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त्रिपुरा में सीएम की रेस में बीजेपी के बिप्लब, नगालैंड में नेफ्यू रियो का नाम सबसे आगे क्यों?

बिप्लब के संघ से करीबी रिश्ते रहे हैं। वे बीजेपी के थिंक टैंक रहे गोविंदाचार्य के साथ काम कर चुके हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 03, 2018, 09:43 PM IST

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    त्रिपुरा के उदयपुर में जन्मे बिप्लब की उम्र 48 साल है। वे पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े। -फाइल

    अगरतला.त्रिपुरा में अनुमान सही साबित हुए। विधानसभा की कुल 60 में से 59 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों को 43 सीटें मिलीं। यहां बीजेपी को मिली कामयाबी के पीछे पार्टी के तीन दिग्गज हेमंत बिस्व सरमा, बिप्लब कुमार देब और सुनील देवधर का किरदार अहम है। इनमें से मुख्यमंत्री पद की रेस में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े बिप्लब सबसे आगे है। उधर, नगालैंड में भी बीजेपी समर्थित एनडीपीपी के सत्ता में आने के आसार हैं। ऐसा हुआ तो राज्य के तीन बार सीएम रहे नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

    त्रिपुरा: बीजेपी की सरकार बनेगी

    नाम: बिप्लब कुमार देब, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

    उम्र: 48 साल
    जन्म: उदयपुर, त्रिपुरा
    सीट: बनमालीपुर, पश्चिम त्रिपुरा
    पत्नी: एसबीआई में डिप्टी मैनेजर

    बिप्लव की दावेदारी क्यों?
    - त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से 1999 में ग्रेजुएट किया। समाजसेवा के काम करते रहे हैं।
    - साफ-सुथरी छवि। कोई भी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है।
    - हलफनामे में अपनी कुल प्रॉपर्टी 5.85 करोड़ बताई।

    संघ से करीबी रिश्ते

    - संघ से जुड़े रहे हैं। संगठन में रहकर काम किया है। बीजेपी के थिंक टैंक रहे केएन गोविंदाचार्य के साथ काम कर चुके हैं।

    अपनी बात जनता तक पहुंचाने में कामयाब रहे

    - बिप्लब ने त्रिपुरा में जमीनी स्तर पर काम किया। चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि राज्य में लेफ्ट की सरकार 25 सालों से जनता का बेवकूफ बना रही है। यहां भरपूर नेचुरल रिसोर्स होने के बावजूद यह देश का सबसे गरीब राज्य है।
    - उन्होंने वादा किया था कि बीजेपी अगर सत्ता में आई तो इसे मॉडल स्टेट बनाया जाएगा। बिप्लब अपनी यह बात जनता तक पहुंचाने में कामयाब रहे।
    - उनकी अगुआई में कई लेफ्ट समर्थक बीजेपी में आए। फरवरी के पहले हफ्ते में उन्होंने 1600 से ज्यादा लेफ्ट सपोर्टर्स के बीजेपी में आने का दावा किया था।

    सुनील वी देवधर, बीजेपी प्रभारी, त्रिपुरा

    उम्र: 52 साल
    जन्म: महाराष्ट्र

    सुनील देवधर: सीएम की रेस में दूसरे नंबर पर

    - देवधर मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। नॉर्थ ईस्ट में करीब तीन साल संघ के प्रचारक रहे। वे 1985 में संघ से जुड़े। 2014 में अमित शाह ने उन्हें त्रिपुरा का प्रभारी बनाया।
    - यहां उन्होंने शाखाएं लगाईं। नॉर्थ ईस्ट के लोगों के मन में देश के बाकी हिस्सों से जुड़ाव पैदा करने के लिए "माई होम इंडिया" नाम से एक एनजीओ बनाया है। इससे देवधर की नॉर्थ ईस्ट में पकड़ मजबूत हुई। बीजेपी को फायदा हुआ।

    - वे 2014 में लोकसभा चुनाव में बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट के इंचार्ज भी रहे।

    नगालैंड: बीजेपी समर्थित एनडीपीपी को मिल सकती है सत्ता

    नेफ्यू रियो, एनडीपीपी (बीजेपी की सहयोगी)

    उम्र: 67 साल
    सीट: नॉर्दर्न अंगामी-2, निर्विरोध चुने गए

    रियो की दावेदारी क्यों?

