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आतंकी हाफिज सईद ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को भेजा 10 करोड़ रुपए के मानहानि का नोटिस

मंत्री ने कहा था- सईद के संगठनों पर कार्रवाई की, ताकि आतंकी स्कूली बच्चों पर और गोलियां न बरसा सकें।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 07:51 PM IST
दस्तगीर ने कहा था कि पाकिस्तान दस्तगीर ने कहा था कि पाकिस्तान

लाहौर. जमात-उद-दावा (जेयूडी) के चीफ और मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान को 10 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा है। उसका कहना है कि मंत्री के बयान से उसके सम्मान को काफी ठेस पहुंची है। बता दें कि हाल ही में जेयूडी और एफआईएफ को चंदा उगाही के लिए बैन किया गया है। इस पर दस्तगीर ने कहा था कि यह कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि, "आतंकी स्कूल के बच्चों पर अब और गोलियां न बरसा सकें।"

अमेरिका की सख्ती के बाद की गई कार्रवाई

- जेयूडी और चैरिटी के नाम पर चलाए जा रहे फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) के खिलाफ यह कार्रवाई अमेरिका की सख्ती के बाद की गई थी।

- बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाते हुए अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने खरी-खोटी सुनाई थी।

'माफी मांगो, नहीं तो कार्रवाई करेंगे'

- सईद के वकील एके डोगर की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है, "मैं आपको (मंत्री खुर्रम दस्तगीर) कहना चाहता हूं कि आप 14 दिन में मेरे मुवक्किल (सईद) को लिखित माफी भेजिए।"

- "उनसे माफी मांगिए और आगे एहतियात बरतने का वादा कीजिए। नहीं तो दो साल की सजा वाले पाकिस्तान पीनल कोड के सेक्शन 500 के तहत आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।"

'सईद की इज्जत को नुकसान पहुंचा'
- डोगर ने दावा किया कि जेयूडी का लश्कर-ए-तैयबा से कोई ताल्लुक नहीं है। उसके खिलाफ यूनाइटेड नेशंस का प्रपोजल "गैरकानूनी" है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि "गैरजिम्मेदाराना" बयान जारी होने से सईद के सम्मान को काफी ठेस पहुंची है।

US के दबाव में नहीं की गई कार्रवाई

- दस्तगीर ने कहा था कि पाकिस्तान ने जेयूडी और एफआईएफ पर अमेरिका के दबाव में नहीं, बल्कि "काफी विचार-विमर्श" के बाद कार्रवाई की है।

क्या कहा था ट्रम्प ने?
- डोनाल्ड ट्रम्प ने नए साल की अपनी पहले ट्वीट में लिखा, "अमेरिका ने बेवकूफी से बीते 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर की मदद दी है, लेकिन बदले में हमें झूठ और फरेब के सिवाय कुछ नहीं मिला। हमारे नेताओं को बेवकूफ समझा गया। वे आतंकियों को पनाह देते रहे और हम अफगानिस्तान में खाक छानते रहे। अब और नहीं।"