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हाफिज के आतंकी संगठन को चैरिटी बता रहा PAK, बतौर कॉरपोरेट बॉडी रजिस्टर कराने की साजिश

हाफिज सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। अमेरिका ने उस पर इनाम भी घोषित किया है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 09, 2018, 03:16 PM IST

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    हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के साथ ही चैरिटी के नाम पर फलाह-ए-इंसानियत नाम की चैरिटी विंग भी ऑपरेट करता है।- फाइल

    इस्लामाबाद/नई दिल्ली.पाकिस्तान एक बार फिर हाफिज सईद को दुनिया की नजरों से बचाने की साजिश कर रहा है। इस बार उसके संगठन जमात-उद-दावा की चैरिटी विंग फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को देश की कॉरपोरेट बॉडी में बतौर कंपनी रजिस्टर कराने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि हाफिज सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। अमेरिका ने उस पर इनाम भी घोषित किया है। हाल ही में वो कई महीनों की नजरबंदी के बाद रिहा किया गया है।

    कैसे आई नई साजिश सामने?

    - पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ ने वहां की सरकार की साजिश को उजागर किया है। अखबार ने एडिटोरियल में लिखा है कि शाहिद खकान अब्बासी की सरकार ने हाफिज सईद और जमात-उ-दावा को मेनस्ट्रीम में लाने के लिए उसकी चैरिटी विंग फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन का इस्तेमाल करने जा रही है।
    - एडिटोरियल के मुताबिक, हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के साथ ही चैरिटी के नाम पर फलाह-ए-इंसानियत नाम की चैरिटी विंग को भी ऑपरेट करता है। यह लोगों से चंदा लेकर कथित तौर पर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती है।
    - ‘सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन आॅफ पाकिस्तान’ एक कॉरपोरेट सेक्टर रेग्युलेटर है। यह उन कंपनियों और संगठनों पर नजर रखता है, जिन पर यूएन ने किन्हीं वजहों से प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें रजिस्टर्ड कंपनियां उन लोगों या संगठनों को चंदा नहीं दे सकतीं, जिन्हें यूएन ने बैन किया है या उन पर प्रतिबंध लगाए हैं।

    क्या कर रही है पाकिस्तान सरकार?

    - पाकिस्तान सरकार फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को कॉरपोरेट बॉडी में चैरिटी विंग में रजिस्टर कराने की कोशिशें शुरू कर चुकी है। इससे जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा को फलाह-ए-इंसािनयत फाउंडेशन की तरफ से मदद मिलने लगेगी। इस तरह जमात-उद-दावा अपनी चैरिटी विंग के जरिए मेनस्ट्रीम में आ जाएगा।

    दबाव में है पाकिस्तान

    - हाफिज सईद को लेकर पाकिस्तान पर दुनिया का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसलिए पाकिस्तान सरकार उसे बचाने के लिए नए रास्ते तलाश रही है।
    - कई महीने तक नजरबंदी में रहने के बाद वहां की कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार के पास उसे नजरबंद रखने की कोई कानूनी वजह नहीं है और ना ही उसके खिलाफ पेश किए गए सबूत ऐसे हैं कि उसे आजादी से दूर रखा जाए।
    - पाकिस्तान यूएन के सामने आइरिश रिपब्लिकन आर्मी की मिसाल भी दे सकता है। वहां ये कहा जा सकता है कि आइरिश रिपब्लिकन आर्मी पहले हिंसा में शामिल रही, लेकिन बाद में उसने ये रास्ता छोड़ दिया।
    - फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को भी पाकिस्तान सरकार ऐसा ही दिखाने की कोशिश कर रही है, ताकि हाफिज सईद और जमात-उद-दावा को दुनिया की नजरों से बचाया जा सके। हाफिज सईद ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान सरकार अमेरिका और भारत के दवाब में उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

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    हाफिज सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। अमेरिका ने उस पर इनाम भी घोषित किया है। हाल ही में वो कई महीनों की नजरबंदी के बाद रिहा किया गया है। - फाइल

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Web Title: Jamaat Ud Dawa Hafiz Saeed Charity Wing Pak Government Mainstream
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