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सुप्रीम कोर्ट में आ सकता है ट्रांसपेरेंट रोस्टर सिस्टम, CJI ने सुझावों पर साथी जजों से की चर्चा

संवेदनशील मामले जजों को सौंपे जाने के लिए एक ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाने के सुझावों पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने विचा

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 21, 2018, 07:16 PM IST

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    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट में क्लियर कट रोस्टर सिस्टम ला सकते हैं।

    नई दिल्ली.संवेदनशील मामले जजों को सौंपे जाने के लिए एक ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाने के सुझावों पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने विचार किया है। न्यूज एजेंसी को एक करीबी सोर्स ने बताया, "CJI दीपक मिश्रा ने केस के जजों को दिए जाने के लिए ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाने के सुझावों पर साथी जजों के साथ चर्चा की है। संभव है कि वे जल्द ही इस संबंध में एक ट्रांसपेरेंट सिस्टम पब्लिक डोमेन में रखेंगे, जिसको अपनाया जाना है।' बता दें कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और इसमें CJI द्वारा केसों को जजों को सौंपे जाने पर सवाल उठाया था। इसमें जस्टिस बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच कराए जाने का मामला भी शामिल था।

    SC में नए सिस्टम को लेकर अब तक क्या हुआ?

    1) जजों ने जो मसले उठाए थे, उन पर विचार
    - सोर्सेस का कहना है, "जस्टिस बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच कराए जाने की दो पिटीशन की सुनवाई CJI की अध्यक्षता वाली बेंच में किया जाना ये दिखाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो भी मसले उठाए गए थे, उन पर विचार किया जा रहा है। इनमें जजों को केसों का अलाटमेंट भी शामिल है।"

    2) सुझावों पर साथी जजों के साथ चर्चा
    - न्यूज एजेंसी को सोर्सेस ने बताया, "CJI ने साथी जजों के साथ चर्चा की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सुझावों पर भी विचार किया गया। संभव है कि क्लियरकट रोस्टर सिस्टम जल्द आए। संभव है कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री केसों के आवंटन के मसले पर CJI के फैसले को अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करे। ये सिस्टम पब्लिक डोमेन में भी रखा जाएगा, ताकि ये पता चले कि किस कैटेगिरी के केस की सुनवाई कौन जज करेगा।"


    SCBA ने क्या कहा?
    - SCBA के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने कहा, "हमें इस बात की पूरी उम्मीद है कि CJI हमारे सुझावों को स्वीकार करेंगे। और, जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जो गलतफहमियां सामने आई हैं, वो सभी दूर हो जाएंगी।'

    CJI और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जजों में मुलाकात कब?
    - सोर्सेस का कहना है, "संभव है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जजों के बीच सोमवार को मुलाकात हो।'
    - बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों से 16 जनवरी को भी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने मुलाकात की थी। ये मुलाकात करीब 15 मिनट तक चली।


    प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले थे सीनियर जज?

    - 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने अभूतपूर्व कदम उठाया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद दूसरे नंबर के सीनियर जज जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने मीडिया में 20 मिनट बात रखी। दो जज बोले, दो चुप ही रहे।
    - जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। कहा- "लोकतंत्र दांव पर है। ठीक नहीं किया तो सब खत्म हो जाएगा।" चीफ जस्टिस को दो महीने पहले लिखा 7 पेज का पत्र भी जारी किया। इसमें कहा गया है कि चीफ जस्टिस पसंद की बेंचों में केस भेजते हैं। चीफ जस्टिस पर महाभियोग के सवाल पर बोले कि यह देश तय करे। उन्होंने जज लोया की मौत के केस की सुनवाई पर भी सवाल उठाए।

    जजों ने चीफ जस्टिस पर क्या आरोप लगाए?

    1.चीफ जस्टिस ने अहम मुकदमे पसंद की बेंचों को सौंप दिए। इसका कोई तर्क नहीं था। यह सब खत्म होना चाहिए। कोर्ट में केस अलॉटमेंट की मनमानी प्रॉसेस है।
    2. जस्टिस कर्णन पर दिए फैसले में हममें से दो जजों ने अप्वाइंटमेंट प्रॉसेस दोबारा देखने की जरूरत बताई थी। महाभियोग के अलावा अन्य रास्ते भी खोलने की मांग की थी।
    3. कोर्ट ने कहा था कि एमओपी में देरी न हो। केस संविधान पीठ में है, तो दूसरी बेंच कैसे सुन सकती है? कॉलेजियम ने एमओपी मार्च 2017 में भेजा पर सरकार का जवाब नहीं आया। मान लें कि वही एमओपी सरकार को मंजूर है।

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    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा।
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    सुप्रीम कोर्ट ने 4 सीनियर जजों ने 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केसों के अावंटन पर भी सवाल उठाए थे।
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Web Title: Judges Row: SC To Soon Make Public Work Allocation System
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