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कोहरे या एक्सीडेंट्स नहीं बल्कि मेंटेनेंस के काम के चलते देरी से चल रही ट्रेनें: रेलवे

बीते अक्टूबर से रेलवे हर महीने पुराने और आउट ऑफ डेट ट्रैक्स को बदलने के लिए एक हजार करोड़ रुपए खर्च कर रहा है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 07, 2018, 01:48 PM IST

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    अप्रैल-दिसंबर 2017 में 2016 के मुकाबले मेंटेनेंस के काम में 43% का इजाफा हुआ।

    नई दिल्ली. ट्रेनों की लेट-लतीफी पर रेलवे को सफाई देनी पड़ी है। रविवार को रेलवे की तरफ से कहा गया कि केवल कोहरे, किसी अनिश्चितता या फिर एक्सीडेंट्स के चलते नहीं बल्कि बड़े स्तर पर चल रहे सुधार काम के चलते 10 में से 4 ट्रेनें लेट हो रही हैं। बता दें कि ट्रेनों के लेट होने के चलते की सबसे ज्यादा कीमत पैसेंजर्स को ही चुकानी पड़ती है। अप्रैल-दिसंबर 2017 में 2016 के मुकाबले मेंटेनेंस के काम में 43% का इजाफा हुआ।

    2017 में एक लाख से ज्यादा ट्रेनें लेट हुईं

    - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2017 में 1 लाख 9 हजार 704 ट्रेनें लेट हुईं। इसी अवधि में 2016 में 93 हजार 612 ट्रेनें लेट हुईं।
    - इनमें से 5% ट्रेनें ही एक्सीडेंट्स, 20% किसी फेल्योर जबकि 40% ट्रेनों में रिपेयर वर्क के चलते देरी हुई। बाकी ट्रेनों में देरी मौसम के चलते हुई।
    - अफसरों का कहना है कि आने वाले सालों में रेलवे के लिए सेफ्टी सबसे अहम होगी। लोगों को चाहिए कि वे मेंटेनेंस के चलते हो रही ट्रेनों की देरी को बर्दाश्त करें।

    बीते साल के 8 महीने में ब्लॉक अवर में 18% इजाफा

    - रेलवे के एक सीनियर अफसर ने बताया कि अप्रैल-नवंबर 2017 में मेंटेनेंस के चलते ब्लॉक अवर में पिछले साल के मुकाबले 18% का इजाफा हुआ। इसके चलते पूरे रेलवे नेटवर्क में ट्रेनें देरी से चलीं।
    - बीते अक्टूबर से रेलवे हर महीने पुराने और आउट ऑफ डेट ट्रैक्स को बदलने के लिए एक हजार करोड़ रुपए खर्च कर रहा है।
    - रेल मिनिस्टर पीयूष गोयल ने चालू वित्तीय वर्ष में 3600 किमी ट्रैक सुधारने का टारगेट रखा है। ये हर वित्तीय वर्ष में 2 हजार किमी के ट्रैक सुधारने से 80% ज्यादा है।

    रेलवे ने दिसंबर में रिकॉर्ड रिन्यूवल

    - अफसर के मुताबिक, रेलवे ने दिसंबर में 476 किमी ट्रैक रिन्यूबल का रिकॉर्ड काम किया।
    - "सेफ्टी हमारी पहली प्राथमिकता है। रिपेयर और मेंटेनेंस से ही हम इस टारगेट का पा सकते हैं।''
    - मेंटेनेस के चलते अप्रैल-दिसंबर 2017 में ट्रेनों की पंक्चुअलिटी 74.5% रही, जो पिछले साल इसी दौरान ट्रेनों के वक्त पर पहुंचने से 3.73% कम है।
    - बता दें कि रेलवे ने देशभर में मेंटेनेंस के काम को 3 हजार से बढ़ाकर 5 हजार कर दिया है।

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    अप्रैल-दिसंबर 2017 में 1 लाख 9 हजार 704 ट्रेनें हुईं। इसी अवधि में 2016 में 93 हजार 612 ट्रेनें लेट हुईं।
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