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दावोस: 50 मिनट हिंदी में बोले मोदी, कहा- वेल्थ के साथ वेलनेस चाहिए तो भारत आएं; स्टैंडिंग ओवेशन मिला

हिंदी में करीब 50 मिनट दी गई इस स्पीच में मोदी ने क्लाइमेट चेंज, टेररिज्म जैसी चुनौतियों का जिक्र किया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 23, 2018, 09:18 PM IST

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    मोदी ने कहा कि डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डायनिज्म ने मिलकर डेवलपमेंट और डेस्टिनी को आकार दिया है। अब हमारी सरकार के निर्भीक फैसलों ने हालात में बदलाव किया है।

    दावोस. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2018 (WEF) में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनॉगरल स्पीच दी। हिंदी में करीब 50 मिनट दी गई इस स्पीच में मोदी ने तीन चुनौतियों क्लाइमेट चेंज, टेररिज्म और देशों के सेल्फ सेंटर्ड होने का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात को देखते हुए 4 जरूरतों पर भी जोर दिया। उन्होंने फोरम में मौजूद वर्ल्ड लीडर्स से कहा कि अगल वे वेल्थ के साथ वेलनेस चाहते हैं तो भारत आएं। मंगलवार देर शाम मोदी भारत के लिए रवाना हुए। वे फोरम में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल ले गए थे। इसमें 6 कैबिनेट मंत्री, 2 सीएम, 100 सीईओ समेत 130 लोग शामिल थे। भारत की ओर से 21 साल बाद कोई प्रधानमंत्री इस फोरम में शामिल हो रहा है। इससे पहले 1997 में प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा दावोस समिट में आए थे।

    मोदी ने 50 मिनट हिंदी में दी स्पीच, 5 प्वाइंट

    1) दुनिया के सामने 3 चुनौतियां

    # क्लाइमेट चेंज

    - मोदी ने कहा, "तीन चुनौतियां मानव सभ्यता के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। पहली क्लाइमेट चेंज है। एक्स्ट्रीम वेदर का प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। होना ये चाहिए था कि हमें एकजुट होना था। लेकिन, हम ईमानदारी से पूछें कि क्या ऐसा हुआ? और अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ। हजारों साल पहले हमारे शास्त्रों में मानव की पहचान बताई गई कि हम सभी मानव धरती माता की संतान हैं। यदि हम उसकी संतान हैं तो आज मानव और प्रकृति के बीच ये जंग क्यों चल रही है।''

    #गुड और बैड टेररिज्म

    - मोदी ने कहा, "दूसरी बड़ी चुनौती आतंकवाद है। इस संबंध में विश्व भर में पूरी मानवता के लिए बने खतरे से सभी सरकारें अवगत हैं। आतंकवाद जितना खतरनाक है, उससे भी खतरनाक है गुड टेररिस्ट और बैड टेररिस्ट के बीच बनाया गया आर्टिफिशियल भेद। दूसरी बात समकालीन गंभीर पहलू है पढ़े लिखे और संपन्न युवाओं का आतंकवाद में लिप्त होना। मुझे आशा है कि इस फोरम में आतंकवाद और हिंसा की दरारों से हमारे सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर और उनके समाधान पर हर वक्ता कुछ न कुछ कहेगा।"

    # सेल्फ सेंटर्ड होते देश

    - मोदी ने कहा, "तीसरी चुनौती ये है कि बहुत से समाज और देश आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। ग्लोबलाइजेशन अपने नाम के विपरीत सिकुड़ता चला जा रहा है। इस तरह की सोच को हम कम खतरे के तौर पर नहीं आंक सकते हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि मैं नहीं चाहता कि मेरे घर की दीवारें और खिड़कियां सभी तरह से बंद हों। मैं चाहता हूं कि सभी देशों की संस्कृतियों की हवा मेरे घर में पूरी आजादी से आ-जा सकें। लेकिन, इस हवा से मेरे पैर उखड़ जाएं, ये मुझे मंजूर नहीं होगा। आज का भारत गांधी के इसी दर्शन और चिंतन को अपनाते हुए, पूरे आत्मविश्वास और निर्भीकता के साथ पूरे विश्व से जीवनदायिनी तरंगों का स्वागत कर रहा है।''

