंद्र का दावा है कि उस वक्त विशेष राज्य के दर्जे का विचार अस्तित्व में था। 14वें वित्त आयोग के तहत यह दर्जा सिर्फ पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों तक सीमित हो गया।

    3) किस बात से शुरू हुआ टीडीपी-बीजेपी के बीच विवाद?

    सूत्रों ने ‘भास्कर’ को बताया कि दरअसल, दोनों दलों के बीच तनातनी की वजह आंध्रप्रदेश के राजनीतिक समीकरण हैं। राज्य में अगले साल लोकसभा के साथ ही चुनाव होने हैं। सूत्रों के अनुसार आंध्र में बीजेपी धीरे-धीरे आधार बढ़ाने में लगी है। माना जा रहा है कि जगनमोहन रेड्‌डी की वाईएसआर कांग्रेस के साथ परोक्ष समझौता हो चुका है। नायडू यह जानते हैं। इसीलिए उन्होंने विशेष दर्जे का मुद्दा छेड़ दिया। केंद्र इसे मंजूर करे या नामंजूर, दोनों ही सूरत में नायडू को राजनीतिक फायदा दिख रहा है। बीजेपी किसी भी तरह यह मुद्दा चुनाव तक टालना चाहती थी।

    4) जेटली की कौन-सी बात चंद्रबाबू नायडू को चुभ गई?

    - सूत्रों ने ‘भास्कर’ को बताया कि बजट सत्र के पहले चरण में टीडीपी सांसदों का हंगामा देख अमित शाह ने नायडू को जेटली से मिलने के लिए कहा था। राज्य की तीन सदस्यीय टीम दो दिन पहले दिल्ली आई थी। जेटली ने उन्हें भी दो टूक ना कहा था। वह टीम अमित शाह से भी नहीं मिल पाई।

    5) अपनी मांगों को लेकर कितनी बार दिल्ली गए थे नायडू?

    - चंद्रबाबू का दावा है कि वे 29 बार दिल्ली गए लेकिन उन्हें इसका फायदा नहीं मिला। राज्य ने निर्माण कार्यों और पोलावरम योजना पर 13054 करोड़ रु. खर्च किए लेकिन केंद्र से सिर्फ 5,349.7 करोड़ की मदद मिली।

    - हमने समय-समय पर पोलावरम प्रोजेक्ट पर खर्च हुए पैसे का हिसाब दिया। अभी भी केंद्र से हमें 4,932 करोड़ मिलने बाकी हैं।

    6) जब नायडू ने मोदी को फोन किया तो क्या हुआ?

    - चंद्रबाबू ने बताया कि उन्होंने मोदी से फोन पर बात करने की कोशिश की। टीडीपी के सरकार से अलग होने के फैसले की जानकारी भिजवाई।

    - नायडू ने कहा, "मेरे ओएसडी ने पीएम के ओएसडी से बात की लेकिन वे फोन लाइन पर नहीं आए।"

    7) केंद्र ने कैसे डैमेज कंट्रोल किया?

    आंध्र को विशेष दर्जा देने से अरुण जेटली के खुलेआम इनकार के बाद बीजेपी को भी नायडू के पलटवार का अंदाजा हो गया था। अमरावती में प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना मिलते ही जेटली ने नायडू को फोन कर कहा कि जल्दबाजी में कोई फैसला न करें।

    8) अब टीडीपी का क्या रुख है?

    - नायडू ने कहा कि फिलहाल हम सरकार से बाहर हैं। बीजेपी-टीडीपी गठबंधन के मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा।

    - नायडू ने ये भी कहा कि भविष्य में दोनों पार्टियों का अलायंस हो सकता है।

    9) टीडीपी की राज्य और केंद्र में कितनी अहमियत है?

    - एनडीए में बीजेपी के बाद टीडीपी सबसे बड़ी पार्टी थी। उसके लोकसभा में 16 (15 आंध्र प्रदेश, एक तेलंगाना से) और राज्यसभा में 6 सांसद थे।

    - टीडीपी के अशोक गजपति राजू नागरिक उड्डयन और वाईएस चौधरी विज्ञान-तकनीकी राज्य मंत्री थे।

    - एनडीए-टीडीपी गठबंधन चार साल चला। टीडीपी पहली चुनाव पूर्व सहयोगी पार्टी है जिसने मोदी सरकार छोड़ने का एलान किया।

    10) आंध्र में लोकसभा और विधानसभा की स्थिति

    - लोकसभा में आंध्र से सीटें (कुल 25 )

    बीजेपी- 02

    टीडीपी- 15

    वाईएसआर- 08

    - आंध्र विधानसभा में सीटें (कुल 175)

    बीजेपी 04

    टीडीपी 102

    वाईएसआर 67

    अन्य 02

    11 ) क्या है विशेष राज्य का दर्जा?

    - किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव के पास होने के बाद मिलता है। बेहद दुर्गम इलाके वाला पर्वतीय क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय सीमा से नजदीकी, प्रति व्यक्ति आय और रेवेन्यू काफी कम होना, बुनियादी ढांचे की कमी, जनजातीय आबादी ज्यादा होने की जैसी स्थिति में विशेष दर्जा दिया जाता है।

    - अभी 11 राज्य अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और असम को ही विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। हालांकि, विशेष श्रेणी का दर्जा राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की सिफारिश पर ही मंजूर हो जाता है।

    - खास राज्य के दर्जे के तहत 90% तक केंद्रीय अनुदान मिलता है। 10% रकम बिना ब्याज के कर्ज के तौर पर दी जाती है। अन्य राज्यों को केंद्र से 70% तक ही अनुदान मिलता है।

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    चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मेरे ओएसडी ने पीएम के ओएसडी से बात की लेकिन मोदी फोनलाइन पर नहीं आए। (फाइल)
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    टीडीपी ने 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए से गठबंधन किया था। अलायंस 4 साल चला। (फाइल)
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