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बैंकिंग इंडस्ट्री का सबसे बड़ा फ्रॉड: PNB में 11,356 Cr की धोखाधड़ी, एक हीरा कारोबारी पर केस दर्ज

यह रकम 2016-17 में बैंक के 1,325 करोड़ के मुनाफे का 8 गुना, बैंक के 35,365 करोड़ के मार्केट कैप का एक तिहाई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 15, 2018, 08:35 AM IST

    • VIDEO: पीएनबी देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है। (फाइल)

      नई दिल्ली.बैंकिंग सेक्टर के 11,356 करोड़ रुपए के सबसे बड़े फ्रॉड ने सभी को चौंका दिया है। पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई की ब्रेडी हाउस ब्रांच में इसे अंजाम दिया गया और शुरुआत 2011 से हुई। 8 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई। नीरव मोदी जो 2017 में फोर्ब्स की अमीर भारतीयों की लिस्ट में शामिल थे....इस फ्रॉड के केंद्र में हैं। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने भारत में नीरव के10 ठिकानों पर छापे मारे हैं। 4 दूसरी ज्वेलर कंपनियों की जांच भी की जा रही है। सीबीआई को पीएनबी ने 150 फेक LoUs की लिस्ट सौंपी, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर हुई। फ्रॉड की रकम पीएनबी के मुनाफे की 8 गुना है। फ्रॉड से जुड़े अहम सवालों के जवाब दिए कॉरपोरेट हिस्टोरियन और कॉलमिस्ट प्रकाश बियाणी ने।

      Q&A में जानें किस तरह अंजाम दी गई 11,356 करोड़ की धोखाधड़ी?

      1) फ्रॉड कैसे शुरू हुआ, किन सर्विसेस का इस्तेमाल हुआ?

      # LC यानी लेटर ऑफ क्रेडिट

      - इसकी शुरुआत तब हुई जब डायमंड फर्म्स ने रफ स्टोन्स के एक्सपोर्ट के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) के लिए पीएनबी से संपर्क करना शुरू किया। LC एक आम बैंकिंग टूल की तरह है, जिसकी शर्तों के मुताबिक, पीएनबी की नीरव मोदी की फर्म की तरफ से ओवरसीज सप्लायर्स को पेमेंट करना था। ये पेमेंट निश्चित अवधि जो कि 3 महीने की थी, उसके लिए किया गया। पीएनबी को ये पैसा इसके बाद नीरव मोदी से रिकवर करना था। मार्केट में ये भी सुविधा दी गई है कि अगर LC की अवधि खत्म होने तक क्लाइंट यानी नीरव मोदी पैसे वापस नहीं कर पा रहे हैं, तो उसे लौटा दिया जाए।

      # फेक LoUs यानी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग

      - धोखाधड़ी को लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) के आधार पर अंजाम दिया गया, जिन्हें लोकल बैंक ने जारी किया। नीरव मोदी के केस में ये बैंक पीएनबी था। पीएनबी के इम्प्लॉईज ने फेक LoUs जारी किए जिनके आधार पर कुछ भारतीय बैंकों, जिनमें एक्सिस और इलाहाबाद बैंक शामिल थे... की विदेश शाखाओं ने पीएनबी को डॉलर में लोन दिया।

      - ये LoUs पुराने समय की हुंडी की तरह है, जिसके जरिए गारंटी लेकर क्लाइंट को दूसरी जगहों पर बड़ी रकम हासिल करने की सुविधा दी जाती थी।

      # NOSTRO Accounts

      - ये विदेश में बैंक का अकाउंट होता है। इस केस में ये बैंक पीएनबी था। पीएनबी को NOSTRO Account में ही इलाहाबाद और एक्सिस की फॉरेन ब्रांच ने फेक LoUs के आधार पर फॉरेन करंसी में लोन दिया। इसके बाद ये रकम NOSTRO Account से तय विदेशी पार्टियों के अकाउंट में ट्रांसफर की गई।

      # SWIFT network

      - फर्जी LoUs के आधार पर पीएनबी के इम्प्लाईज ने इलाहाबाद और एक्सिस बैंक को फंड रिक्वायरमेंट का मैसेज भेजने के लिए SWIFT Network का गलत इस्तेमाल किया।