    2) आज के दौर की 4 जरूरतें

    # मतभेदों को दरकिनार करें

    - नरेंद्र मोदी ने 4 जरूरतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "सबसे जरूरी ये है कि विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग बढ़े, प्रतिस्पर्धा दीवार बनकर ना खड़ी हो जाए, साझा चुनौतियाों का मुकाबला करने के लिए हमें अपने मतभेदों को दरकिनार कर लार्जर विजन के तहत साथ काम करना होगा।''

    # अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ईमानदारी से पालन

    - मोदी ने कहा, "दूसरी आवश्यकता नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का पालन करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। हमारे चारों ओर होने वाले बदलाव अनिश्चिततताओं को जन्म दे सकते हैं। तब अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों का सही स्पिरिट में पालन जरूरी है।''

    # विश्व की बड़ी संस्थाओं में बदलाव जरूरी

    - मोदी ने कहा, "तीसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि विश्व के प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक संस्थानों में सुधार की जरूरत है। सहभागिता और लोकतंत्रिकरण को आज के माहौल के अनुरूप बढ़ावा देना चाहिए।''

    # इकोनॉमिक ग्रोथ में तेजी लानी होगी

    - प्रधानमंत्री ने कहा, "चौथी महत्वपूर्ण बात ये है कि हमें विश्व की आर्थिक प्रगति में और तेजी लानी होगी। इस बारे में हाल के संकेत उत्साहजनक हैं। टेक्नोलॉजी और डिजिटल रिवोल्यूशन नए समाधानों की संभावना बढ़ाते हैं, जिससे गरीबी और बेरोजगारी का नए सिरे से मुकाबला कर सकते हैं।''

    3) 1997 से अबतक भारत की GDP छह गुना बढ़ी

    - मोदी बोले, "गर्मजोशी भरे स्वागत-सत्कार के लिए स्विटजरलैंड की सरकार और नागरिकों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूं। दावोस में भारत के प्रधानमंत्री की आखिरी यात्रा 1997 में हुई थी, जब देवेगौड़ा जी यहां आए थे। तब भारत की जीडीपी 400 बिलियन डॉलर्स से थोड़ी ज्यादा थी। दो दशकों के बाद जीडीपी छह गुना ज्यादा हो चुकी है। उस वक्त इस फोरम का विषय बिल्डिंग द नेटवर्क सोसाइटी था।"

    4) 1997 में हैरी पॉटर-लादेन का नाम कम लोगों ने सुना था

    - "1997 में यूरो प्रचलित नहीं था, एशियन फाइनेंशियल क्राइसिस का पता नहीं था और न ही ब्रेग्जिट के आसार थे। तब बहुत कम लोगों ने ओसामा बिन लादेन के बारे में सुना था और हैरी पॉटर का नाम भी अंजाना था। तब शतरंज के खिलाड़ियों को कम्प्यूटर से हारने का गंभीर खतरा भी नहीं था। तब साइबर स्पेस में गूगल का अवतरण नहीं हुआ था। 1997 में आप इंटरनेट पर अमेजन शब्द ढूंढते तो आपको नदियां और घने जंगलों के बारे में सूचना मिलती। उस जमाने में ट्वीट करना चिड़ियों का काम था, मनुष्य का नहीं था। वो पिछली शताब्दी थी। आज दो दशकों के बाद हमारा विश्व और हमारा समाज जटिल नेटवर्क का हिस्सा है।"

