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मधुशाला के विरोध पर गांधीजी ने पिताजी से कहा था- इसमें तो कुछ भी आपत्तिजनक नहीं: अमिताभ

अमिताभ बच्चन ने रविवार को ब्लॉग लिखकर याद किए पिता हरिवंश राय बच्चन के पुराने दिन।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 05, 2018, 07:27 AM IST

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    अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला 1933 में लिखी थी। - फाइल फोटो।

    मुंबई.अमिताभ बच्चन ने रविवार को लिखे ब्लॉग में ब्रिटिश राज के उन दिनों को याद किया, जब उनके पिता कवि हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला के लिए आलोचना हो रही थी। कुछ लोग आरोप लगा रहे थे कि हरिवंश शराब को ग्लैमराइज कर देश के यूथ को बर्बाद कर रहे हैं। अमिताभ ने लिखा है कि उस वक्त महात्मा गांधी मेरे पिता के बचाव में उतरे थे। गांधीजी ने कहा था कि कविता में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।


    गांधीजी से क्या शिकायत की गई?
    - अमिताभ बच्चन ने लिखा है, "मुधशाला, 85 साल पहले 1933 में लिखी गई। कविता कालजयी है और आज भी शानदार विचारों से लोगों को लाभ पहुंचा रही है। 1935 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जब कविता पहली बार पढ़ी गई तो लोगों ने खूब सराहा और कविता को कई बार दोहराने के लिए कहा।"

    - उन्होंने लिखा- "कविता की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कुछ लोगों ने इसका दुष्प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कविता को खुद का स्वार्थ सिद्ध करने के लिए लिखी एक नीरस रचना करार दिया। इसकी शिकायत महात्मा गांधी से भी की गई थी।"

    - अमिताभ ने लिखा है कि लोगों ने गांधीजी से कहा, "एक युवा शराब के फायदे बढ़ा-चढ़ाकर बताकर देश के यूथ को पॉल्यूट (दूषित) कर रहा है। वह युवाओं को भ्रष्ट बना रहा है, उसे रोका जाए या गिरफ्तार किया जाए। इस दौरान एक युवक ने यह धमकी तक दी कि अगर हरिवंश राय बच्चन उसके शहर में गए तो वह उन्हें गोली मार देगा।"

    गांधीजी ने क्या कहा?
    - अमिताभ ने लिखा है कि कविता के खिलाफ तेजी से उठ रही असंतोष की अवाज को देखते हुए गांधीजी ने पिताजी को बुलावा भेजा। जब पिताजी गांधीजी के सामने लाए गए तो गांधी जी ने कहा, "जो कुछ भी तुम लिख रहे हो उसे मैं सुनना चाहता हूं।" इस पर पिताजी ने मधुशाला की कई पंक्तियां गांधीजी को सुनाईं। इसके बाद गांधीजी ने कहा, "लेकिन इसमें तो कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।"
    - अमिताभ ने लिखा है कि गांधीजी के शब्द सुनकर पिताजी को राहत मिली। इसके बाद पिताजी फुर्ती से वहां से बाहर आ गए, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं गांधीजी का मन बदल न जाए।

    मधुशाला ने दिलाई बच्चन को दिलाई पॉपुलैरिटी
    - 1935 में छपी मधुशाला ने हरिवंश राय बच्चन को खूब पॉपुलैरिटी दिलाई। आज भी मधुशाला पाठकों के बीच काफी पॉपुलर है। इसके अलावा चार खण्डों में प्रकाशित बच्चन की आत्मकथा- क्या भूलूं क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक हिन्दी साहित्य बेमिसाल रचनाएं मानी जाती हैं।

    - वहीं, मधुबाला, मधुकलश, मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, निशा निमन्त्रण, दो चट्टानें भी बच्चन की लोकप्रिय रचनाएं हैं।
    - बता दें कि हरिवंश राय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबद में 27 नवम्बर 1907 को हुआ था। 18 जनवरी 2003 को उनका निधन हो गया।

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    हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला आज भी काफी पॉपुलर है। -फाइल
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Web Title: When Mahatma Gandhi Found Nothing Objectionable With Madhushala Amitabh Bachchan Recounted Old Time
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