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जब फिजिक्स और मैथ्स में हॉकिंग ने भारतीयों को बताया था बेहतरीन, मुंबई में मनाया था 59वां जन्मदिन

2001 में भारत आए हॉकिंग ने दौरे को बताया था शानदार, राष्ट्रपति केआर नारायणन के सामने की थी भारतीयों की तारीफ।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 06:56 PM IST
स्टीफन हॉकिंग अपने 16 दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली के जामा मस्जिद घूमने गए थे।        -फाइल स्टीफन हॉकिंग अपने 16 दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली के जामा मस्जिद घूमने गए थे। -फाइल

नई दिल्ली. ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग जनवरी 2001 में भारत दौरे पर आए थे। अपने 16 दिनों के दौरे पर उन्होंने मुंबई और नई दिल्ली में कई लेक्चर्स दिए थे। मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में इंटरनेशनल फिजिक्स सेमिनार के दौरान अपनी रिसर्च के लिए उन्हें पहले सरोजिनी दामोदरन फेलोशिप अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। उन्होंने मुंबई के ओबराय टावर होटल में ही अपना 59वां जन्मदिन मनाया था। दिल्ली जाने के बाद उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन से भी मुलाकात की थी। इस मीटिंग में हॉकिंग ने भारतीयों की तारीफ करते हुए कहा था कि ‘फिजिक्स और मैथ्स में भारतीय काफी अच्छे हैं।’

स्पेशल व्हीकल में घूमे मुंबई-दिल्ली

- हाॅकिंग ने कॉन्फ्रेंस के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा के एक स्पेशल व्हीकल में मुंबई भी घूमा था। ये व्हीकल खासकर हॉकिंग की व्हीलचेयर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया थी।
- मुंबई के बाद हॉकिंग नई दिल्ली गए थे जहां उनकी राष्ट्रपति भवन में केआर नारायणन से भी मुलाकात हुई थी। 45 मिनट तक चली मुलाकात को नारायणन ने ‘एक कभी ना भूलने वाला अनुभव बताया था।’
- नारायणन ने हॉकिंग की क्षमताओं से प्रभावित होकर उन्हें अपंगता से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्त्रोत बताया था।
- अपने दिल्ली दौरे में हॉकिंग जंतर मंतर और कुतुब मीनार भी गए थे। 15 जनवरी 2001 को उन्होंने दिल्ली में अल्बर्ट आइंन्सटीन मेमोरियल लेक्चर भी दिया था।

भारतीयों ने सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि

- स्टीफन हॉकिंग का बुधवार को 76 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके बच्चों ने बयान में कहा, "वो एक महान वैज्ञानिक थे। उनका काम और विरासत बरसों तक हमारे बीच रहेगी।’
- पीएम मोदी ने ट्विटर में लिखा, “प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग एक शानदार वैज्ञानिक और शिक्षक थे। उनके धैर्य और दृढ़ता ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। उनका निधन दुखद है। प्रोफेसर हॉकिंग की खोजों ने विश्व को एक बेहतर स्थान बनाया। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।”
- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पोस्ट में लिखा, “विकलांग होने के बावजूद प्रोफेसर स्‍टीफन हॉकिंग फिजिक्स की फील्ड का चेहरा थे। वे तर्क, विवेक और वैज्ञानिक मिजाज का नेतृत्व करने वालों में से थे। उन्होंने समाज पर कभी ना मिटने वाली छाप छोड़ी है दुनियाभर में फैले उनके चहेतों के साथ ही मैं भी उनके निधन से दुखी हूं।”
- वहीं एक और यूजर आकाश सिंह ने ट्वीट में लिखा, “जिस दिन गैलिलियो की मौत हुई थी उस दिन हॉकिंग का जन्म हुआ था। उनकी मौत उस दिन हुई जिस दिन आइंस्टीन का जन्म हुआ था, 14 मार्च।”

55 साल से मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित थे

- हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड (ब्रिटेन) में हुआ था।
- 1963 में हॉकिंग को मोटर न्यूरॉन बीमारी का पता चला। उस वक्त उनकी उम्र महज 21 साल थी। तब उनके महज 2 साल जिंदा रहने की बात कही गई थी।
- इसके बाद वे कैम्ब्रिज में पढ़ने चले गए। अल्बर्ट आइंस्टीन के बाद हॉकिंग सबसे काबिल भौतिकविज्ञानी माने जाते थे।
- हॉकिंग पर 2014 में फिल्म द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग भी बनी। इसमें एडी रेडमेन और फेलिसिटी जोन्स ने प्रमुख भूमिका निभाई।

दुनिया को ब्लैक होल का रहस्य समझाया

- 1974 में हॉकिंग ब्लैक होल्स की थ्योरी लेकर आए। इसे ही बाद में हॉकिंग रेडिएशन के नाम से जाना गया। हॉकिंग ने ही ब्लैक होल्स की लीक एनर्जी के बारे में बताया।
- प्रोफेसर हॉकिंग पहली बार थ्योरी ऑफ कॉस्मोलॉजी लेकर आए। इसे यूनियन ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम मैकेनिक्स भी कहा जाता है।
- 1988 में उनकी ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम बुक पब्लिश हुई। इसकी एक करोड़ से ज्यादा कॉपियां बिकीं।

केआर नारायणन ने इस मुलाकात को कभी ना भूलने वाला अनुभव बताया था।     -फाइल केआर नारायणन ने इस मुलाकात को कभी ना भूलने वाला अनुभव बताया था। -फाइल
नई दिल्ली में हॉकिंग ने अल्बर्ट आइंन्सटीन मेमोरियल लेक्चर भी दिया था। नई दिल्ली में हॉकिंग ने अल्बर्ट आइंन्सटीन मेमोरियल लेक्चर भी दिया था।