    5) टेक्नोलॉजी के जोड़-तोड़-मोड़ का उदाहरण सोशल मीडिया

    - प्रधानमंत्री ने कहा, "विश्व के सामने शांति, स्थिरता, सुरक्षा जैसे विषयों को लेकर नई और गंभीर चुनौतियों का हम अनुभव कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफर्मेशन हमारे रहने और काम करने के व्यवहार और बातचीत और अंतरराष्ट्रीय समूहों को टेक्नोलॉजी की दुनिया ने प्रभावित कर दिया है। टेक्नोलॉजी को जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने का उदाहरण सोशल मीडिया में मिलता है। डाटा बहुत बड़ी संपदा है। डेटा से सबसे बड़े अवसर मिल रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौतियां भी। डाटा के पहाड़ बन रहे हैं और उन पर नियंत्रण की होड़ लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि जो डाटा पर नियंत्रण रखेगा, वही भविष्य पर नियंत्रण करेगा।''

    आगे की स्लाइड में पढ़ें- मोदी की पूरी स्पीच...

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    मंगलवार को मोदी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रों. क्लॉज श्वाब (बाएं) और स्विट्जरलैंड के प्रेसिडेंट एलेन बर्सेट से मुलाकात की।

    मोदी के स्पीच की अहम बातें...

    WEF का मकसद दुनिया के हालात सुधारना

    - मोदी ने कहा, "मैं प्रो. श्वाब को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को सशक्त और व्यापक मंच बनाने पर साधुवाद देता हूं। उनके विजन में महत्वाकांक्षी एजेंडा है, जिसका मकसद दुनिया के हालात सुधारना है। उन्होंने इस एजेंडा को राजनीतिक और आर्थिक विजन से जोड़ा है।''
    - "हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत-सत्कार के लिए स्विटजरलैंड की सरकार और नागरिकों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूं।''
    - "दावोस में भारत के प्रधानमंत्री की आखिरी यात्रा 1997 में हुई थी जब देवेगौड़ा जी यहां आए थे। तब भारत की जीडीपी 400 बिलियन डॉलर्स से थोड़ी ज्यादा थी। दो दशकों के बाद जीडीपी छह गुना ज्यादा हो चुकी है। उस वक्त इस फोरम का विषय बिल्डिंग द नेटवर्क सोसाइटी था।''

    दुनिया काफी बदल चुकी है

    - मोदी ने कहा, "आज 21 साल बाद टेक्नोलॉजी और डिजिटल एज की उपलब्धियां देखें तो 1997 वाला विषय सदियों पुराने युग की चर्चा लगती है। आज नेटवर्क सोसाइटी ही नहीं, बल्कि बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में जी रहे हैं।''
    - "1997 में यूरो प्रचलित नहीं था, एशियन फाइनेंशियल क्राइसिस का पता नहीं था और न ही ब्रेग्जिट के आसार थे।''
    - "तब बहुत कम लोगों ने ओसामा बिन लादेन के बारे में सुना था और हैरी पॉटर का नाम भी अंजाना था। तब शतरंज के खिलाड़ियों को कम्प्यूटर से हारने का गंभीर खतरा भी नहीं था। तब साइबर स्पेस में गूगल का अवतरण नहीं हुआ था। 1997 में आप इंटरनेट पर अमेजन शब्द ढूंढते तो आपको नदियां और घने जंगलों के बारे में सूचना मिलती।''
    - "उस जमाने में ट्वीट करना चिड़ियों का काम था, मनुष्य का नहीं था। वो पिछली शताब्दी थी। आज दो दशकों के बाद हमारा विश्व और हमारा समाज जटिल नेटवर्क का हिस्सा है। आज भी दावोस अपने समय से आगे हैं। ''

    शक्ति का संतुलन बदल रहा है

    - मोदी ने कहा, "आज दरारों से भरे विश्व में साझा भविष्य का निर्माण विषय है। आर्थिक क्षमता और राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इससे विश्व के स्वरूप में दूरगामी परिवर्तनों की छवि दिखाई दे रही है।''
    - "विश्व के सामने शांति, स्थिरता,सुरक्षा जैसे विषयों को लेकर नई और गंभीर चुनौतियां हम अनुभव कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफर्मेशन हमारे रहने और काम करने के व्यवहार और बातचीत और अंतरराष्ट्रीय समूहों को टेक्नोलॉजी की दुनिया ने प्रभावित कर दिया है।''
    - "टेक्नोलॉजी को जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने का उदाहरण सोशल मीडिया में मिलता है। डाटा बहुत बड़ी संपदा है। डेटा से सबसे बड़े अवसर मिल रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौतियां भी। डाटा के पहाड़ बन रहे हैं और उन पर नियंत्रण की होड़ लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि जो डाटा पर नियंत्रण रखेगा, वही भविष्य पर नियंत्रण करेगा।''

