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ट्रिपल तलाक पर बिल ड्राफ्ट करते वक्त मुस्लिम संगठनों से बातचीत नहीं की गई: रविशंकर प्रसाद

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिल जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और महिलाओं के सम्मान की हिफाजत में मदद करेगा।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 08:23 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा गैरकानूनी है। - फाइल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा गैरकानूनी है। - फाइल

नई दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि ट्रिपल तलाक पर कानून के लिए बिल ड्राफ्टिंग के वक्त मुस्लिम संगठनों से बातचीत नहीं की गई। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ये बिल जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और महिलाओं के सम्मान की हिफाजत करने में मदद करेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है।

ट्रिपल तलाक पर बिल, Q&A में समझें मामला?

लोकसभा में सरकार ने क्या कहा?

- कानून राज्यमंत्री पीपी चौधरी से सवाल पूछा गया था कि सरकार ने कानून के लिए बिल ड्राफ्टिंग के वक्त मुस्लिम संगठनों से बात की गई थी? इस पर चौधरी ने ना में जवाब दिया।

- सरकार ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को असंवैधानिक और गैरकानूनी कहा है, इसके बाद ट्रिपल तलाक के कई मामले सामने आए हैं। इसके लइए कानून लाने की जरूरत है।"

कानून मंत्री ने बिल पर क्या कहा?

- रविशंकर प्रसाद ने एक लिखित जवाब में कहा, "ये मसला (ट्रिपल तलाक) जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और महिलाओं के सम्मान जैसे मानवीय पहलुओं को देखते हुए उठा था, ये मजहब या आस्था से जुड़ा मामला नहीं है।'

- "सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी कहा है। इसके बावजूद ऐसे 66 मामले सामने आए हैं, जिनमें पति ने ट्रिपल तलाक के जरिए तलाक दिया है।'

ट्रिपल तलाक पर बिल को मंजूरी कब मिली?

- 15 दिसंबर को कैबिनेट ने मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल को मंजूरी दी थी। इस बिल को ट्रिपल तलाक बिल के नाम से भी जाना जाता है।

कानून बनने पर सजा किस तरह दी जा सकती है?
- बिल में तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को गैरकानूनी बनाने का प्रावधान है। इसके अलावा ऐसा करने वाले को जेल, जुर्माने का भी कानून है। ये कानून केवल तलाक-ए-बिद्दत पर लागू होगा। इस तलाक के खिलाफ मजिस्ट्रेट के पास जाने वाली महिला अपने और नाबालिग बच्चों के लिए भत्ते की मांग भी कर सकती है। इसके अलावा महिला अपने नाबालिग बच्चों के कस्टडी भी मांग सकती है। इस सभी मसलों पर फैसला मजिस्ट्रेट लेंगे।

फिलहाल क्या एक्शन लिया जाता है?
- अभी महिला स्पेशल मैरिज एक्ट-1954 के तहत हक मांग सकती है। आईपीसी की धारा-125 के तहत मेंटेनेंस, सिविल सूइट व मुस्लिम मैरिज एक्ट के ऑप्शन भी हैं। घरेलू हिंसा कानून के तहत भी कार्रवाई मुमकिन है।
- अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा समय में विक्टिम पुलिस के पास जाती है। लेकिन, कानून में किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई ना होने की वजह से पुलिस भी पति के खिलाफ एक्शन नहीं ले पाती।

SC ने कानून बनाने के लिए कितना वक्त दिया था?

- अगस्त में 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

SC ने किस तलाक को खारिज किया?
- तलाक-ए-बिद्दत यानी एक ही बार में तीन बार तलाक कह देना। यह हनफी पंथ को मानने वाले सुन्नी मुस्लिमों के पर्सनल लॉ का हिस्सा है। इसे सुप्रीम कोर्ट ने अनकॉन्स्टिट्यूशनल ठहराया है। इससे वॉट्सएप, ईमेल, एसएमएस, फोन, चिट्ठी जैसे अजीब तरीकों से तलाक देने पर रोक लगेगी।

Video- ट्रिपल तलाक बिल पर सरकार का जवाब... Video- ट्रिपल तलाक बिल पर सरकार का जवाब...