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जज लोया की मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई शुरू, तीन जज शामिल हैं बेंच में

लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दो पिटीशन लगाई गईं हैं। इनमें इस केस की अलग से जांच कराने की मांग की गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:44 PM IST

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    जस्टिस लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे। 1 दिसंबर 2014 को वे नागपुर में अपने कलीग की बेटी की शादी में जा रहे थे, तभी हार्ट अटैक से उनकी कथित तौर पर संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी।

    नई दिल्ली.सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई करने वाले सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बेनतीजा रही। कोर्ट ने कहा कि केस की सुनवाई 5 फरवरी यानी सोमवार को भी जारी रहेगी। बता दें कि जज लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दो पिटीशन पर सुनवाई चल रही है। इनमें इस केस की अलग से जांच कराने की मांग की गई है। एक पिटीशन महाराष्ट्र के जर्नलिस्ट बीआर लोन ने जबकि दूसरी, कांग्रेस लीडर तहसीन पूनावाला ने दायर की है। लोया की बहन ने उनकी मौत पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, पिछले दिनों लोया के बेटे ने अपने पिता की मौत को पूरी तरह ‘नैचुरल डेथ’ बताते हुए इस पर सियासत ना करने की अपील की थी।

    सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने सुनवाई पर उठाए थे सवाल

    - सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, कुरियन जोसेफ और एमबी लोकुर ने 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर काम का बंटवारा ढंग से नहीं करने का आरोप लगाया था।
    - इसी दौरान जज लोया के केस का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि यह केस किसी सीनियर जज के पास जाना चाहिए पर जूनियर जज की बेंच के पास भेज दिया गया।
    - चार सीनियर जजों की ओर से जज लोया की मौत का मामला जूनियर जज को देने पर सवाल खड़े करने के बाद जस्टिस अरुण मिश्रा ने इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
    - अब इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच कर रही है। इसमें चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ हैं।

    क्या है जस्टिस लोया की मौत का मामला?

    - जस्टिस लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे। 1 दिसंबर 2014 को वे नागपुर में अपने कलीग की बेटी की शादी में जा रहे थे, तभी हार्ट अटैक से उनकी कथित तौर पर संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
    - पिछले साल नवंबर में जस्टिस लोया की मौत के हालात पर उनकी बहन ने शक जाहिर किया। इसके तार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से जोड़े गए। इसके बाद यह केस मीडिया की सुर्खियां बना।

    क्या है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस?

    - सीबीआई के मुताबिक गुजरात के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को उस वक्त अगवा कर लिया था जब वे हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे।
    - नवंबर 2005 में गांधीनगर के करीब उसकी कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई। यह दावा किया गया कि शेख के पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध थे।
    - पुलिस ने दिसंबर 2006 में मुठभेड़ के चश्मदीद गवाह और शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति की भी कथित तौर पर गुजरात के बनासकांठा जिले के चपरी गांव में हत्या कर दी। अमित शाह तब गुजरात के गृह राज्यमंत्री थे। उन पर दोनों घटनाओं में शामिल होने का आरोप था।

    अमित शाह समेत कई आरोपी हो चुके बरी

    - सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और सोहराबुद्दीन शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया।
    - पहले इस केस की सुनवाई जज जेटी उत्पत कर रहे थे, लेकिन 2014 में अचानक उनका तबादला कर दिया गया था। फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया ने की।
    - सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में बीजेपी के प्रेसिडेंट अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के बिजनेसमैन विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व चीफ पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी, गुजरात पुलिस के ऑफिसर अभय चुडासम्मा और एनके अमीन को बरी किया जा चुका है। पुलिस अफसरों समेत कुल 23 आरोपी के खिलाफ अभी भी जांच चल रही है।

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