    अब मानवता के लिए खतरा भी है

    - मोदी ने कहा, "विज्ञान तकनीक और आर्थिक प्रगति के नए आयामों में मानव को नए रास्ते दिखाने की क्षमता है। इन परिवर्तनों से ऐसी दरारें भी पैदा हुई हैं, जो दर्दभरी चोटें भी पहुंचा सकती हैं। ये ऐसी दरारें पैदा कर रहे हैं, जिन्होंने पूरी मानवता के लिए शांति और समृद्धि के रास्ते को दुर्गम और दुसाध्य बना दिया है।''
    - "ये डिवाइस, ये बैरियर्स विकास के अभाव, गरीबी, बेरोजगारी, अवसरों के अभाव और प्राकृतिक और तकनीकी संसाधनों पर आधिपत्य की हैं। इस परिवेश में हमारे सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं, जो मानवता के भविष्य और भावी पीढ़ियों की विरासत के लिए समुचित जवाब मांगते हैं।''
    - "क्या हमारी विश्व व्यवस्था इन दरारों को और दूरियों को बढ़ावा तो नहीं दे रही हैं। ये कौन सी शक्तियां हैं, जो सामंजस्य के ऊपर अलगाव को तरजीह देती है, जो सहयोग के ऊपर संघर्ष को हावी करती हैं।''
    - "हमारे पास कौन से साधन हैं, रास्ते हैं, जिनके जरिए हम इन दरारों और दूरियों को मिटाकर एक सुहाने और साझा भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं। भारत, भारतीयता और भारतीय विरासत का प्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए इस फोरम का विषय जितना समकालीन है, उतना ही समयातीत भी है।''
    - "समयातीत इसलिए, क्योंकि भारत में अनादि काल से हम मानव मात्र को जोड़ने में विश्वास करते आए हैं, उसे तोड़ने और बांटने में नहीं।''

    पूरी दुनिया एक परिवार है

    - मोदी ने कहा, "हजारों साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने जो लिखा है, वो है वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। हम सब एक परिवार की तरह बंधे हुए हैं। हमारी नियतियों में एक साझा सूत्र हमें जोड़ता है।''
    - "ये धारणा निश्चित तौर पर आज दरारों और दूरियों को मिटाने के लिए और ज्यादा सार्थक और रेलेवेंट है। लेकिन, आज एक गंभीर बात ये है कि इस काल की विकट चुनौतियों से निपटने के लिए हमारे बीच सहमति का अभाव है।'' - "परिवार में भी जहां सौहार्द होता है, तो कुछ ना कुछ मनमुटाव और मतभेद भी होते रहते हैं। लेकिन, परिवार का प्राण और प्रेरणा यही भावना होती है कि जब साझा चुनौतियां सामने आएं तो सब लोग एकजुट होकर उनका सामना करते हैं और एकजुट होकर उलब्धियों और आनंद के हिस्सेदार बनते हैं।''
    - चिंता का विषय है कि हमारे विभाजन और दरारों ने इन चुुनौतियों के खिलाफ मानव जाति के संघर्ष को कठिन बना दिया है। जिन चुनौतियों की तरफ मैं इशारा कर रहा हूं, उनकी संख्या भी बहुत है और विस्तार भी बहुत व्यापक है।''