      - SWIFT का इस्तेमाल करने के लिए इम्प्लाई को नेटवर्क में लॉगइन करना होता है और अकाउंटर नंबर और स्विफ्ट कोड जैसी फील्ड में डिटेल भरनी होती है। इसे एक सुपरवाइजर अपना सपोर्ट देता है। ये प्रक्रिया तब पूरी होती है, जब बैंक डिटेल्स के कन्फर्मेशन और वैलिडेशन का मैसेज रिसीव करता है। क्योंकि, ये फ्रॉड SWIFT पासवर्ड का इस्तेमाल करके हुआ था इसलिए बैंक के कोर सिस्टम में ये कभी रिकॉर्ड नहीं हुआ। इसी के चलते पीएनबी का मैनेजमेंट लंबे अरसे तक अंधेरे में रहा।

      2) सीबीआई ने केस कब दर्ज किया, अब तक जांच में क्या हुआ?
      - ऑफिशियल्स ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, "नीरव मोदी ने एक जनवरी को ही देश छोड़ दिया था, इसके काफी बाद सीबीआई के पास शिकायत पहुंची थी। सीबीआई ने नीरव मेदी के खिलाफ सर्कुलर जारी किया और 31 जनवरी को एफआईआर दर्ज की। सीबीआई ने 3-4 फरवरी को सर्च की और कम्प्यूटर्स सीज किए, जांच एजेंसी ने इसकी तस्वीरें भी लीं। सूरत और मुंबई में 20 जगहों पर सर्च हुई। पीएनबी ने सीबीआई को 150 फेक LoUs की लिस्ट सौंपी, जिसके जरिए नीरव मोदी से जुड़ी फर्म्स को पैसा ट्रांसफर किया गया।"

      - CBI ने कहा, "हमने नीरव की वाइफ एमी मोदी के वर्ली (मुंबई) स्थित घर पर 3-4 फरवरी को छापा मारा। जरूरी बिल और एप्लीकेशन समेत 95 डॉक्युमेंट्स जब्त किए। इस मामले में पीएनबी ऑफिशियल्स से पूछताछ की गई है और एक को अरेस्ट भी किया गया है। 4 फरवरी को लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया।"

      - "नई शिकायतों को एनालाइज किया जा रहा है, इसके बाद फैसला लिया जाएगा कि नई एफआईआर दर्ज की जाए या फिर 280 करोड़ के फर्जी ट्रांजैक्शंस के केस को ही बढ़ाया जाए। इस केस में हांगकांग स्थित इलाहाबाद और एक्सिस बैंक की शाखाओं को LoUs जारी किए गए थे। "

      3) कहां कहां छापे मारे गए और क्या कदम उठाया गया?

      - ED ने गुरुवार को हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के 17 ठिकानों पर छापे मारकर मुंबई स्थित 6 प्रॉपर्टियां सील कर दीं। सर्च के दौरान 5100 करोड़ रुपए के स्टॉक्स, हीरे और सोने के जेवर जब्त किए गए हैं।

      - इसके अलावा बैंक अकाउंट्स में पड़ी 3.9 करोड़ की रकम और फिक्स्ड डिपॉजिट्स को भी फ्रीज कर दिया गया है। कुछ रिकॉर्ड्स की जांच फिर से की जा रही है। सीबीआई ने नीरव की पत्नी एमी के मुंबई स्थित घर पर 3-4 फरवरी को छापा मारा था।

      4) इस फ्रॉड से बिजनेस पर क्या असर?

      - LIC और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के करीब 1700 करोड़ रुपए डूब गए हैं। LIC ने दिसंबर 2017 में पीएनबी में अपनी हिस्सेदारी 1.41% से बढ़ाकर 13.93% कर दी थी। क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के तौर पर ली गई हिस्सेदारी के चलते LIC को 1120 करोड़ का झटका लगा। 42 म्युचुअल फंड कंपनियों की बैंक में 8.1% हिस्सेदारी है, उन्हें 640 करोड़ का झटका लगा है।

      5) फ्रॉड में किन कंपनियों का नाम?

