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नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी को कितना फायदा, कांग्रेस को कितना नुकसान, लेफ्ट का क्या हुआ

एक्जिट पोल के मुताबिक त्रिपुरा में लेफ्ट को 40 साल में पहली बार 45 फीसदी से कम वोट मिले।

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 11:23 AM IST

अगरतला/शिलांग/कोहिमा. त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ गए। अरुणाचल, असम, मणिपुर के बाद अब त्रिपुरा में भी बीजेपी की सरकार बनाने जा रही है। इस तरह नॉर्थ ईस्ट के 8 में से 4 राज्यों में बीजेपी सत्ता में आ गई है। वहीं मेघालय और नगालैंड में भी बीजेपी सरकार बनाने में बड़ा रोल प्ले कर सकती है। सिक्किम में भी बीजेपी सत्ताधारी एसडीएफ की सहयोगी है। सिर्फ मिजोरम में बीजेपी सत्ता से बाहर है। यहां भी इसी साल चुनाव होने हैं। जानिए इन चुनावों में किस राज्य में किसे कितना फायदा और कितना नुकसान हो रहा है...

#त्रिपुरा

यह चुनाव क्यों चर्चा में था?

- बीजेपी ने इन चुनावों में पूरी ताकत लगाई। संघ से जुड़े एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम आदि संगठन आदिवासियों के बीच पिछले कई साल से काम कर रहे हैं। इसके चलते भाजपा का आदिवासी इलाके में वोटबैंक काफी बढ़ा। बीजेपी हर साठ वोटर पर एक पन्ना प्रमुख बनाकर एक-एक वोटर तक पहुंची। इसका फायदा उसे दो तिहाई बहुमत के रूप में मिला। 2013 में जहां बीजेपी और उसकी सहयोगी इंडिजीनियस पीपुल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) का कुल वोट शेयर 1.5% था। वहीं, इस चुनाव में दोनों को कुल वोट शेयर 50% से ज्यादा है।

चुनाव में सबसे ज्यादा किसे फायदा?

- BJP को इन चुनावों में सबसे ज्यादा फायदा हुआ। इंडिजीनियस पीपुल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ अलायंस करने का भी उसे फायदा मिला। 2013 में इन दोनों पार्टियों को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार दोनों मिलकर सरकार बनाने जा रही हैं। यहां बीजेपी को अपने दम पर बहुमत मिला है। हालांकि, अमित शाह ने ये स्पष्ट कर दिया कि आईपीएफटी की सरकार में हिस्सेदारी होगी।

सबसे ज्यादा नुकसान में कौन रहा?

- सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ 25 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस यहां मुख्य विपक्षी दल था। 2013 में उसका वोट शेयर 36.5% था। 2018 में ये घटकर 2% से भी कम रह गया।

कांग्रेस को क्या हासिल हुआ?

- नार्थ ईस्ट में बीजेपी की लगातार बढ़ती सक्रियता और वहां हो रही राजनीतिक उठापठक का सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हो रहा है। त्रिपुरा में 2013 में उसके भले सिर्फ 10 विधायक थे लेकिन इस बार वो खाता भी नहीं खोल पाई। चुनाव से पहले कांग्रेस के अधिकतर विधायक पहले टीएमसी बाद में बीजेपी में चले गए।

बीजेपी की जीत के क्या मायने?

- बीजेपी को त्रिपुरा के मूल आदिवासी और बंगाली की लड़ाई का फायदा हुआ। त्रिपुरालैंड की समर्थक आईपीएफटी से अलांयस करने का भी उसे फायदा हुआ। त्रिपुरा की 70% हिंदू आबादी नाथ सप्रदाय को मानती है। योगी आदित्यनाथ इसके सबसे बड़े धर्मगुरु हैं। बीजेपी को इसका भी फायदा हुआ।

लेफ्ट ने क्या खोया?

- पिछले 40 साल के दौरान त्रिपुरा में हुए 8 चुनावों में लेफ्ट का वोट शेयर कभी भी 45% से कम नहीं था। इस बार 42% वोट मिले। बंगाल में सत्ता जाने के बाद त्रिपुरा लेफ्ट का सबसे मजबूत गढ़ था। त्रिपुरा से भी सत्ता जाने के बाद लेफ्ट के पास अब केवल केरल में ही सत्ता में रह गया है।

त्रिपुरा में 2013 की स्थिति

पार्टी सीट 2013 सीट 2018
लेफ्ट 50 16
कांग्रेस 10 0
बीजेपी+ 0 43


#मेघालय

यह चुनाव क्यों चर्चा में था?

