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SC जज विवाद को सुलझाने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया की पहल, 7 मेंबर्स की टीम जजों से मिलेगी

सुप्रीम कोर्ट जज विवाद पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार को मीटिंग की।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 14, 2018, 08:21 AM IST

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    देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने शुक्रवार को एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

    नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट जज विवाद पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार को मीटिंग की। इसमें तय किया गया कि बीसीआई की 7 सदस्यीय टीम कॉलेजियम के पांचों जज को छोड़कर बाकी दूसरे जज से मुलाकात करेगी। इसके लिए उनसे वक्त लिया जा रहा है। ये मुलाकातें कल हो सकती हैं। मीटिंग के बाद बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा- "हम चाहते हैं कि इस मामले का जल्द से जल्द हल निकल जाए।" उधर, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि SC के सभी जजों को मिलकर इस विवाद को खत्म करना चाहिए।

    - बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा- "हम चाहते हैं कि इस मसले का हल जल्द से जल्द अच्छे तरीके से निकल जाए। इस मामले में हम एक लेटर सरकार को लिखेंगे। हमारा मानना है कि यह पब्लिक में लाने जैसा बड़ा मुद्दा नहीं था। हमारा डेलिगेशन जल्द ही सभी जजों से मिलेगा। 12 ने मिलने पर सहमति जता दी है। रविवार को सुबह 9 बजे से बातचीत शुरू हो जाएगी।"

    - उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कोई भी पॉलिटिकल पार्टी या लीडर को इस परिस्थिति का फायदा नहीं उठाना चाहिए।

    - मनन मिश्रा ने कहा- "बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से मैं सभी पार्टियों से अपील करता हूं कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करें। हम बार की भावना से जजों को बताएंगे और उनसे अपील करेंगे कि मसले का शांतिपूर्ण और जल्द से जल्द निपटारा करें। अगर बार के सीनियर मेंबर्स की मदद की जरूरत है तो हम उसके लिए तैयार हैं।"

    सरकार के रुख का स्वागत
    - मनन कुमार मिश्रा ने कहा- "सरकार ने कहा था कि यह ज्युडिशियरी का अंदरूनी मामला है। सरकार के इस रुख का बार काउंसिल स्वागत करती है।"

    - " केसेस के रोस्टर या अलॉटमेंट को लेकर जजों में जो भी मतभेद हैं, उन्हें इन-हाउस ही निपटा लेना चाहिए। इन्हें पब्लिक नहीं करना चाहिए।

    - बता दें कि 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सरकार ने कहा था कि यह सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला है। हम इसमें दखल नहीं देंगे।

    सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा- मीडिया के सामने आना काफी गंभीर बात
    - सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की भी शनिवार को मीटिंग हुई। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने कहा- "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहली मीटिंग चीफ जस्टिस के साथ रखी जाएगी। अगर वो हमारे विचारों से सहमत होते हैं तो हम बाकी जजों से भी अपॉइंटमेंट लेंगे और मीटिंग फिक्स करेंगे।"
    - "हम इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा चाहते हैं। हमारा प्रपोजल है कि अब जनहित याचिकओं के मामले सुनवाई चीफ जस्टिस को दी जाए या 5 जजों की कोलेजियम को सौंपी जाए।"
    - "हमने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। चारों जजों का खुलेआम मीडिया के सामने आना काफी गंभीर बात है।"

    जल्द सुलझ जाएगा विवाद- AG
    - अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने शनिवार को कहा, जल्द ही मामला सुलझ जाएगा।
    - इसके पहले भी शुक्रवार को उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज आपस के मतभेद सुलझा लेंगे। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज बहुत अनुभवी और जानकारी वाले हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि कल तक पूरा मामला सुलझ जाएगा।"

    क्या है ये मामला?

    - सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने पहली बार अभूतपूर्व कदम उठाया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद दूसरे नंबर के सीनियर जज जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने शुक्रवार को मीडिया में 20 मिनट बात रखी। दो जज बोले, दो चुप ही रहे।
    - जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के तौर तरीकों पर सवाल उठाए। कहा- ‘लोकतंत्र दांव पर है। ठीक नहीं किया तो सब खत्म हो जाएगा।’ चीफ जस्टिस को दो महीने पहले लिखा 7 पेज का पत्र भी जारी किया। इसमें कहा गया है कि चीफ जस्टिस पसंद की बेंचों में केस भेजते हैं। चीफ जस्टिस पर महाभियोग के सवाल पर बोले कि यह देश तय करे। उन्होंने जज लोया की मौत के केस की सुनवाई पर भी सवाल उठाए।

    जजों ने चीफ जस्टिस पर 3 आरोप लगाए

    1.चीफ जस्टिस ने अहम मुकदमे पसंद की बेंचों को सौंप दिए। इसका कोई तर्क नहीं था। यह सब खत्म होना चाहिए। कोर्ट में केस अलॉटमेंट की मनमानी प्रॉसेस है।

    2. जस्टिस कर्णन पर दिए फैसले में हममें से दो जजों ने अप्वाइंटमेंट प्रॉसेस दोबारा देखने की जरूरत बताई थी। महाभियोग के अलावा अन्य रास्ते भी खोलने की मांग की थी।

    3. कोर्ट ने कहा था कि एमओपी में देरी न हो। केस संविधान पीठ में है, तो दूसरी बेंच कैसे सुन सकती है? कॉलेजियम ने एमओपी मार्च 2017 में भेजा पर सरकार का जवाब नहीं आया। मान लें कि वही एमओपी सरकार को मंजूर है?

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    बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा- हम चाहते हैं कि इस मसले का हल जल्द से जल्द अच्छे तरीके से निकल जाए।
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