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लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा चाहिए, इसमें वक्त लगेगा: CEC

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक इंटरव्यू में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर बल दिया था।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 10:14 PM IST
रविवार को पीएम मोदी ने देश में रविवार को पीएम मोदी ने देश में

नई दिल्ली. नए चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ओम प्रकाश रावत ने मंगलवार को पद संभाला। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश में लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने के लिए एक कानूनी ढांचे की जरूरत है। इसे तैयार करने में काफी वक्त लगेगा। 2019 के लोकसभा चुनाव तक ऐसा होगा या नहीं यह कहना मेरे लिए सही नहीं है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक इंटरव्यू में साथ चुनाव कराने पर बल दिया। पीएम ने कहा था कि इससे इलेक्शन पर होने पर वाला काफी खर्च और समय बचेगा।

बग्घी को सिर्फ घोड़े पर नहीं छोड़ सकते हैं: रावत

- सीईसी ओपी रावत ने कहा, ''चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के लिए जरूरी लीगल फ्रैमवर्क (कानूनी ढांचा) होना चाहिए। जब तक तय नहीं होता, हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं। इसे तैयार करने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा, जिसमें काफी वक्त लगेगा। हम बग्घी को सिर्फ घोड़े के ऊपर नहीं छोड़ सकते हैं।''
- ''जब कानूनी ढांचा तैयार होगा, चुनाव आयोग इसे लागू कर देगा। ईसी संवैधानिक के मुताबिक काम करता है। हमें सिर्फ नियमों के तहत इलेक्शन कराने की जिम्मेदारी मिली है।''
- यह पूछे जाने पर कि क्या 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराए जाएंगे? रावत ने कहा कि अगर अभी मैं इसका जवाब दूंगा तो यह गलत होगा।

2015 में आयोग ने सरकार से की थी मांग

- रावत ने आगे कहा कि 2015 के चुनावों के दौरान ईसी ने सरकार से कहा था कि देश में एक साथ इलेक्शन कराए जाएं, इसके लिए संविधान और चुनाव के नियमों में संशोधन की जरूरत होगी। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और चुनाव अफसरों की संख्या बढ़ानी होगी। अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए 9 हजार करोड़ फंड चाहिए।

वोटर कार्ड-आधार लिंक के लिए SC में अपील करेंगे

- रावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद चुनाव आयोग ने वोटर आई कार्ड को आधार से जोड़ने की प्रॉसेस पर रोक लगाई है। हम कोर्ट से अपील करेंगे कि डुप्लीकेसी पर लगाम लगाने के लिए वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने की इजाजत दी जाए।

इंटरव्यू में मोदी ने कही थी साथ चुनाव की बात

- पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा, ''मैं पहला व्यक्ति नहीं हूं, जिसने चुनाव साथ कराने की बात कही हो। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, संविधान के जानकार लोग भी यही बात कह चुके हैं। कुछ व्यावहारिक बातें हैं, िजनके बारे में हमें सोचना चाहिए। भारत की डेमोक्रेसी बहुत मेच्योर हुई है।''

- ''67 के पहले हमारे देश में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एकसाथ होते थे। जनता दोनों जगह अलग-अलग फैसले भी करती थी। भारत के मतदाताओं की समझदारी पर शक करने की जरूरत नहीं है। 2009 में लोकसभा का चुनाव हुआ 1100 करोड़ खर्च हुआ। 2014 में 4 हजार करोड़ खर्च हुआ।''
- ''आज स्थानीय निकाय के चुनाव की मतदाता सूची अलग, असेंबली की अलग, लोकसभा की अलग है। आज टेक्नोलॉजी के युग में मतदाता सूची एक नहीं बन सकती है क्या?''
- '"चुनाव में लोकरंजक अर्थनीति भी चलती है। मैं इतना दूंगा, वो इतना देंगे। लोकसभा विधानसभा एक साथ होंगे तो खर्चा, समय बचेगा। लाखों सिक्युरिटी के लोग 100-150 दिन चुनावी व्यवस्थाओं में लगते हैं। मैं मानता हूं कि एक तारीख तय हो और साथ चुनाव हों।''