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शोपियां फायरिंग: आर्मी पर्सनल्स के खिलाफ FIR, PAK ने कहा- IoK में निहत्थों पर गोलियां चलाई गईं

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां में हुई फायरिंग के मामले में आर्मी पर्सनल्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2018, 06:29 PM IST
श्रीनगर में लोगों से पूछताछ कर श्रीनगर में लोगों से पूछताछ कर

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां में शनिवार को हुई फायरिंग के मामले में आर्मी पर्सनल्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। ये आर्मी पर्सनल्स 10 गढ़वाल यूनिट के हैं और इनमें एक मेजर रैंक का अफसर भी शामिल है। 302 (मर्डर) और 307 (अटेम्प्ट टु मर्डर) के तहत केस दर्ज किया गया है। इस बीच आर्मी चीफ ने इस बात को खारिज कर दिया है कि अब आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) को खत्म करने का वक्त आ गया है। जनरल बिपिन रावत ने कहा, "हमें ह्यूमन राइट्स की फिक्र है।" उधर, PAK फॉरेन ऑफिस ने इस घटना की निंदा की और कहा- इंडियन ऑकुपाइड कश्मीर (IoK) में निहत्थों पर गोलियां चलाई गईं। बता दें कि शनिवार को शोपियां में प्रदर्शन के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस घटना की मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं।

पाकिस्तान ने क्या कहा?


- PAK फॉरेन ऑफिस ने शोपियां फायरिंग की निंदा की। स्टेटमेंट में FO ने कहा, "27 जनवरी को IoK में शोपियां में फायिरंग में 3 सिविलियन मारे गए। शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनारियों पर जानलेवा हथियारों का प्रयोग और गोलियां चलाना सरकारी आतंकवाद का एक और नमूना है। कश्मीरियों के खिलाफ भारत की तरफ से ऐसा रोज किया जा रहा है। हम पूरी तरह से कश्मीरियों के साथ हैं। इंटरनेशनल कम्युनिटी को इस सिस्टमैटिक ह्यूमन राइट वॉयलेशन पर ध्यान देना चाहिए।"

कब और कहां हुई फायरिंग?


- अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को सेना का एक काफिला शोपियां के गनोवपोरा गांव से गुजर रहा था। इसी दौरान कुछ प्रोटेस्टर्स ने काफिले पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। जवाब में सिक्युरिटी फोर्सेज ने उन्हें भगाने के लिए कुछ राउंड फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

आर्मी चीफ ने क्या कहा?

- आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से ऑपरेशंस के दौरान AFSPA और इम्युनिटी के सवाल पर कहा, "मुझे ऐसा नहीं लगता है कि इस पर अभी दोबारा सोचने की जरूरत है। आर्मी इन एरिया में ऑपरेशंस के दौरान सावधानी बरत रही है और ह्यूमन राइट्स की रक्षा कर रही है।"

- आर्मी चीफ से ये सवाल उन रिपोर्ट्स पर किया गया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में AFSPA का सरल और नर्म स्वरूप लाए जाने की मांग पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि AfSPA के कुछ प्रावधानों को हल्का करने या हटाने को लेकर सरकार और सेना के बीच हाईलेवल मीटिंग्स हुई हैं।

कश्मीर में पत्थरबाजी पर कितना असर पड़ा है?
- बता दें कि कुछ ही समय पहले जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने पत्थरबाजी में गिरावट आने की बात कही थी। उन्होंने टेरर फंडिंग रोकने के लिए NIA की तारीफ की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर में 2017 में 90% तक पत्थरबाजी की घटनाएं कम हो गई हैं।
- उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर की जनता समझ चुकी है कि इससे उनका ही नुकसान होता है। साथ ही उनको ये लगने लगा है कि वो जिन पुलिसवालों पर पत्थर फेंक रहे हैं वो उनकी ही कम्युनिटी के हैं।
- डीजीपी ने पत्थरबाजी में कमी आने की एक बड़ी वजह सेना के ऑपरेशन ऑलआउट को बताया था। वैद्य ने कहा था कि टॉप आतंकी कमांडर्स का मारा जाना पत्थरबाजी में कमी की एक बड़ी वजह है। नोटबंदी भी पत्थरबाजी में कमी की वजह है।

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