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त्रिपुरा में हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए BJP ने योगी को उतारा, बंगाल पर हो सकता है यहां के नतीजों का असर

धरमनगर का गोरखनाथ मंदिर त्रिपुरा में हिंदुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। योगी यहां पूजा के बाद रैली कर चुके हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 13, 2018, 07:02 PM IST

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    त्रिपुरा में एक रोड शो के दौरान योगी आदित्यनाथ।- फाइल

    कामापुर (त्रिपुरा).त्रिपुरा में 18 फरवरी को होने वाले असेंबली चुनाव के लिए बीजेपी ने नई स्ट्रैटजी अपनाई है। पार्टी ने यहां के हिंदू वोट हासिल करने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को मैदान में उतारा है। योगी सोमवार को यहां पहुंचे और मंगलवार को भी रहेंगे। राज्य में 20 साल से लेफ्ट की सरकार है और मानिक सरकार सीएम हैं। कुछ वोटर्स का मानना है कि अगर यहां बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है तो पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी इसका असर पड़ सकता है।

    योगी मैदान में क्यों?

    - त्रिपुरा में पहली बार बीजेपी पूरे दमखम से मैदान में उतरी है। उसकी स्ट्रैटजी यहां के हिंदू वोटरों को लुभाने की है। यही वजह है कि पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मैदान में उतारा है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बीजेपी ने यह फैसला इसलिए किया क्योंकि योगी की इमेज कट्टरपंथी हिंदूवादी नेता की है।
    - 46 साल के योगी नरेंद्र मोदी से 22 साल छोटे हैं। उनका असली नाम अजय सिंह बिस्ट है। यूपी में लॉ एंड ऑर्डर सुधारने और बोर्ड एग्जाम में नकल रोकने के लिए उनकी सरकार ने सख्त फैसले लिए हैं। योगी यहां अब तक 8 रैलियां कर चुके हैं।

    वोटर्स के सामने तीन चेहरे

    - मानिक सरकार:20 साल से सीएम हैं। उनकी कोशिश है कि वो अपने काम गिनाएं। हालांकि, इस बार बीजेपी ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।
    - राहुल गांधी:कांग्रेस के पास इकलौता स्टार फेस हैं। पार्टी के बहुत सारे समर्थक और नेता अब बीजेपी के साथ हो गए। राहुल के लिए रास्ता कठिन है।
    - योगी आदित्यनाथ: वैसे तो यूपी के सीएम हैं। लेकिन, बीजेपी ने इस चुनाव में ज्यादा तवज्जो दी है। इस चुनाव में बीजेपी कांग्रेस और लेफ्ट को कड़ी चुनौती दे रही है। योगी ने गुजरात और फिर हिमाचल प्रदेश के असेंबली इलेक्शन जीतने में बीजेपी की काफी मदद की।

    किन वोटों पर नजर?

    - योगी के जरिए दो तरह के वोटों पर नजर जमाए है। एक वो बांग्लादेश से आने वाले हिंदू है। ये 1947 और फिर 1971 में बांग्लादेश जाने को मजबूर हुए थे।
    - दूसरे वो वोटर हैं जो ये मानते हैं कि लेफ्ट सरकार एक समुदाय विशेष को ज्यादा तवज्जो देती है।

    क्या कहते हैं वोटर्स?

    - त्रिपुरा में वोटर्स का मूड समझने के लिए न्यूज एजेंसी ने कुछ लोगों से चर्चा की। एक रिटायर्ड टीचर कृष्णकांत घोष ने कहा- बीजेपी भगवा चेहरे को पेश कर रही है। विचारधारा इस बार ज्यादा अहम नहीं है। वैसे भी कांग्रेस के ज्यादातर समर्थक अब बीजेपी के साथ आ गए हैं।
    - शांतनु सेन बीजेपी के सपोर्टर हैं। वो काफी आगे की बात करते हैं। कहते हैं- बीजेपी एक विजन के तहत काम कर रही है। वो मोदी के बाद एक नया नेता सामने ला रही है। गुजरात में योगी को कुछ कामयाबी मिली। अब उन्हें त्रिपुरा में भी उतारा गया है।

    कांग्रेस और लेफ्ट क्यों पीछे?

    - सेन आगे कहते हैं- कांग्रेस के पास राहुल गांधी के अलावा कोई और नहीं है। वहीं आप CPI(M) को भी देखें। वो आज भी 1990 के दौर की सियासत में ही भरोसा कर रही है। मानिक सरकार का करिश्मा अब फीका पड़ चुका है।

    धरमनगर में योगी

    - योगी ने यहां धरमनगर में रैली के साथ गोरखनाथ मंदिर में पूजा भी की। बता दें कि योगी गोरखपुर के मशहूर गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं। धरमनगर का गोरखनाथ मंदिर त्रिपुरा में हिंदुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। ऐसे में योगी का यहां आना सियासी तौर पर भी खासा अहम माना जा सकता है।
    - बीजेपी यहां के आदिवासी समुदाय पर भी फोकस कर रही है। यही वजह है कि इनके इलाकों में पार्टी की रैलियां की जा रही हैं।

    जीते तो बंगाल तक असर

    - कमलापुर के एक बड़े कारोबारी बुलबुल दास कहते हैं- CPI-M में अब आप उदासी देख सकते हैं। सीपीआई अब बंगाली वोटर्स से कह रही है कि बीजेपी तो आदिवासियों के संगठन से समझौता कर चुकी है। अगर वो जीती तो राज्य के दो हिस्से हो जाएंगे।
    - दास आगे कहते हैं- बीजेपी को आदिवासियों का बड़ा सपोर्ट हासिल है। और इसीलिए नतीजे आने पर वो चौंका सकती है। योगी की छवि कट्टर हिंदूवादी है। उनकी सभाओं में जय श्री राम के नारे लगते हैं। हिंदू बंगाली वोटर्स बीजेपी की तरफ जा रहे हैं। सीपीआई-एम पर ये आरोप लगता है कि वो मुस्लिमों को ज्यादा तवज्जो देती है। अगर बीजेपी यहां के बंगाली मिडल क्लास को लुभाने में कामयाब हो गई तो आप तय मानिए कि इसका फायदा उसे पश्चिम बंगाल में भी मिलेगा।
    - बीजेपी सपोर्टर देवाशीष नाथ कहते हैं- योगी 1998 में सिर्फ 26 साल की उम्र में सांसद बन गए थे। उन्होंने जो काम किया है, उसकी तारीफ होती है।

    2013 में किस पार्टी ने कितनी सीटें जीती थीं?

    त्रिपुरा: कुल सीट- 60, बहुमत: 31


    सीपीएम:49
    कांग्रेस:10
    अन्य: 01

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    त्रिपुरा मेें हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को कैंपेन में सबसे ज्यादा अहमियत दी है। - फाइल
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Web Title: Yogi Adityanath Making Impact Among Hindu Voters In Tripura For BJP.
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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