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40 सुखोई फाइटर प्लेन में लगाई जा रही ब्रह्मोस मिसाइल, 3 साल में पूरा हो जाएगा प्रोजेक्ट

भारत ने नवंबर में सुखोई फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल दागने का कामयाब टेस्ट किया था।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 02:36 PM IST

नई दिल्ली. भारत में अब 40 सुखोई फाइटर जेट में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल लगाई जा रही हैं। 3 साल (2020 तक) में ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। माना जा रहा है कि सुखोई में ब्रह्मोस फिट होने से क्षेत्र में एयरफोर्स की ताकत काफी बढ़ जाएगी। बता दें कि 22 नवंबर को सुखोई-30 जेट से ब्रह्मोस मिसाइल दागने का कामयाब टेस्ट किया गया था।

HAL कर रहा सुखोई में मिसाइल फिट करने का काम

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सुखोई-30 फाइटर प्लेन में ब्रह्मोस फिट करने का काम हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) कर रहा है।

- बता दें कि भारत की सबसे भारी मिसाइल ब्रह्मोस को सुखोई फाइटर पर डिप्लॉय किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद एयरफोर्स जमीन या समुद्र में लंबी दूरी का टारगेट को निशाना बना सकती है।
- एक अफसर के मुताबिक, "जब मोर्चों पर जंग की संभावना हो तो हमें एयरफोर्स की ताकत को और बढ़ाना ही होगा।''

अप्रैल में पहली बार वॉरशिप से जमीन पर दागा

- अप्रैल, 2017 में पहली बार नेवी ने ब्रह्मोस को वॉरशिप से जमीन पर दागा था। ये टेस्ट कामयाब रहा था। नेवी को इसका वॉरशिप वर्जन मिल चुकी है।

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियतें

- रफ्तार:ब्रह्मोस मिसाइल 2.8 मैक (3675 Kmph) स्पीड के साथ सबसे तेज मिसाइल।

- ताकत:सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 300 किलो एटमी हथियारों के हमला कर सकती है।
- रेंज:ब्रह्मोस मिसाइल 290 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों पर अटैक कर सकती है।
- वजन: 3000 kg, लंबाई- 8 M, चौड़ाई- 0.6 M

दागो और भूल जाओ

- निशाना: ब्रह्मोस का निशाना अचूक है। इसलिए कहते हैं, ‘दागो और भूल जाओ’

- ब्रह्मोस को सबमरीन, वॉशिप, एयरक्राफ्ट, जमीन से लॉन्च किया जा सकता है।

कैसे बनी है ब्रह्मोस?

- भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर के तहत DRDO ने बनाई है।
- नाम:नदियों पर ब्रह्मपुत्र (भारत), मसक्वा (रूस) से मिला।

न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस है ब्रह्मोस

- ब्रह्मोस न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस है। दुनिया की कोई भी मिसाइल तेज गति से हमले के मामले में इसकी बराबरी नहीं कर सकती। यहां तक की अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे कमतर है।