- चुनाव से ऐन पहले बीजेपी के सहयोगी पार्टियों NPP और UDP ने साथ छोड़ दिया। पिछले चुनाव में सिर्फ दो सीट जीतने वाली NPP इस बार मेघालय की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है।

चुनाव में सबसे ज्यादा बढ़त किसे?

- सबसे ज्यादा फायदा NPP को होता दिख रहा है। बीजेपी अपने पुराने सहयोगियों NPP और UDP के साथ मिलकर सरकार बना सकती है।

सबसे ज्यादा नुकसान में कौन रहा?

- पिछले 9 साल से सत्ता कांग्रेस के हाथ में है। इस बार पार्टी चौतरफा(बीजेपी vs NPP vs UDP vs Cong) मुकाबले में फंसती दिख रही है। इस बार सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी पार्टी सत्ता से दूर हो सकती है।

कांग्रेस ने क्या खोया?

- पहले असम और मणिपुर के बाद नॉर्थ ईस्ट का एक और राज्य कांग्रेस के हाथ से जाता दिख रहा है।

बीजेपी के लिए रिजल्ट के क्या मायने?

- 2013 में बीजेपी एक भी सीट पर दूसरे स्थान पर भी नहीं रही थी। इस बार यहां पार्टी को दो सीटें मिली हैं। साथ ही NPP और UDP के मजबूत होने का फायदा बीजेपी को भी मिल सकता है। दोनों ही पार्टियां केंद्र में एनडीए के साथ हैं। चुनाव बाद तीनों एक साथ आ सकते हैं।

पीए संगमा की पार्टी का आगे क्या?

- 2013 में पूर्व लोकसभा स्पीकर पीए संगमा की पार्टी NPP को दो सीटें मिली थीं। उनके निधन के बाद संगमा के बेटे कॉनरोड संगमा के हाथ में पार्टी की कमान है। पार्टी ने अपने दम पर 19 सीटें जीती हैं। कॉनरोड को इस बार सीएम पद का बड़ा दावेदार बताया जा रहा है।

मेघालय में 2013 की स्थिति

पार्टी सीट 2013 सीट 2018
कांग्रेस 29 21
UDP 8 6
HSPDP 4 2
BJP 0 2
NPP 2 19
IND 13 3
अन्य 4 6

#नगालैंड

चुनाव में सबसे ज्यादा किसे फायदा?

- चुनाव से पहले एनपीएफ में हुई फूट और यहां के सबसे चर्चित नेता नेफ्यू रियो के NDPP में शामिल होने के बाद सबसे ज्यादा फायदा NDPP और बीजेपी गठबंधनन को होता हुआ दिख रहा है। चुनाव से कुछ महीने पहले बनी NDPP सत्ता में आने की बड़ी दावेदार है।

सबसे ज्यादा नुकसान में कौन रहा?

- NPF को चुनाव से पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। नेतृत्व की लड़ाई में पार्टी को दो हिस्से हो चुके हैं। अब पार्टी के हाथ से सत्ता जाती हुई दिख रही है। सीएम टीआर जेलियांग के लिए बिना नेफ्यू रियो की NPF को जिताने की मुश्किल चुनौती है।

कांग्रेस मजबूत हुई या कमजोर?

- पिछले चुनाव में कांग्रेस के यहां 8 एमएलए थे। ये सभी ने दो साल पहले NPF में शामिल हो गए थे। इस तरह वर्तमान में यहां कांग्रेस का एक भी एमएलए नहीं है। 15 साल पहले सत्ता में रही कांग्रेस को इस चुनाव में कैंडिडेट मिलने में भी काफी परेशानी हुई। पार्टी ने 23 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। इनमें से 5 ने नाम वापस ले लिया। इस तरह अब सिर्फ 18 कैंडिडेट मैदान में थे। पार्टी को एक भी सीट हाथ नहीं लगी।

बीजेपी मजबूत हुई या कमजोर?

- 15 साल से NPF की जूनियर पार्टनर रही बीजेपी को विशेषज्ञ NPF में हुई टूट का कारण बताते हैं। NPF की टूट का फायदा बीजेपी को हुआ है। पार्टी ने 20 सीट पर चुनाव लड़ा इनमें से 11 जीतती दिख रही है।

नगालैंड में 2013 की स्थिति

पार्टी सीट 2013 सीट 2018
NPF+ 38 29
कांग्रेस 8 0
NCP 4 0
बीजेपी 1 11
NDPP -- 17
अन्य 10 3