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पाकिस्तान में भगत सिंह को वीरता का सर्वोच्च पदक देने की मांग उठी

PAK की एक ऑर्गनाइजेशन ने लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का स्टैच्यू लगाने की मांग उठाई, 86 साल पहले यहीं हुई थी फांसी।

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2018, 09:15 PM IST
लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का स्टैच्यू लगाने की मांग कर रहा है पाकिस्तान का भगत सिंह फाउंडेशन। लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का स्टैच्यू लगाने की मांग कर रहा है पाकिस्तान का भगत सिंह फाउंडेशन।

लाहौर/नई दिल्ली. पाकिस्तान में भगत सिंह को देश का सबसे बड़ा वीरता पदक देने की मांग की गई है। पंजाब प्रांत सरकार को दी गई एक एप्लीकेशन में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने ये मांग रखी है। फाउंडेशन ने लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का एक स्टैच्यू लगाने की डिमांड भी की है। 86 साल पहले 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को उनके दो साथियों- राजगुरू और सुखदेव के साथ लाहौर में फांसी दी गई थी। फाउंडेशन का कहना है कि भगत सिंह ने भारतीय उपमहाद्वीप को आजाद कराने के लिए अपनी जान तक दे दी, इसलिए बहादुरी के लिए उन्हें निशान-ए-हैदर दिया जाना चाहिए।

भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने सरकार से की मांग

- फाउंडेशन ने तर्क दिया कि पाकिस्तान के फाउंडर मोहम्मद अली जिन्ना भी भगत सिंह को सब-कॉन्टिनेंट का सबसे बहादुर शख्स मानते थे।
- "भगत सिंह हमारे हीरो हैं और उन्हें मेजर माज अजीज भट्टी- जो भगत सिंह को अपना हीरो मानते थे, उन्हीं की तरह वीरता का सबसे बड़े सम्मान मिलना चाहिए।"
- बता दें कि मेजर माज अजीज भट्टी पाकिस्तान आर्मी के स्टाफ ऑफिसर थे। उन्हें अपनी बहादुरी के लिए सरकार की तरफ से निशान-ए-हैदर दिया गया था।
- फाउंडेशन ने शादमान चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौक रखने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि जो देश अपने हीरोज को भुला देता है वो खुद भी एक गलत शब्द की तरह धरती से मिट जाता है।

लाहौर में हुई थी भगत सिंह को फांसी

- भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ने वाले भगत सिंह को 23 साल की उम्र में लाहौर में ब्रिटिश सरकार की ओर से फांसी की सजा सुनाई गई थी। उनपर सरकार के खिलाफ साजिश करने और एक ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर जॉन पी सॉन्डर्स हत्या की हत्या के लिए ट्रायल चलाया गया था।

बहादुरी का सबसे बड़ा अवार्ड है निशान-ए-हैदर

- निशान-ए-हैदर का मतलब होता है ‘शेर का निशान’। ये मिलिट्री में दिया जाने वाला वीरता का सबसे बड़ा पदक है। ये पदक उन्हीं सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने आर्म्ड फोर्सेज में देश के लिए बहादुरी से काम किया हो।


जमात उद-दावा कर रही विरोध

- आतंकी हाफिज सईद का संगठन जमात-उद-दावा शादमान चौक का नाम बदलने का विरोध कर रहा है। यहां तक की सिविल सोसाइटी के लोगों को ऐसा ना करने की धमकी भी दी जा चुकी है।

23 मार्च 1931 को भगत सिंह को लाहौर में ही फांसी दी गई थी। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को लाहौर में ही फांसी दी गई थी।
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लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का स्टैच्यू लगाने की मांग कर रहा है पाकिस्तान का भगत सिंह फाउंडेशन।लाहौर के शादमान चौक पर भगत सिंह का स्टैच्यू लगाने की मांग कर रहा है पाकिस्तान का भगत सिंह फाउंडेशन।
23 मार्च 1931 को भगत सिंह को लाहौर में ही फांसी दी गई थी।23 मार्च 1931 को भगत सिंह को लाहौर में ही फांसी दी गई थी।
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