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अपने करीबियों के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेंगी दूसरे धर्म में शादी करने वाली महिलाएं: सुप्रीम कोर्ट की अपील पर पारसी पंचायत का फैसला

हिंदू धर्म में शादी करने वाली पारसी महिला गुलरोख गुप्ता को हाईकोर्ट से नहीं मिली थी अपने धर्मस्थल में जाने की परमिशन।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 14, 2017, 03:13 PM IST

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    दूसरे धर्म में शादी करने वाली गुलरुख गुप्ता ने पारसी धर्मस्थलों में जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी अर्जी।

    नई दिल्ली. हिंदू धर्म में शादी करने वाली एक पारसी महिला गुलरुख गुप्ता को आखिरकार अपने पवित्र धर्मस्थल ‘फायर टेंपल’ और ‘टॉवर ऑफ साइलेंस’ में जाने की परमिशन मिल गई। वलसाड पारसी पंचायत की तरफ से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अंडरटेकिंग दाखिल कर कहा गया कि वो पिटीशनर गुलरुख गुप्ता को फायर टेंपल और टावर ऑफ साइलेंस में एंट्री देगा। फायर टेंपल और टॉवर ऑफ साइलेंस पारसियों के धर्मस्थल हैं। टॉवर ऑफ साइलेंस में पारसियों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यहां दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री बैन होती है, जिसके चलते दूसरे धर्म में शादी करने वाले पारसियों को भी यहां नहीं जाने दिया जाता। इसी के विरोध में गुलरुख ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर टेंपल में जाने की मांग की थी।

    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    - गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच के सामने वलसाड पारसी पंचायत के वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने गुलरुख की टेंपल में एंट्री को लेकर एक अर्जी दाखिल की। इसमें कहा गया कि टेंपल में महिला की एंट्री पर कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
    - बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुलरुख की इस बात पर सहमति जताई थी कि किसी महिला के दूसरे धर्म में शादी करने से उसकी अपनी धार्मिक पहचान खत्म नहीं हो जाती।
    - इसके बाद कोर्ट ने गुजरात की वलसाड पारसी पंचायत से इस मामले में प्रगतिशील रवैया अपनाने की बात कही थी।

    केस में अब तक क्या हुआ था?
    - अपने 84 साल के माता-पिता की खराब होती तबीयत को देखते हुए गुलरुख ने इससे पहले अहमदाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। उनका कहना था कि अपने माता-पिता की मौत की स्थिति में उन्हें टॉवर ऑफ साइलेंस में जाने की इजाजत दी जाए।
    - गुलरुख ने पारसी कम्युनिटी के बाहर एक हिंदू शख्स से शादी की थी। इसके चलते पारसी समुदाय ने गुलरुख को टेंपल ऑफ साइलेंस में जाने से मना कर दिया था। अहमदाबाद हाईकोर्ट ने भी कम्युनिटी के इस रिवाज को बरकरार रखा था।
    - इसके बाद गुलरुख ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर टॉवर ऑफ साइलेंस में जाने की इजाजत मांगी थी।

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    अपने 84 साल के माता-पिता के साथ गुलरुख।
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Web Title: Parsi Women Allowed Entry At Fire Temple And Tower Of Silence
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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