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लग्जरी ट्रेनों में 30% सीटें ही क्यों भर पा रहीं: पार्लियामेंट्री पैनल का रेलवे मिनिस्ट्री से सवाल

रेलवे अपने अफसरों के इस्तेमाल वाले लग्जरी सलून कोच आम लोगों को उपलब्ध कराने का प्लान बना रहा है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 05, 2018, 05:27 PM IST

    • VIDEO: रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे के खर्च पर चलने वाली महाराजा एक्सप्रेस में 2012-2013 में सिर्फ 29.86 फीसदी सीटें ही भर पाईं।

      नई दिल्ली. लग्जरी ट्रेनों में सिर्फ 30% सीटें ही क्यों भर पा रही हैं। रेलवे से संबंधित पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने रेलवे से इस पर जवाब मांगा है। कमेटी ने 'पर्यटन एवं तीर्थयात्रा सर्किट' को लेकर संसद में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया है कि यह ट्रेंड रोकने के लिए रेलवे को कदम उठाने की जरूरत है।

      गुरुवार को ही रेलवे ने सलून कोच के लिए की थी मीटिंग

      - कमेटी ने यह बात ऐसे वक्त में रखी है, जब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने रेलवे के जरिए टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए संबंधित पक्षों के साथ पहली बार मीटिंग की है।

      कमेटी को उम्मीद, रेलवे जांच कराएगा

      - रिपोर्ट में कहा गया है, "लग्जरी ट्रेनों में सीटों के खाली रह जाने को मंत्रालय की ओर से गंभीरता से न लिए जाने पर कमेटी ने चिंता जाहिर की है। उम्मीद है कि मंत्रालय इसकी सही ढंग से जांच करेगा और लग्जरी ट्रेनों में सिर्फ 30% तक सीटें भर पाने की वजहों का पता लगाएगा।"

      'हैरान करने वाला है डाटा'

      - कमेटी के मुताबिक, इन ट्रेनों में सीटों के भरने का आंकड़ा "हैरान करने वाला" है।

      - रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012 से 2017 के बीच महाराजा एक्सप्रेस में 62.7%, गोल्डन चैरियट में 57.76%, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स में 45.46% और डेक्कन ओडिसी में 45.81% सीटें खाली रही हैं।

      महाराजा एक्सप्रेस में सिर्फ 30%से 40%सीटें भरीं

      - यह कमेटी टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की अगुआई वाली है। रिपोर्ट कहा है कि महाराजा एक्सप्रेस राज्य सरकार की साझेदारी के बगैर पूरी तरह से रेलवे के खर्च पर चलती है। यह बहुत परेशान करने वाला है कि इस ट्रेन में 2012-2013 में सिर्फ 29.86%, 2013-2014 में 32.33%, 2014-2016 में 41.8% और 2016-2017 में 36.03% सीटें भर पाई हैं।

      रेलवे पेश कर सकता है बेडरूम-किचन वाले लग्जरी कोच

      - रेलवे जल्द ही बेडरूम, किचन, लाउंज और टॉयलेट वाले अपने लग्जरी सलून में आम लोगों को सफर करने का मौका दे सकता है।

      - रेलवे के इस प्लान पर दिल्ली में गुरुवार को बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी की ट्रैवल और ट्रेड एसोसिएशन्स के साथ मीटिंग की थी।

      - अफसरों से ऐसे दो कोच को टूरिज्म के मकसद से मुहैया कराने का प्लान बनाने को कहा है। इसका मकसद इस तरह के लग्जरी कोच में सफर को प्रमोट करना है।

      क्या होते हैं सलून कोच?

      - रेलवे के सलून कोच उसके सीनियर अफसरों के लिए होते हैं। वे एक्सीडेंट वाली जगह या दूर-दराज के इलाकों में इंस्पेक्शन पर जाने के लिए इन कोच का इस्तेमाल करते हैं।

      - देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं। इनमें से 62 एयरकंडीशंड हैं।

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      महाराजा एक्सप्रेस में 2012 से 2017 के बीच सिर्फ महाराजा एक्सप्रेस में 62.7 फीसदी सीटें ही भर पाईं। -फाइल
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      रेलवे अपने दो सलून कोच आम लोगों के लिए पेश करने की तैयारी कर रहा है। -फाइल
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      रेलवे सलून कोच का इस्तेमाल डिपार्टमेंट के सीनियर अफसर इन्सपेक्शन पर जाते वक्त करते हैं। -फाइल
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    Web Title: Railway Parliamentary Panel Ask Why Luxury Trains Running At 30pc Occupancy
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