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ज्यूडीशियरी के लिए काला दिन, अब हर कोई कोर्ट के फैसले को शक की निगाह से देखेगा: उज्ज्वल निकम

सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों ने जस्टिस जे चेलामेश्वर के घर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीजेआई के कामकाज पर सवाल उठाए।

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2018, 02:28 PM IST
उज्ज्वल निकम महाराष्ट्र के जा उज्ज्वल निकम महाराष्ट्र के जा

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक्रवार को सीजेआई के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाए। SC के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब उसके ही सिटिंग जजों ने मीडिया में अपनी बात रखी। इस पर सीनियर वकीलों और रिटायर्ड जजों ने रिएक्शन दिए। उज्ज्वल निकम ने इसे ज्यूडिशियरी के लिए काला दिन बताया। हालांकि, जजों के इस कदम पर ज्यूडिशियल सिस्टम से जुड़े कुछ लोग उनके समर्थन में भी दिखे। इन लोगों ने कहा- जजों के इस फैसले की कोई तो गंभीर वजह होगी।

जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कानूनी जानकारों की राय

1) केटीएस तुलसी

- सीनियर एडवोकेट और संविधान के जानकार केटीएस तुलसी ने कहा, ''यह बेहद चौकाने वाला है। इसके पीछे कोई ठोस वजह हो सकती है। जिसकी वजह से उन्हें इस तरह अपनी बात रखनी पड़ी। जब वे बोल रहे थे तो हर कोई उनके चेहरे पर दर्द साफ देख सकता था।''

2) इंदिरा जयसिंह

- सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा, ''ये एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। बहुत अच्छी तरह से हुई। देश की जनता को यह जानने का हक है कि ज्यूडिशियरी में क्या चल रहा है। मैं इसका स्वागत करती हूं।''

- ''प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ नहीं हैं। इनका मकसद है कि कैसे इंस्टीट्यूशन को और मजबूत बनाया जाए। जैसा उन्होंने कहा कि वे कोर्ट जाएंगे और पहले की तरह काम करेंगे।''

3) उज्ज्वल निकम

- सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने कहा, ''यह ज्यूडिशियरी के लिए काला दिन है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस खराब मिसाल साबित होगी। आज के बाद हर आम नागरिक सभी ज्यूडिशियल ऑर्डर को संदेह के तौर पर देखेगा। हर फैसले पर लोग सवाल उठाएंगे।''

4) रिटायर्ड जस्टिस आरएस. सोढ़ी

- रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढ़ी ने कहा, ''मुझे लगता है कि चारों जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जाना चाहिए। उनके पास वहां काम करने और फैसले देने के अलावा कोई काम नहीं है। इस तरह से यूनियन बनाना गलत है। ये कहने की जरूरत नहीं है कि लोकतंत्र खतरे में है। हमारे पास संसद, कोर्ट और पुलिस सिस्टम है।''
- ''यह कोई मुद्दा नहीं है। जजों ने एडमिनिस्ट्रेटिव प्रॉसेस को लेकर शिकायत की है। वे सिर्फ 4 हैं, सुप्रीम कोर्ट में 23 जज और भी हैं। 4 जज एक साथ होकर सीजेआई पर आरोप लगा रहे हैं। यह अपरिपक्व और बचकाना व्यवहार है।''

5) रिटायर्ड जस्टिस मुकुल मुदगल

- हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज मुकुल मुदगल ने कहा, ''इसके पीछे कोई गंभीर कारण होना चाहिए। जब उनके पास प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता न बचा हो। लेकिन क्या जस्टिस लोया केस से इसका कनेक्शन है? मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता और किसी राजनीतिक मुद्दे पर कमेंट नहीं करना चाहता ।''

6) सुब्रमण्यम स्वामी

- बीजेपी नेता और सीनियर वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, ''हम उनकी (जजों) की आलोचना नहीं करते। बड़े ईमानदार व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी लीगल करियर की भेंट चढ़ाई है। हमें उनका सम्मान करना चाहिए। प्रधानमंत्री तय करें कि सुप्रीम कोर्ट के चारों जज, सीजेआई और पूरा कोर्ट एक राय बनाकर आगे काम करे।''

7) सलमान खुर्शीद
- कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा, ''बेहद दुखी हूं कि सुप्रीम कोर्ट में तनाव को लेकर जजों को आज मीडिया को एड्रेस करना पड़ा है।''

8) हंसराज भारद्वाज

- पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा, ''इससे पूरे इंस्टीट्यूशन की प्रतिष्ठा कम हुई है। जब आपने जनता का भरोसा खो दिया तो फिर क्या बचा? ज्यूडिशियरी को लोकतंत्र का स्तंभ बनना चाहिए। कानून मंत्री की जिम्मेदारी है कि वह कैसे काम करती है।''

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