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बिना पायलट वाला फाइटर प्लेन बनाने की दहलीज पर भारत, अगले साल हो सकती है टेस्टिंग

IIT कानपुर की मदद से इसकी एयरफ्रेम डिजाइन कर ली गई है। इस पर 10 साल से काम चल रहा है।

मुकेश कौशिक | Last Modified - Feb 14, 2018, 09:51 AM IST

नई दिल्ली. भारत देश का पहला बिना पायलट वाला फाइटर प्लेन बनाने की दहलीज पर आ गया है। घातक नाम का यह प्रोजेक्ट करीब एक दशक से पर्दे के पीछे चल रहा है। इसका प्रोटोटाइप ‘स्विफ्ट’ तैयार होने की लास्ट स्टेज में है। डीआरडीओ के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि मार्च 2019 तक इसकी पहली फ्लाइट टेस्ट कर ली जाएगी। इसके बाद विमान के प्रोडक्शन को लेकर काम शुरू होगा।

डीआरडीओ-एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट मिलकर काम कर रहे
- इस प्रोजक्ट पर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी मिलकर काम कर रहे हैं।

- इसे पूरी तरह देश में ही तैयार किया जा रहा है। घातक का एयफ्रेम डिजाइन करने में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने आईआईटी कानपुर की मदद ली है। शुरुआती डिजाइन तैयार हो चुके हैं। जिनमें से किसी एक को फाइनल किया जाएगा।

भारत में बना कावेरी इंजन लगेगा
- इसमें ‘स्टेल्थ’ की खूबी होगी, यानी इसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा, जो रडार को चकमा दे सके।
- इसके लिए डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित लैब 'ऑरेंज' (आउटडोर राडार क्रॉस सेक्शन टेस्ट मेजरमेंट फेसिलिटी) की मदद भी ली गई है।
- यह भी तय हो चुका है कि इसमें भारत में ही बनाया गया ‘कावेरी इंजन’ इस्तेमाल किया जाएगा। डीआरडीओ के टॉप ऑफिशियल के मुताबिक, डीआरडीओ की लैब में पहले यह इंजन कामयाब नहीं हुआ था। इसलिए इसमें सुधार के लिए फ्रांस की मदद ली जा रही है।

तेजस की डिजाइन भी शामिल की गई
- प्रोटोटाइप में देश के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ के डिजाइन एलीमेंट्स भी लिए गए हैं। आगे चलकर घातक की स्टेल्थ टेक्नोलॉजी एडवांस्ड मिडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका) में भी इस्तेमाल की जा सकेगी।

बजट में सिर्फ एक लाइन में जिक्र
- 2016-17 के डिफेंस बजट में सिर्फ एक लाइन में इस प्रोजेक्ट का जिक्र था। इसमें कहा गया था कि 231 करोड़ रुपए घातक के डिजाइन और इसके लिए क्रिटिकल एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट के लिए मंजूर किए जाते हैं।

PMO रखे है प्रोजेक्ट पर नजर
- प्रधानमंत्री कार्यालय इस प्रोजेक्ट पर सीधे नजर रखे है। इस पर एक हाईलेवल कमेटी भी बनाई है।
- इस कमेटी की अध्यक्ष डॉ. आर. चिदम्बरम हैं। कमेटी पूरे प्रोजेक्ट के बारे में पीएमओ को रिपोर्ट दे रही है।

कंट्रोल ब्रिटेन से, हमला अफगानिस्तान में
- ब्रिटेन ने 2012 में पहली बार घर बैठे अफगानिस्तान में ‘घुसकर’ हमला किया था। इसके लिए उसने ‘रीपर ड्रोन’ का इस्तेमाल किया था।

अभी इन देशों के पास अनमैन्ड फाइटर प्लेन
- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और इजरायल में यह टेक्नोलॉजी मौजूद है।

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