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नोटबंदी के बाद आर्थिक मंदी कैसे आई, सीक्रेट बताकर नीति आयोग ने छुपाई रिपोर्ट

नोटबंदी के बाद देश में आर्थिक मंदी कैसे आई, इस रिपोर्ट को पब्लिक करने में केंद्र सरकार कतरा रही है।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 10:14 AM IST
इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी में न इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी में न

नई दिल्ली. नोटबंदी के बाद देश में आर्थिक मंदी कैसे आई, इस रिपोर्ट को पब्लिक करने में केंद्र सरकार कतरा रही है। नीति आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बनाई आर्थिक सलाहकार समिति (इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी) की रिपोर्ट को गोपनीय बताकर जानकारी देने से मना कर दिया। साथ ही, उन्होंने जानकारी नहीं देने के लिए सूचना अधिकार कानून के किसी नियम का हवाला भी नहीं दिया। यह कमेटी सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है। नीति आयोग इसमें नोडल एजेंसी के तौर पर है। पिछले 10 में पहली बार ऐसा हुआ है कि पीएम की बनाई ऐसी कमेटी की कोई रिपोर्ट पब्लिक करने से इनकार किया गया हो।

नोटबंदी-GST के असर पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए बनाई गई थी कमेटी

- प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर, 2017 में इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी बनाई थी। इसकी जिम्मेदारी थी कि यह नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद आर्थिक क्षेत्र में हुए बदलाव और मंदी की रिपोर्ट तैयार करे। इसमें नीति आयोग के चेयरमैन बिबेक देबरॉय, प्रिसिंपल एडवाइजर रतन वटल समेत पांच मेंबर हैं।

नीति आयोग ने आरटीआई में नहीं दी जानकारी

- आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक ने नीति आयोग से आर्थिक मंदी के बारे में जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में नीति आयोग के सीनियर रिसर्च ऑफिसर डॉ. विश्वनाथ ने लिखा कि जानकारी गोपनीय है, क्योंकि यह बजट में शामिल की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने जानकारी नहीं देने के लिए किसी नियम का हवाला नहीं दिया।

मनमोहन के वक्त सबके सामने रखी जाती थी रिपोर्ट

- बता दें कि इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी बनाना जरूरी नहीं होता है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्रियों ने भी ऐसी समितियां बनाई थीं।

- योजना आयोग के वक्त पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी ऐसी कमेटी बनाई थी। यह 2006-07 से लेकर 2013-14 तक बनती रहीं। तब यह रिपोर्ट सबके सामने रखी जाती थी।

पूर्व सूचना आयुक्त बोले- जवाब का तरीका गलत

- नीति आयोग के जवाब पर केंद्रीय सूचना आयुक्त रहे शैलेश गांधी का कहना है कि जवाब ने देने का यह तरीका आरटीआई एक्ट के खिलाफ है। इस तरह के मामले जनहित से जुड़े होते हैं तो आरटीआई की धारा 4 सी के तहत इसे पब्लिक करना चाहिए।

- दूसरी बात, नीति आयोग ने रिपोर्ट के बजट में शामिल होने की संभावना जताई। सिर्फ संभावना के आधार पर जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता है। सूचना अधिकार कानून के किसी नियम का हवाला भी नहीं दिया गया।