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इंसानियत के लिए अहम है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कैंसर-क्लाइमेट चेंज जैसी दिक्कतें हल हो सकती हैं: पिचाई

पिचाई ने कहा- यह इंसानों द्वारा बनाई गई अहम टेक्नोलॉजी है, इस पर काम करना अलग बात है लेकिन हमें जिम्मेदार रहना होगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 23, 2018, 09:07 AM IST

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    एक इंटरव्यू में पिचाई ने कहा- यह इंसानों द्वारा बनाई गई अहम टेक्नोलॉजी है, इस पर काम करना अलग ही बात है लेकिन हमें जिम्मेदार भी रहना होगा।- फाइल

    सैन फ्रांसिस्को.गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कि इंसानियत के फायदे के लिए हमने आग और बिजली का इस्तेमाल तो करना सीख लिया पर इसके बुरे पहलुओं से उबरना जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) भी ऐसी ही टेक्नोलॉजी है, इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में या क्लाइमेट चेंज से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में किया जा सकता है।

    इंसानियत की बेहतरी के लिए हो इस्तेमाल

    - एक इंटरव्यू में पिचाई ने कहा- यह इंसानों द्वारा बनाई गई अहम टेक्नोलॉजी है, इस पर काम करना अलग ही बात है लेकिन हमें जिम्मेदार भी रहना होगा। हमें मानवता की बेहतरी के लिए इसका इस्तेमाल करना होगा। पिचाई ने टीवी इंटरव्यू में एआई के कई दिलचस्प प्रयोग बताए और कहा कि गूगल इस टेक्नोलॉजी को लेकर बड़े पैमाने पर रिसर्च कर रही है।
    - गूगल सीईओ ने कहा, “नौकरियों पर टेक्नोलॉजी के प्रभाव पर कुछ लोगों को चिंतित होना चाहिए। पर, दुनिया को बदलाव स्वीकार करना ही होगा। जिन देशों को इनोवेटिव टेक्नोलॉजी को समझने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है, वे मौके होने के बाद भी बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। पिछले 10 साल में बने तकरीबन सभी डिजिटल स्किल प्रोग्राम कंप्यूटर साइंस पर ही बेस्ड हैं।”

    जॉब तेजी से डिजिटल हो रहे हैं

    - पिचाई ने आगे कहा, “स्टूडेंट्स को भी यही सिखाने पर जोर दिया गया। कोडिंग पर इस फोकस ने बड़े मौकों को नजरअंदाज कर दिया। जैसे मिड लेवल और सॉफ्ट स्किल वाले जॉब तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। इनमें हुनरमंद होने और करियर में स्टेबिलिटी के लिए ट्रेनिंग जरूरी है। तभी वर्कफोर्स भी कामयाब होगी। पहले लोग पढ़ाई के साथ-साथ ही सॉफ्ट स्किल सीख लेते थे, जो जिंदगी भर काम आती थीं।”
    - “पर अब हालात बदल गए हैं। क्योंकि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है, रोजगार के नए क्षेत्र पैदा हो रहे हैं और इनमें बदलाव भी हो रहा है। इसलिए हमें शिक्षा को आसान और निरंतर बनाने की जरुरत है, ताकि भविष्य के वर्कप्लेस में सभी को पर्याप्त मौके मिल सकें।”

    आईटी सपोर्ट में हैं मौके, पर इसके ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं

    - पिचाई ने ऑफिस एडमिन की मिसाल देते हुए बताया वे शेड्यूलिंग, बजटिंग और अकाउंटिंग जैसे काम ऑनलाइन करते हैं। इन्हें सिखाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम जरूरी हैं, कोई औपचारिक डिग्री नहीं। यह कोडिंग की तुलना में आसान भी है। 2002 के बाद मध्यम स्तर के डिजिटल स्किल वाली नौकरियों में 48% की बढ़ोतरी हुई है।
    - पिचाई ने कहा- इन टेक पावर्ड नौकरियों में थोड़ी ही ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। आईटी सपोर्ट ऐसी ही फील्ड है, यहां साफ मौके हैं, जैसे ऑटो मैकनिक बनना। पर आज कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम ऐसा नहीं है जो लोगों को इन नौकरियों के लिए स्किल्ड बनाए। मैं यह सुझाव इसलिए नहीं दे रहा हूं कि कोडिंग का महत्व कम हो गया है, बल्कि यह तो पैरेलल ट्रैक है, जिसकी मदद से भविष्य की वर्कफोर्स के लिए टेक्नोलॉजी कौशल वाले लोग तैयार मिल सकें।

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    वाइफ अंजलि के साथ सुंदर पिचाई।- फाइल
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Web Title: Google CEO Sundar Pichai On Impact Of AI On Humanity
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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