Hindi News »National »Latest News »National» अयोध्या विवाद - सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर अहम सुनवाई - Supreme Court Final Hearing Ayodhya Dispute Ram Janm Bhumi Babri Case

अयोध्या: हम राजनीति नहीं, तथ्य देखते हैं: 2019 के चुनाव तक सुनवाई टालने की मांग पर SC

सिब्बल ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई 7 जजों को बेंच करे और सुनवाई 2019 इलेक्शन के बाद हो।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 12:37 PM IST

    • VIDEO: 8 फरवरी को होगी अयोध्या मामले की SC में सुनवाई...

      नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में हुई दूसरी सुनवाई भी ट्रांसलेशन में अटक गई। कुल 19,590 पेज में से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हिस्से के 3260 पेज जमा नहीं हुए। मंगलवार को सुनवाई टालने की मांग करते हुए बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह केस सिर्फ भूमि विवाद नहीं, राजनीतिक मुद्दा भी है। चुनाव पर असर डालेगा। 2019 के चुनाव के बाद ही सुनवाई करें। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को बेतुका बताते हुए कहा- हम राजनीति नहीं, केस के तथ्य देखते हैं। फिर सिर्फ डॉक्युमेंट्स पूरे करने के लिए 8 फरवरी तक सुनवाई टाल दी।

      सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा- आगे नहीं टलेगी सुनवाई

      - बुधवार को इस मामले में करीब 2 घंटे सुनवाई चली। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि उस दिन कोई भी डॉक्युमेंट्स के नाम पर सुनवाई टालने की मांग नहीं करेगा। सभी पक्ष अपने डॉक्युमेंट्स तैयार करें। दूसरे पक्षों के साथ बैठ कॉमन मेमोरेंडम बनाएं। कोर्ट ने 116 दिन पहले 11 अगस्त को 7 लैंग्वेज के डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन करवाने को कहा था।

      किस तरह चली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई?

      1) सुनवाई 7 जजों की बेंच करे - सिब्बल

      कपिल सिब्बल: सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से सिब्बल ने कहा, "मुझे इस बात का विश्वास है कि इस मामले में किसी भी तरह के फैसले के गंभीर परिणाम होंगे। इसलिए इसमें की गई अपीलों को 5 या 7 जजों की बेंच को रेफर किया जाना चाहिए।"

      सुप्रीम कोर्ट:"नहीं-नहीं।"

      2) जुलाई 2019 में हो सुनवाई- सिब्बल

      कपिल सिब्बल: "कृपया होने वाले असर को ध्यान में रखकर इस मामले की सुनवाई कीजिए। कृपया इसकी सुनवाई जुलाई 2019 में की जाए, हम यकीन दिलाते हैं कि हम किसी भी तरह से इसे और आगे नहीं बढ़ने देंगे। केवल न्याय ही नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए।"

      सुप्रीम कोर्ट: "ये किस तरह की पेशकश है? आप कह रहे हैं जुलाई 2019। क्या इससे पहले मामले की सुनवाई नहीं हो सकती?"

      दुष्यंत दवे:एक पिटीशनर की ओर से सीनियर एडवोकेट ने कहा, "अपीलों पर सुनवाई में इतनी जल्दी क्यों? राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी के घोषणा पत्र का हिस्सा था।"

      सुप्रीम कोर्ट:"आप ये कह रहे हैं कि इसकी सुनवाई कभी नहीं हो सकती, क्योंकि पिछले सात साल में इसकी सुनवाई नहीं हुई थी।"

      3) अधूरे नहीं हैं दस्तावेज- यूपी सरकार

      कबिल सिब्बल:"इस केस से जुड़े रिकॉर्ड 19 हजार से ज्यादा पन्नों में हैं। उनका आना जरूरी है। कोर्ट के सामने वो सारे फैक्ट्स नहीं रखे गए हैं, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने रखे गए थे। सुनवाई के लिए उनका होना भी जरूरी है।"

      तुषार मेहता/सीएस वैद्यनाथन: यूपी सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल और राम लला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने कहा, "सभी अहम दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने लाए जा चुके हैं। दस्तावेजों के अधूरा होने की बात कहना ठीक नहीं है।"