      - पीएनबी की शिकायत के मुताबिक, डायमंड का कारोबार करने वाली तीन कंपनियों डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स ने 16 जनवरी को कॉन्टैक्ट किया। नीरव मोदी, उसकी पत्नी, भाई और बिजनेस सहयोगी इन कंपनियों में पार्टनर हैं। ये कंपनियां विदेशी सप्लायरों को भुगतान के लिए शॉर्ट टर्म क्रेडिट (कर्ज) चाहती थीं।

      - बैंक अधिकारियों ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) देने से पहले 100% कैश मार्जिन मांगा। तीनों फर्मों ने कहा कि वे पहले भी यह सुविधा लेती रही हैं, हालांकि बैंक के रिकॉर्ड में ऐसा कहीं नहीं दिखा। मार्च 2010 से बैंक के फॉरेक्स डिपार्टमेंट में कार्यरत डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने मनोज खरात नाम के एक अन्य बैंक अधिकारी के साथ मिलकर इन कंपनियों को फर्जी तरीके से एलओयू दे दिया।
      - वित्त मंत्रालय के फाइनेंशियल सर्विस डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी राजीव कुमार ने बताया कि यह मामला मशहूर डायमंड ज्वेलर नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स से जुड़ा है। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि गिनी और नक्षत्र जैसी दूसरी बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

      - पीएनबी एमडी सुनील मेहता ने कहा, "गड़बड़ी ज्यादातर भारतीय बैंकों की फॉरेन ब्रांचों की वजह से हुई।"

      6) धोखाधड़ी की रकम की पीएनबी के लिए क्या अहमियत?

      - धोखाधड़ी की रकम 2016-17 में बैंक के 1,325 करोड़ के मुनाफे का 8 गुना, बैंक के 35,365 करोड़ के मार्केट कैप का एक तिहाई और 4.5 लाख करोड़ के कुल कर्ज का 2.5% है।
      - बुधवार को बीएसई में पीएनबी के शेयरों में 9.8% की गिरावट आई। इसके इन्वेस्टर्स को करीब 3,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। पीएनबी देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है।

      7) किस लेवल के अफसर शामिल हैं?
      - वित्त मंत्रालय के अफसरों के मुताबिक यह धोखाधड़ी 2011 से चल रही थी। इसमें डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) स्तर तक के अधिकारी शामिल थे। मंत्रालय ने इस मामले से जुड़े सभी बैंकों से तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है।
      - इससे पहले 5 फरवरी को सीबीआई ने नीरव, उसकी पत्नी एमी, भाई निशाल और बिजनेस पार्टनर मेहुल चीनूभाई चौकसी के खिलाफ केस दर्ज किया था।

      8) बैंक कर्मचारियों के खिलाफ क्या एक्शन लेगा?
      - पीएनबी के एमडी ने कहा, "हमने माना है कि हमारे कर्मचारियों ने सिस्टम से धोखा किया है। इसलिए उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। आप ये तय मानिए कि कोई भी कितना भी बड़ा क्यों ना हो, हम किसी को छोड़ने वाले नहीं हैं। ये हमारी साख का सवाल है। हमने एफआईआर दर्ज की हैं। आरोपी ग्रुपों के खिलाफ रेड चल रही हैं।"

      9) चूक क्यों, क्या ये एनपीए है?

      - प्रकाश बियाणी ने कहा, "इस फ्रॉड से एनपीए से कोई लेना-देना नहीं है। यह बैंक स्टाफ के साथ साठगांठ करके धोखाधड़ी हुई है। वैसे ही जैसे बैंक स्टाफ की मदद से किसी के खाते से पैसा निकाल लेना। इसमें बैंक स्टाफ ने सिस्टम का पालन नहीं किया। जिन्हें लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने का पावर नहीं था, उन्होंने जारी कर दी और ये रिकॉर्ड में भी नहीं है।"

      10) नीरव मोदी के ब्रांड से कौन सी सेलिब्रिटीज जुड़ी है?

      - नीरव मोदी के ब्रांड से हॉलीवुड एक्ट्रेस केट विंसलेट, ताराजी हेन्सन, कार्ली क्लॉस और वायोला डेविस और प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शर्मा जैसी एक्ट्रेस और मॉडल्स ऑस्कर जैसे समारोह में पहन चुकी हैं।

      - इनमें कई नीरव की ब्रांड एम्बेसडर भी रही हैं। दुनिया के डायमंड कैपिटल एंटवर्प में जन्मे नीरव 'नीरव मोदी' ब्रांड नाम से प्रोडक्ट बेचते हैं। नीरव की नेटवर्थ 11,500 करोड़ रुपए है।

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