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पाकिस्तान को आतंकी पनाहगाहों को खत्म करने के लिए राजी कर सकता है चीन: अमेरिका

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 07, 2018, 05:05 PM IST

अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान को आतंकी पनाहगाहों को खत्म करने के लिए चीन मददगार साबित हो सकता है।
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    US को उम्मीद है कि आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लेने के लिए पाकिस्तान को राजी करने में चीन अहम रोल निभाएगा। - सिम्बॉलिक इमेज

    वॉशिंगटन. अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान को आतंकी पनाहगाहों को खत्म करने के लिए चीन मददगार साबित हो सकता है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि आतंकी पनाहगाहों पर एक्शन के लिए चीन पाकिस्तान को मना सकता है। अधिकारी ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर कहा, "आतंकी पनाहगाहों के सिलसिले में अमेरिका की परेशानी को चीन भी समझता है। US भी चाहता है कि चीन और दूसरे रीजनल प्लेयर्स PAK को आतंकी पनाहगाहों को तबाह करने के लिए राजी करें।' बता दें कि आतंकवाद को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान की मदद रोक दी है। जिसके बाद दोनों देशों में तल्ख बयानबाजी हो रही है।

    PAK में आतंकी पनाहगाहों के खात्मे पर US ने और क्या कहा?

    1) CPEC से पाक-चीन के रिश्ते गहरे हुए
    - व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा, "पिछले कई साल से पाकिस्तान और चीन के ऐतिहासिक रिश्ते हैं। चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के चलते ये रिश्ते इकोनॉमिक रिश्ते और ज्यादा गहरे हुए हैं। लेकिन, पाकिस्तान में आतंकवाद की समस्या को लेकर यूएस की परेशानी को चीन भी समझता है। ऐसे में चीन अहम रीजनल प्लेयर हो सकता है जो इस मसले को सुलझाए। पाकिस्तान में आतंकियों की पनाहगाह होने से चीन का मकसद भी पूरा नहीं होगा। पाक और अफगानिस्तान के बीच में रिश्ते बेहतर करने में चीन का अहम रोल होगा।"

    2) अपने हित में चीन जरूर मदद करेगा
    - "चीन इस मामले में ज्यादा एक्टिव रोल निभा रहा है। इसलिए मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि चीन PAK में आतंकियों के सेफ हैवन्स को खत्म करने के लिए मददगार भूमिका नहीं निभाएगा। दरअसल, ये चीन के हित में ही है कि वो पाकिस्तान को इसके लिए राजी करे। निश्चित तौर पर चीन अफगानिस्तान को स्थिर करने की दिशा में भी काम कर रहा है।"

    3) PAK के चीन और US से मजबूत रिश्ते
    - "चीन और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही बेहद मजबूत हैं और अमेरिका के इस कदम से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हमें लगता है कि पाकिस्तान के हित में है कि वो चीन और अमेरिका दोनों से ही मजबूत रिश्ते रखे। चीन भी साउथ एशिया और पाकिस्तान में स्थिरता चाहता है। PAK में स्थिरता CPEC के मद्देनजर भी चीन के हित में ही है। इसलिए वो चाहेंगे कि पाकिस्तान हक्कानी और तालिबान नेटवर्क को तबाह करे।"

    PAK-US के रिश्ते क्यों बिगड़े?

    - एक जनवरी यानी नए साल के पहले दिन डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट किया। कहा- पाकिस्तान अमेरिका से 15 साल में 33 बिलियन डॉलर (इंडियन करंस के हिसाब से करीब 2.14 लाख करोड़ रुपए) ले चुका है। उसने आतंकवाद के खात्मे के लिए कुछ नहीं किया। उसने हमारे नेताओं को वेबकूफ बनाया।

    - इसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तान की पहले 1626 करोड़ रुपए और बाद में करीब 7 हजार करोड़ रुपए की मदद रोक दी। इसके बाद से अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद खराब दौर में पहुंच गए।

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    अमेरिका ने पाकिस्तान की पहले 1626 करोड़ रुपए और बाद में करीब 7 हजार करोड़ रुपए की मदद रोक दी है। (फाइल)
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Web Title: China Could Convince Pakistan For Dismantling Terror Safe Havens
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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