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2 जी मामले में देश को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता, 6 महीने के भीतर जांच हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से जांच चल रही है। लोग ये जानना चाहते हैं कि जांच अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 08:09 AM IST
दिसंबर में सीबीआई के स्पेशल को दिसंबर में सीबीआई के स्पेशल को

नई दिल्ली. 2जी मामले में ढीली जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई और ईडी को निर्देश दिया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले और इससे जुड़े दूसरे मामलों की जांच 6 महीने के भीतर पूरी की जाए। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "आप ऐसे गंभीर मामलों पर देश के लोगों को अंधेरे में नहीं रख सकते। यह मामला देश के लिए गंभीर है। लंबे समय से जांच चल रही है। अब लोग यह जानना चाहते हैं कि जांच अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई। हम इस मामले पर चिंतित हैं और बेहद नाखुश हैं।"


6 महीने में जांच पूरी करने की हरसंभव कोशिश करें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम संबंधित एजेंसियों को 2जी स्पेक्ट्रम मामले से जुड़े सभी मामलों और पहलुओं की जांच छह महीने के अंदर करने के आदेश देते हैं। इस मामले में हरसंभव कोशिश की जानी चाहिए।"
- बेंच ने केंद्र के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र के 2जी मामले में वकील आनंद ग्रोवर को हटाकर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को स्पेशल प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने पर एतराज किया गया था।
- ग्रोवर को सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में स्पेशल प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया था। बेंच ने केंद्र को 2जी स्पेक्ट्रम मामले और एयरसेल-मैक्सिम सौदे सहित इससे जुड़े मामलों की जांच की प्रगति रिपोर्ट दो हफ्ते में देने को कहा है।

दिसंबर में 2जी घोटाले में क्या फैसला आया?
- पिछले साल दिसंबर में एक लाख 76 हजार करोड़ के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने पूर्व मंत्री ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी समेत 44 आरोपियों और कई कंपनियों को बरी कर दिया।
- दो मामले सीबीआई के थे तो एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने दायर किया था।
- जज ओपी सैनी ने 1552 पन्नों के फैसले में कहा, "पूरा केस सिर्फ अटकलों और अफवाहों पर आधारित है। पिछले 7 साल से मैं सबूतों का इंतजार कर रहा था, लेकिन सारी उम्मीदें बेकार साबित हुईं। इतने सालों में कानूनी रूप से मान्य एक भी सबूत सामने नहीं आया। लिहाजा सभी को बरी किया जाता है।'' फैसले के बाद सीबीआई ने कहा कि वो स्पेशल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी।

क्या है 2जी घोटाला?
- 2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर इसका अलॉटमेंट किया गया। बताया गया कि इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ।
- ये भी बताया गया था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। सीबीआई ने 21 अक्टूबर, 2009 को शुरुआती एफआईआर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के अज्ञात अफसरों के खिलाफ दायर की थी। दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था।
- अप्रैल, 2011 ने सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर कहा कि राजा और अन्य ने देश को 30 हजार 984 करोड़ का नुकसान कराया। 12 दिसंबर, 2011 को दायर चार्जशीट में कहा कि अफसरों ने 2008 में 2जी लाइसेंस देने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के साथ धोखाधड़ी की।
- 2 जी मामले में ट्रायल 6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था। कोर्ट ने 17 लोगों पर आरोप तय किए थे। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में पद के दुरुपयोग की बात कही। फरवरी, 2012 में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए।

सीबीआई जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
- कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका में सीबीआई जांच की मांग को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
- साथ ही याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा को याचिका की कॉपी देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई है।
- 21 फरवरी को पेपर लीक होने के बाद से स्टूडेंट्स सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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