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तमिलनाडु में जल्लीकटटू के दौरान एक युवक की मौत, 25 घायल

तमिलनाडु के मदुरई जिले में सोमवार को जल्लीकट्टू खेल देखने गए एक 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई।

Danik Bhaskar

Jan 15, 2018, 06:47 PM IST
तमिलनाडु के मदुरई में सोमवार को जल्लीकट्टू का आयोजन हुआ।  - फाइल तमिलनाडु के मदुरई में सोमवार को जल्लीकट्टू का आयोजन हुआ। - फाइल

चेन्नई. मदुरै के पलामेडु में जल्लीकट्टू के दौरान 19 साल के एक युवक की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि कालीमुथु नाम का युवक जल्लीकट्टू देखने आया था, बैलों ने उसे बुरी तरह कुचल दिया। इसके बाद हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे डेड डिक्लेयर कर दिया गया। इस दौरान 25 अन्य लोग घायल हुए हैं। बता दें कि तमिलनाडु में 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर बैन लगा दिया था। लेकिन 2017 में हुए प्रदर्शनों के बाद तमिलनाडु सरकार ने बिल पास कर जल्लीकट्टू को मंजूरी दी थी।

इवेंट में 450 बैल थे

- कालीमुथु डिंडीगुल जिले का रहने वाला था। जनकारी के मुताबिक, पोंगल के मौके पर होने वाले जलीकट्टू इवेंट में 455 बैल शामिल हुए थे।

- मंगलवार को मदुरै के आलंगनाल्लूर में जल्लीकट्टू होगा। जानकारी के मुताबिक, चीफ मिनिस्टर के पलानीस्वामी के इस इवेंट में पहुंचने की उम्मीद है।

तमिलनाडु के मदुरई जिले में सोमवार को जल्लीकट्टू खेल देखने गए एक 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। इस दौरान 25 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

जल्लीकट्टू पर विवाद कब शुरू हुआ?

- एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने जल्लीकट्टू को पशुओं पर क्रूरता बताया था। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इस पर बैन लगाने के लिए केस फाइल किया था।


27 नवंबर 2010: SC ने शर्तों के साथ तमिलनाडु में जल्लीकट्टू मनाने के निर्देश दिए।
2011: मिनिस्ट्री ऑफ एन्वॉयरमेंट एंड फॉरेस्ट ने नोटिफिकेशन जारी किया कि इवेंट में बैल शामिल नहीं होंगे और इवेंट पर बैन लग गया। लेकिन, 2009 ने तमिलनाडु रेग्युलेशन ऑफ जल्लीकट्टू एक्ट नं. 27 के तहत ये इवेंट जारी रहा।
7 मई 2014: SC ने तमिलनाडु सरकार के एक्ट को दरकिनार कर जल्लीकट्टू पर बैन लगा दिया।
8 जनवरी 2016: मिनिस्ट्री ऑफ एन्वायरन्मेंट एंड फॉरेस्ट ने कुछ शर्तों के साथ जल्लीकट्टू को मंजूरी दी।
14 जनवरी 2016: SC ने एनीमल वेलफेयर बोर्ड और PETA की पिटीशन पर जल्लीकट्टू पर बैन को जारी रखा। केंद्र के ऑर्डर पर स्टे लगा दिया।
8 जनवरी 2017: चेन्नई के मरीना बीच पर सैकड़ों लोगों ने जल्लीकट्टू पर बैन के विरोध में प्रदर्शन किया। ये विरोध पूरे तमिलनाडु में फैल गया।
12 जनवरी 2017: SC ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर बैन को बरकरार रखा। लेकिन तमिलनाडु में कई जगह जल्लीकट्टू हुआ। केंद्र की रिक्वेस्ट पर SC ने जल्लीकट्टू पर अपना फैसला कुछ दिनों के लिए टाल दिया।
23 जनवरी 2017: तमिलनाडु के गवर्नर ने जल्लीकट्टू जारी रखने के लिए ऑर्डिनेंस इश्यू किया, जिस पर तमिलनाडु विधानसभा में बिल पास कर जल्लीकट्टू को प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी ऑफ एनिमल एक्ट (1960) से छूट दे दी।

किन हस्तियों ने किया जल्लीकट्टू का सपोर्ट?
- जल्लीकट्टू का सपोर्ट करने वालों में रजनीकांत, एआर रहमान, श्रीश्री रविशंकर, जग्गी वासुदेव, कमल हासन, धनुष और सूर्या शामिल थे।

जल्लीकट्टू का मतलब और क्यों है मशहूर

- जल्लीकट्टू सांड़ और बैलों के साथ तमिलनाडु समेत साउथ इंडिया में पोंगल के दौरान होने वाला एक मशहूर खेल है।
- इसमें एक सांड़ को खुला छोड़ दिया जाता है, जिसे काबू कर लोगों को सींगों में लगे नोट निकालने होते है।
- यह खेल जितना इंसानों के लिए जानलेवा है, उतना ही जानवरों के लिए खतरनाक भी है।
- जल्लीकट्टू खेल का नाम सल्ली कासू से निकला है। यहां सल्ली का मतलब सिक्का और कासू का मतलब सींगों में बंधा हुआ होता है।
- सांड़ के सींगों में बंधे सिक्कों को हासिल करना इसका मकसद होता है। समय के साथ-साथ सल्लीकासू का नाम जल्लीकट्टू हो गया।

400 साल पुराना है जल्लीकट्टू का इतिहास
- इस खेल का इतिहास 400 साल पुराना है। बताया जाता है कि जल्लीकट्टू को पुराने समय में स्वयंवर के लिए कराया जाता था।
- लड़कियों के लिए सही वर ढूंढने के लिए जल्लीकट्टू का सहारा लिया जाता था और जो सांड़ को काबू करता, शादी उसी से होती थी।
- तमिलनाडु में यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बहुत पुरानी परंपरा है। मदुरै में जल्लीकट्टू खेल का सबसे बड़ा मेला लगता है।
- खेल के दौरान भारी पुलिस फोर्स, एक मेडिकल टीम और मदुरै कलेक्टर खुद भी वहां मौजूद होते हैं।

इस खेल का इतिहास 400 साल पुराना है। बताया जाता है कि जल्लीकट्टू को पुराने समय में स्वयंवर के लिए कराया जाता था। - फाइल इस खेल का इतिहास 400 साल पुराना है। बताया जाता है कि जल्लीकट्टू को पुराने समय में स्वयंवर के लिए कराया जाता था। - फाइल
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