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विपक्ष का आरोप, राज्यसभा में बोलने का मौका नहीं दे रहे सभापति; वेंकैया ने कहा- हंगामे की वजह से खराब हो रही सदन की छवि

मंगलवार को विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में नहीं शामिल होने का फैसला किया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 07:55 PM IST

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    नई दिल्ली. विपक्षी पार्टियों ने राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सभापति जनता के हितों से जुड़े मुद्दे सदन में उन्हें नहीं उठाने दे रहे हैं। इसके विरोध में विपक्षी पार्टियों ने मंगलवार को दिन भर के लिए राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी, टीएमसी, डीएमके, आप आदि दलों के नेता शामिल रहे। वेंकैया पिछले साल अगस्त में उपराष्ट्रपति बने थे। उसके बाद से विपक्ष ने उन पर यह तीसरी बार पक्षपात का आरोप लगाया है।

    राज्यसभा की कार्यवाही में आज शामिल नहीं होगा विपक्ष

    - सदन स्थगित होने के बाद विपक्ष ने मीटिंग की। फैसला हुआ कि मंगलवार को बाकी बचे वक्त में विपक्ष कार्यवाही में शामिल नहीं होगा। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, “मीटिंग में राज्यसभा चलाए जाने के तरीके पर चिंता जाहिर की गई है। पहले कदम के तौर पर हम सभापति को लेटर भेजेंगे। इसमें हमने कहा है कि राज्यसभा में विपक्ष की आवाज बंद कर सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है।”
    - लेटर पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के सांसदों ने दस्तखत किए।

    सभापति नायडू ने आरोपों को खारिज किया

    - बाद में सभापति नायडू ने विपक्ष के भेदभाव करने के आरोप को खारिज कर दिया। कहा- "मेरा काम सदन के नियमों के मुताबिक कार्यवाही को चलाना है। जो सदन के नियमों के खिलाफ होगा, मैं उसे रोकूंगा। चाहे वह सत्तापक्ष का हो या विपक्ष का।"

    बायकॉट की वजह क्या?

    - मंगलवार की कार्यवाही शुरू होने के बाद टीएमसी और दूसरे विपक्षी दलों ने बोलने का मौका नहीं दिए जाने पर हंगामा शुरू कर दिया। इस पर वेंकैया ने कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

    विपक्ष ने क्या कहा?

    - सदन से बाहर आते ही विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। इसलिए वो मंगलवार को आगे की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा- सांसद दूर-दूर से आते हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। ये अलोकतांत्रिक है।

    विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं - अरुण जेटली

    - इस पर अरुण जेटली ने कहा, “कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने बिल्कुल अनोखा काम किया। कांग्रेस और कुछ दूसरी पार्टियां अपनी तरफ से कुछ मुद्दे बनाना चाहती हैं, जबकि असल में उनके पास कोई मुद्दा है ही नहीं।”

    - “इस हफ्ते संसद में बहुत सारे राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। इसके बजाए सदन के नियम तोड़े जा रहे हैं। हर दिन कोशिश की जाती है कि सदन स्थगित हो जाए। जाहिर है कि वो (विपक्ष) सदन नहीं चलाना चाहते।”

    नायडू पर बीते साल दो बार लगे थे पक्षपात के आरोप
    - अगस्त- 2017:देश के कई हिस्सों में दलितों के उत्पीड़न के मुद्दे को उठाते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने सभापति पर पक्षपात और न बोलने का आरोप लगाया था। बाद में उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया।
    - दिसंबर- 2017:सभापति नायडू ने जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता रद्द कर दी थी। तब उनपर विपक्ष ने सत्तापक्ष के प्रभाव में फैसले लेने का आरोप लगाया था।
    पूर्व सभापति हामिद अंसारी पर दोनों पक्षों ने आरोप लगाए थे
    - फरवरी- 2017: सदन में तत्कालीन सभापति हामिद अंसारी पर सत्तापक्ष ने नकारात्मक माहौल बनाने और विपक्ष ने पक्षपात का आरोप लगाया था। तब अंसारी चेयर से उठकर चले गए थे।

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