    - 15 साल से नेशनल पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की सरकार है। पहले इसे बीजेपी का समर्थन था। इसमें रहते हुए नेफ्यू रियो तीन बार राज्य के सीएम रहे।
    - एनपीएफ से टूटकर नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) बनी। अब बीजेपी इसके साथ है। रियो इसी खेमे में हैं।

    - बीजेपी और एनडीपीपी ने मिलकर 27 सीटों पर जीत दर्ज की। एक निर्दलीय और तीन सीटें अन्य को मिली हैं। अगर बीजेपी ने चारों विधायकों को अपने पाले में कर लिया तो उसकी सरकार बन जाएगी। एनडीपीपी ने रियो को सीएम कैंडिडेट घोषित किया है।

    रियो का मुकाबला करने कोई नहीं आया

    - वे नॉर्दर्न अंगामी-2 सीट से कैंडिडेट थे। वे निर्विरोध चुने गए। इसके बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।

    दीमापुर से थे त्रिपुरा के इकलौते सांसद

    - 2014 में जिन दो मुख्यमंत्रियों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था उनमें एक नरेंद्र मोदी और दूसरे रियो थे।
    - वे राज्य से नगा समस्या खत्म करने का वादा करके केंद्र में गए थे। दीमापुर से सांसद थे। त्रिपुरा से वे इकलौते सांसद थे।

    आगे की स्लाइड में पढ़ें, मेघालय में कौन बन सकता है सीएम...

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    मुकुल संगमा 10 साल से मेघालय के सीएम हैं। -फाइल

    मेघालय
    कांग्रेस की सरकार बनी तो...

    नाम: मुकुल संगमा, 10 साल से मुख्यमंत्री

    उम्र: 52 साल

    सीट: अंपाति और सोंग्सक (दोनों सीटों पर जीते)

    मुकुल की दावेदारी क्यों?
    - 1993 में राजनीति में आए। अंपाति गिरि सीट से निर्दलीय जीते। कांग्रेस के टिकट पर 1998, 2003, 2008 और 2013 में विधायक चुने गए।
    - 2003 में राज्य के गृह और शिक्षा मंत्री बने। 2005 में वे राज्य के उपमुख्यमंत्री बने।
    - दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार 20 अप्रैल 2010 में उस वक्त के मुख्यमंत्री डीडी लपांग के इस्तीफे के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद 2013 में पार्टी की जीत के बाद उन्हें दोबारा राज्य की कमान सौंपी गई।

    एनपीपी की सरकार बनी तो...
    नाम: अगाथा संगमा, एनपीपी
    उम्र: 37

    सीट: दक्षिण तुरा (जीतीं)

    अगाथा की दावेदारी क्यों?

    - बीजेपी के बिलीकिड ए. संगमा को 1603 वोटों से हराया। अगाथा ने पुणे की यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। दिल्ली हाईकोर्ट में रहीं। नॉटिंघम यूनिवर्सिटी से एनवॉयर्नमेंट मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की।

    - 2008 में तुरा सीट से पहली बार सांसद बनीं। यह सीट उनके पिता पीए संगमा के राज्य की राजनीति में जाने की वजह से खाली हो गई थी। अगाथा 15वीं लोकसभा में दोबारा सांसद चुनी गईं। उन्हें 29 साल की उम्र में यूपीए सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनाया गया। वे उस वक्त देश की सबसे युवा सांसद और मंत्री थीं।

    अगाथा के भाई कोनार्ड भी बन सकते हैं मुख्यमंत्री
    - अगाथा के भाई कोनार्ड संगमा एनपीपी के चीफ और सांसद हैं। उन्होंने पिता के निधन के बाद खाली हुई तुरा लोकसभा सीट से 2016 में चुनाव जीता था।
    - कोनार्ड ने मौजूदा सीएम मुकुल संगमा की पत्नी डिक्कांची डी शिरा को करीब 1.93 लाख वोटों से हराया था।
    - कोनार्ड ने गारो हिल्स में कुल 24 सीटों में से 22 पर कांग्रेस विधायक होने के बावजूद यह जीत हासिल की थी।

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    बिप्लब की पत्नी एसबीआई में डिप्टी मैनेजर हैं।
  • त्रिपुरा में सीएम की रेस में बीजेपी के बिप्लब, नगालैंड में नेफ्यू रियो का नाम सबसे आगे क्यों?, national news in hindi, national news
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    त्रिपुरा में सीएम पद की रेस में सुनील देवधर का नाम दूसरे नंबर पर है। -फाइल
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    नेफ्यू रियो तीन बार नगालैंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। वे बीजेपी के समर्थन वाले एनडीपीपी के सीनियर लीडर हैं। -फाइल
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Web Title: Tripura Meghalaya Nagaland Cm Faces Assembly Election 2018
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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