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आजादी के बाद PAK ने कश्मीर पर हमला किया तो नेहरू ने RSS से मांगी थी मदद: उमा

मोहन भागवत ने कहा था कि RSS से कहा जाए तो तीन दिन में सैनिक तैयार कर देंगे।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 08:03 AM IST
उमा भारती ने कहा कि वे राजनीति उमा भारती ने कहा कि वे राजनीति

भोपाल. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मंगलवार को यहां दावा किया कि आजादी के बाद पाकिस्तान ने भारत पर अटैक किया तो तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आरएसएस से मदद मांगी थी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयंसेवक मदद के लिए वहां पहुंचे भी थे। उमा का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आर्मी पर दिए बयान पर हुए विवाद के बीच आया है।

समझौते पर दस्तखत के लिए हरि सिंह पर अब्दुल्ला बना रहे थे दबाव
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उमा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में भागवत के बयान पर सीधे तौर पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर के विलय के लिए होने वाली संधि पर दस्तखत नहीं कर रहे थे और शेख अब्दुल्ला इसके लिए उन पर दबाव बना रहे थे।

RSS प्रमुख गोलवलकर को नेहरू ने लिखा था लेटर

- उन्होंने कहा, "नेहरू दुविधा में थे। तभी पाकिस्तान ने अचानक हमला कर दिया और उसके सैनिक उधमपुर तक पहुंच गए।"

- उमा ने आगे कहा कि हमला अचानक किया गया था और सेना के पास इतने आधुनिक संसाधन नहीं थे कि वे वहां तक पहुंच सके। "ऐसे वक्त में नेहरू जी ने गुरु गोलवलकर (तत्कालीन आरएसएस चीफ एमएस गोलवलकर) को स्वयंसेवकों की मदद के लिए लेटर लिखा था। स्वयंसेवक जम्मू-कश्मीर में मदद के लिए गए भी थे।"

क्या कहा था मोहन भागवत ने?

- मोहन भागवत ने 11 फरवरी को मुजफ्फरपुर में कहा था, "अगर ऐसी स्थिति पैदा हो और संविधान इजाजत दे तो स्वयंसेवक मोर्चे पर जाने को तैयार हैं। जिस आर्मी को तैयार करने में 6-7 महीने लगते हैं, संघ उन सैनिकों को 3 दिन में तैयार कर देगा।"

- "संघ न तो मिलिट्री और न ही पैरामिलिट्री संगठन है, ये एक पारिवारिक संगठन है। यहां सेना जैसा ही अनुशासन है। आरएसएस वर्कर्स हमेशा देश के लिए जान न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं।"

- "1962 में भारत-चीन जंग के दौरान जब सिक्किम के तेजपुर से सिविलियंस और पुलिस अफसर भाग गए थे, तब वहां सेना के पहुंचने तक स्वयंसेवक डटे रहे। स्वयंसेवकों ने फैसला किया था कि चीनी आर्मी को बिना कोई विरोध किए भारतीय सीमा में घुसने नहीं देंगे। स्वयंसेवक हर उस काम को पूरा करते हैं, जो उन्हें दिया जाता है।"

'राजनीति से संन्यास नहीं ले रही'

- राजनीति से संन्यास की खबरों काे उमा ने गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि घुटने और कमर में तकलीफ की वजह से डॉक्टर ने सलाह दी है कि न सीढ़ियां चढ़ें, न गाड़ियों से सफर करें और न ही बेवक्त काम करें।

- उन्होंने कहा है कि, डॉक्टर की इसी सलाह के बाद तय किया है कि आज से अगले तीन साल तक राजनीति से दूर रहूंगी। न कोई चुनाव लड़ूंगी और पार्टी जिस जगह प्रचार के लिए जाना जरूरी समझेगी, जाऊंगी।

- उमा ने कहा कि वे राज्यसभा में भी नहीं जाएंगी। जहां तक मंत्री पद का दायित्व है, उसे संभालती रहूंगी। बता दें कि उन्होंने सोमवार को झांसी में कहा था कि वे अब आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी।

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