      4) हमें पता है कि क्या करना है- सुप्रीम कोर्ट

      कपिल सिब्बल: "दस्तावेज पूरे नहीं हैं। कई दस्तावेजों का इंतजार किया जा रहा है। हमें और वक्त मिलना चाहिए। अगर दस्तावेज पूरे नहीं होंगे तो केस की तैयारी किस तरह से की जाएगी।"

      सुप्रीम कोर्ट: "पिछली बार भी आपने यही कहा था और इस बार भी आप यही बात कर रहे हैं। आप लोग (सभी पार्टियां) हमें बताएं कि हाईकोर्ट के सामने मामला क्या था? जब इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 90 दिन के भीतर खत्म हो गई थी, तो यहां इससे ज्यादा वक्त क्यों लगना चाहिए? दोनों ही पक्षों के पास कोर्ट के लिए मैसेज है। लेकिन हमें पता है कि क्या कहना है। हमें ऐसी बात ना बताएं कि बाहर क्या संदेश जाएगा।"

      और पढ़ें: अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, पक्षकारों ने कहा- जल्द फैसला देने की जरूरत

      सिब्बल-धवन ने दी बहिष्कार की धमकी
      - सुन्नी बोर्ड के वकील सिब्बल, राजीव धवन, दुष्यंत दवे ने सुनवाई छोड़ने की धमकी दी। सिब्बल बोले- जरूरत समझाए बिना कोर्ट सुनवाई पर अड़ा है। भाजपा के ट्रैप में न फंसें।
      - धवन ने सीजेआई से कहा- अक्टूबर से पहले केस नहीं निपटेगा। सीजेआई तब रिटायर होंगे।
      - एक पक्षकार ने बीच में बोलना चाहा। नाराज चीफ जस्टिस ने उसे बाहर निकाल दिया।

      सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

      - सुप्रीम कोर्ट ने सभी वकीलों से कहा, "आप लोग आपस में बैठकर बात करें। ये निश्चित करें कि सभी डॉक्युमेंट्स भरे जाएं और उनका नंबर दर्ज हो। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल डिस्प्यूट से जुड़ी सभी अपीलों पर अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी।"

      शिया बोर्ड का कौन सा प्रपोजल SC रिकॉर्ड में आया?

      - मुस्लिमों के एक गुट ने उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बैनर तले कोर्ट में एक मसौदा पेश किया था।

      - इस मसौदे के मुताबिक, विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद का नाम राजा या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।

      अभी कितने जजों की बेंच सुनवाई कर रही है?

      चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा:3 तलाक खत्म करने और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।

      जस्टिस अब्दुल नाजिर: तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट करार दिया था।

      जस्टिस अशोक भूषण: दिल्ली सरकार और एलजी के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।

      कितनी पिटीशन्स दायर की गई थीं?
      - मामले में 7 साल से पेंडिंग 20 पिटीशन्स इस साल 11 अगस्त को पहली बार लिस्ट हुई थीं। पहले ही दिन डॉक्युमेंट्स के ट्रांसलेशन पर मामला फंस गया था। संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत 7 भाषाओं में 9 हजार पन्नों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का वक्त दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्नों के दस्तावेज जमा कराए हैं।

      दोपहर 2 बजे शुरू हुई सुनवाई

      - मंगलवार दोपहर 2 बजे कोर्ट नं. 1 में 3 जजों की स्पेशल बेंच सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के करियर का यह सबसे बड़ा केस है। अगले साल 2 अक्टूबर को वह रिटायर होंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन थे। रामलला का पक्ष हरीश साल्वे ने रखा।

      7 साल में SC में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले

      - हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशन्स दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशन्स लिस्ट की।

      HC ने विवादित जमीन 3 हिस्सों बांटने का दिया था ऑर्डर

      - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।

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      इस केस में सात साल बाद सुनवाई हो रही है।
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      आयोध्या में राम मंदिर को बनाने के लिए पत्थरों को तराशकर तैयार किया जा चुका है। -फाइल
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      06 दिसंबर 1992 को आयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाया गया था। -फाइल
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