Hindi News »National »Latest News »National» NASA Interest In Made In India Technology For Spacecrafts

इंडियन साइंटिस्ट की टेक्नीक ने खींचा NASA का ध्यान, स्पेसक्राफ्ट की थर्मल कोटिंग में होगा इस्तेमाल

इंडियन साइंटिस्ट की इस टेक्नीक से स्पेसक्राफ्ट पर थर्मल कोटिंग करने की कॉस्ट 50% कम हो सकती है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 29, 2018, 01:29 PM IST

  • इंडियन साइंटिस्ट की टेक्नीक ने खींचा NASA का ध्यान, स्पेसक्राफ्ट की थर्मल कोटिंग में होगा इस्तेमाल, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    स्पेसक्राफ्ट की कोटिंग के लिए अभी जो टेक्नीक इस्तेमाल की जाती है वह बहुत महंगी है। -सिम्बॉलिक इमेज

    नई दिल्ली. भारतीय वैज्ञानिक की एक टेक्नीक ने अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जोधपुर के साइंटिस्ट डॉ. सतीश टेलर ने स्पेसक्राफ्ट के गैस टर्बाइन इंजन में इस्तेमाल होने वाली थर्मल स्प्रे कोटिंग टेक्नीक डेवलप की है। इंटरनेशनल जर्नल में उनके पेपर पब्लिश होने के बाद नासा के एक साइंटिस्ट ने उन्हें मेल किया है।

    - जोधपुर की मेटलाइजिंग इक्युपमेंट कंपनी के चेयरमैन एससी मोदी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि डॉ. सतीश के रिसर्च पेपर जर्नल सिरामिक इंटरनेशनल एंड थर्मल स्प्रे बुलेटिन में पब्लिश हुए थे। इसके बाद नासा के साइंटिस्ट जैम्स एल स्मियालेक ने इसमें इंट्रेस्ट दिखाया है और डॉ. सतीश को मेल भेजा है।

    थर्मल स्प्रे कोटिंग की लागत 50% कम हो जाएगी
    - एमईसी में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के चीफ साइंटिस्ट डॉ. टेलर ने यट्टरिआ स्टेबिलिश्ड जिरकोनिआ (वाईएसजेड)-प्लाज्मा स्प्रेड कोटिंग टेक्नोलॉजी डेवलप की है। इसके जरिए थर्मल स्प्रे कोटिंग की लागत करीब 50 फीसद तक कम हो जाएगी।
    - डॉ. सतीश के मुताबिक, स्पेसक्राफ्ट्स के गैस टर्बाइन इंजन को वर्टिकल क्रैक्स से कोटिंग किया जाना फायदेमंद होता है।
    - उन्होंने बताया कि कोटिंग के लिए अभी जो टेक्नीक इस्तेमाल की जाती है वह बहुत महंगी (करोड़ों रुपए लागत वाली) है।

    NASA से साझा किए रिसर्च पेपर
    - डॉ. सतीश ने न्यूज एजेंसी को बताया कि उन्होंने अपने पेपर नासा के साइंटिस्ट जैम्स एल स्मियालेक के साथ साझा किए हैं।
    - काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) इस टेक्नोलाजी से काफी प्रभावित हुए हैं।

    काफी कारगर है नई टेक्नीक
    नई दिल्ली स्थित CSIR के चीफ साइंटिस्ट डॉ. आरएम मोहंती के मुताबिक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट में सामने आया है कि यह टेक्नीक अभी इस्तेमाल हो रही टेक्नीक से ज्यादा कारगर और सस्ती है। हालांकि, नई टेक्नीक को इस्तेमाल करने के लिए अभी कुछ और एक्सपेरिमेंट्स किए जाने बाकी हैं।

  • इंडियन साइंटिस्ट की टेक्नीक ने खींचा NASA का ध्यान, स्पेसक्राफ्ट की थर्मल कोटिंग में होगा इस्तेमाल, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    नासा के साइंटिस्ट जैम्स एल स्मियालेक ने इस टेक्नीक में इंट्रेस्ट दिखाया है और डॉ. सतीश को मेल भेजा है। -सिम्बॉलिक इमेज
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए India News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: NASA Interest In Made In India Technology For Spacecrafts
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From National

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×