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त्रिपुरा में मुख्यमंत्री पद की रेस में बीजेपी के बिप्लब कुमार देव का नाम सबसे आगे क्यों?

त्रिपुरा में मुख्यमंत्री पद की रेस में बीजेपी के बिप्लब कुमार देव का नाम सबसे आगे क्यों?

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 02:14 PM IST
त्रिपुरा के उदयपुर में जन्मे ब त्रिपुरा के उदयपुर में जन्मे ब

अगरतला. त्रिपुरा में अनुमान सही साबित हुए। विधानसभा की कुल 60 में से 59 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों को 43 सीटें मिलीं। यहां बीजेपी को मिली कामयाबी के पीछे पार्टी के तीन दिग्गज हेमंत बिस्व सरमा, बिप्लब कुमार देब और सुनील देवधर का किरदार अहम है। इनमें से मुख्यमंत्री पद की रेस में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े बिप्लब सबसे आगे है। उधर, नगालैंड में भी बीजेपी समर्थित एनडीपीपी के सत्ता में आने के आसार हैं। ऐसा हुआ तो राज्य के तीन बार सीएम रहे नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

त्रिपुरा: बीजेपी की सरकार बनेगी

नाम: बिप्लब कुमार देब, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

उम्र: 48 साल
जन्म: उदयपुर, त्रिपुरा
सीट: बनमालीपुर, पश्चिम त्रिपुरा
पत्नी: एसबीआई में डिप्टी मैनेजर

बिप्लव की दावेदारी क्यों?
- त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से 1999 में ग्रेजुएट किया। समाजसेवा के काम करते रहे हैं।
- साफ-सुथरी छवि। कोई भी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है।
- हलफनामे में अपनी कुल प्रॉपर्टी 5.85 करोड़ बताई।

संघ से करीबी रिश्ते

- संघ से जुड़े रहे हैं। संगठन में रहकर काम किया है। बीजेपी के थिंक टैंक रहे केएन गोविंदाचार्य के साथ काम कर चुके हैं।

अपनी बात जनता तक पहुंचाने में कामयाब रहे

- बिप्लब ने त्रिपुरा में जमीनी स्तर पर काम किया। चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि राज्य में लेफ्ट की सरकार 25 सालों से जनता का बेवकूफ बना रही है। यहां भरपूर नेचुरल रिसोर्स होने के बावजूद यह देश का सबसे गरीब राज्य है।
- उन्होंने वादा किया था कि बीजेपी अगर सत्ता में आई तो इसे मॉडल स्टेट बनाया जाएगा। बिप्लब अपनी यह बात जनता तक पहुंचाने में कामयाब रहे।
- उनकी अगुआई में कई लेफ्ट समर्थक बीजेपी में आए। फरवरी के पहले हफ्ते में उन्होंने 1600 से ज्यादा लेफ्ट सपोर्टर्स के बीजेपी में आने का दावा किया था।

सुनील वी देवधर, बीजेपी प्रभारी, त्रिपुरा

उम्र: 52 साल
जन्म: महाराष्ट्र

सुनील देवधर: सीएम की रेस में दूसरे नंबर पर

- देवधर मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। नॉर्थ ईस्ट में करीब तीन साल संघ के प्रचारक रहे। वे 1985 में संघ से जुड़े। 2014 में अमित शाह ने उन्हें त्रिपुरा का प्रभारी बनाया।
- यहां उन्होंने शाखाएं लगाईं। नॉर्थ ईस्ट के लोगों के मन में देश के बाकी हिस्सों से जुड़ाव पैदा करने के लिए "माई होम इंडिया" नाम से एक एनजीओ बनाया है। इससे देवधर की नॉर्थ ईस्ट में पकड़ मजबूत हुई। बीजेपी को फायदा हुआ।

- वे 2014 में लोकसभा चुनाव में बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट के इंचार्ज भी रहे।

नगालैंड: बीजेपी समर्थित एनडीपीपी को मिल सकती है सत्ता

नेफ्यू रियो, एनडीपीपी (बीजेपी की सहयोगी)

उम्र: 67 साल
सीट: नॉर्दर्न अंगामी-2, निर्विरोध चुने गए

रियो की दावेदारी क्यों?

- 15 साल से नेशनल पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की सरकार है। पहले इसे बीजेपी का समर्थन था। इसमें रहते हुए नेफ्यू रियो तीन बार राज्य के सीएम रहे।
- एनपीएफ से टूटकर नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) बनी। अब बीजेपी इसके साथ है। रियो इसी खेमे में हैं।

- बीजेपी और एनडीपीपी ने मिलकर 27 सीटों पर जीत दर्ज की। एक निर्दलीय और तीन सीटें अन्य को मिली हैं। अगर बीजेपी ने चारों विधायकों को अपने पाले में कर लिया तो उसकी सरकार बन जाएगी। एनडीपीपी ने रियो को सीएम कैंडिडेट घोषित किया है।

रियो का मुकाबला करने कोई नहीं आया

- वे नॉर्दर्न अंगामी-2 सीट से कैंडिडेट थे। वे निर्विरोध चुने गए। इसके बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।

दीमापुर से थे त्रिपुरा के इकलौते सांसद

- 2014 में जिन दो मुख्यमंत्रियों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था उनमें एक नरेंद्र मोदी और दूसरे रियो थे।
- वे राज्य से नगा समस्या खत्म करने का वादा करके केंद्र में गए थे। दीमापुर से सांसद थे। त्रिपुरा से वे इकलौते सांसद थे।

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