    क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद चुनौती

    - मोदी ने कहा, "तीन चुनौतियां मानव सभ्यता के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।
    पहला क्लाइमेट चेंज का है। ग्लेशियर्स पीछे हटते जा रहे हैं। आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है। कई द्वीप डूब चुके हैं या डूबते जा रहे हैं। एक्स्ट्रीम वेदर का प्रभाव दिन ब दिन बढ़ रहा है। कल भी आदरणीय राष्ट्रपति जी कह रहे थे कि इस समय जो बर्फ पड़ रही है, वो पिछले 20 साल से नहीं देखी गई। होना ये चाहिए था कि हमें एकजुट होना था। लेकिन, हम ईमानदारी से पूछें कि क्या ऐसा हुआ? और अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ।''
    - "हर कोई कहता है कि कार्बन एमिशन को कम करना चाहिए। लेकिन, ऐसे कितने देश या लोग हैं, जो विकासशील देशों को उपयुक्त टेक्नोलॉजी मुहैया कराने के लिए आगे आते हैं।''
    - "आपने कई बार सुना होगा भारतीय परंपरा में प्रकृति के साथ गहरे तालमेल के बारे में। हमारी संस्कृति और संस्कार बार-बार इस बात को दोहराते हैं। हजारों साल पहले हमारे शास्त्रों में मानव की पहचान बताई गई- हम सभी मानव धरती माता की संतान हैं। यदि हम उसकी संतान हैं तो आज मानव और प्रकृति के बीच ये जंग क्यों चल रही है।''
    - "हजारों साल पहले भारत में लिखे गए ईशोपनिषद की शुरुआत में ही ऋषियों ने अपने शिष्यों से परिवर्तनशील जगत के लिए सूत्र दिया था। वो ये था- संसार में रहते हुए उसका त्यागपूर्वक भोग करो (तेन त्यकतेन भुंजीथा) और दूसरे की संपत्ति का लालच मत करो। आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल को अपने सिद्धांतों में प्रमुख स्थान दिया। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सिद्धांत आवश्यकता के अनुसार उपभोग-उपयोग करने का था। अपने सुखों के लिए हम प्रकृति के शोषण तक पहुंच गए हैं।''
    - "भारत में 2020 तक भारत में 175 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। पिछले तीन साल में 60 गीगावाट हमने हासिल कर लिया है। 2016 में भारत और फ्रांस ने मिलकर नए अंतरराष्ट्रीय ट्रीटीबेस्ड ऑर्गनाइजेशन की कल्पना की।''
    - "इंटरनेशनल सोलर अलायंस के रूप में ये पहल अब एक वास्तविकता है। इस साल मार्च में फ्रांस के राष्ट्रपति और मेरे निमंत्रण पर सभी सदस्य नई दिल्ली में होने वाली पहली समिट में भाग लेंगे।''

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    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस के स्कीइंग रिजॉर्ट में हो रहा है। यहां जमकर बर्फबारी हो रही है।

    30 साल में पहली बार भारत में एक पार्टी की सरकार आई

    - मोदी ने कहा, "भारत के 600 करोड़ मतदाताओं ने 2014 में 30 साल बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत दिया है। हमने किसी एक वर्ग या कुछ लोगों के सीमित विकास का नहीं, बाल्कि सबके विकास का संकल्प लिया है।''
    - "मेरी सरकार का लक्ष्य है सबका साथ-सबका विकास। प्रगति के लिए हमारा विजन, मिशन और दर्शन समावेशी है। ये मेरी सरकार की हर नीति और योजना का आधार है।''
    - "करोड़ों लोगों के लिए पहली बार बैंक खाते खुलवाना हो, या गरीबों तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की बात हो, या फिर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का अभियान हो। हम मानते हैं कि प्रगति और विकास तभी सच्चे अर्थों में है, जब साथ चलें, सबको लेकर चलें और सबके लिए चलें।''
    - "सामाजिक और आर्थिक नीतियों में आमूलचूल बदलाव किए हैं। हमने रिफार्म, परफार्म और ट्रांसफार्म का रास्ता चुना है।''
    - "भारत की इकोनॉमी को जिस तरह से निवेश के लिए सुगम बना रहे हैं, उसका कोई सानी नहीं है। इसी का नतीजा है कि आज भारत में निवेश करना, भारत की यात्रा करना, भारत में काम करना, मैन्युफैक्चरिंग करना, प्रोडक्ट और सर्विसेस को दुनिया भर में एक्सपोर्ट करना।''
    - "सबकुछ पहले की तुलना में आसान हो गया है। लाइसेंस राज खत्म कर दिया है। रेडटेप हटा दिया है।''

    डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी से डेवलपमेंट हुआ

    - मोदी ने कहा, "भारत में पहली बार एकीकृत कर व्यवस्था GST के रूप मेें लागू की गई है। पारदर्शिता के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारे संकल्प और प्रयासों का विश्वभर की बिजनेस कम्युनिटी ने स्वागत किया है।''
    - "डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डायनिज्म ने मिलकर डेवलपमेंट और डेस्टिनी को आकार दिया है। अब हमारी सरकार के निर्भीक फैसलों ने हालात में बदलाव किया है।''
    - "साढ़े तीन साल से कम समय में दूरगामी और बड़े परिवर्तन भारत में हुए, वे सवा सौ करोड़ भारतीयों की अपेक्षाओं, उनके पुरुषार्थ और परिवर्तन को स्वीकार करने की क्षमता का सबूत है।''
    - "भारत के लोग-युवा 2025 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में योगदान देने में समर्थ और सक्रिय हैं। वे जॉब सीकर नहीं, जॉब गिवर बनेंगे।''
    - "आप सभी विश्व के प्रमुख लीडर्स विश्व में हो रहे परिवर्तनों से रैंकिंग और रेटिंग में सुधार से परिचित हैं। इन आंकड़ों से ज्यादा अहम है कि भारत के लोगों ने बदलावों, फैसलों का स्वागत किया है।''
    - "स्वेच्छा से सब्सिडी का त्याग हो, चुनाव दर चुनाव हमारी नीतियों में विश्वास व्यक्त करने जैसे अनेक प्रमाण हमें मिल रहे समर्थन की पुष्टि करते हैं। विश्व में तमाम फैक्टर और दरारों को देखते हुए ये जरूरी है कि हमारे साझा भविष्य के लिए हम कई दिशाओं पर ध्यान दें।''

    वैश्विक ताकतों में सहयोग जरूरी

    - "सबसे जरूरी ये है कि विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग बढ़े, प्रतिस्पर्धा दीवार बनकर ना खड़ी हो जाए, साझा चुनौतियाों का मुकाबला करने के लिए हमें अपने मतभेदों को दरकिनार कर लार्जर विजन के तहत साथ काम करना होगा।''
    - "दूसरी आवश्यकता नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का पालन करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। हमारे चारों ओर होने वाले बदलाव अनिश्चिततताओं को जन्म दे सकते हैं। तब अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों का सही स्पिरिट में पालन जरूरी है।''
    - "तीसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि विश्व के प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक संस्थानों में सुधार की जरूरत है। सहभागिता और लोकतंत्रिकरण को आज के माहौल के अनुरूप बढ़ावा देना चाहिए।''
    - "चौथी महत्वपूर्ण बात ये है कि हमें विश्व की आर्थिक प्रगति में और तेजी लानी होगी। इस बारे में हाल के संकेत उत्साहजनक हैं। टेक्नोलॉजी और डिजिटल रिवोल्यूशन नए समाधानों की संभावना बढ़ाते हैं, जिससे गरीबी और बेरोजगारी का नए सिरे से मुकाबला कर सकते हैं।''
    - "इस तरह के प्रयासों में भारत ने हमेशा मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। पुरातन काल से भारत चुनौतियों का मुकाबला करने में सबके साथ सहयोग का हाथ बढ़ा रहा है। पिछली शताब्दी में जब विश्व दो विश्व युद्धों में उलझा था, तब अपना कोई निजी स्वार्थ ना होते हुए भी भारत शांति और मानवता के आदर्शों की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ। डेढ़ लाख से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने अपनी जान न्यौछावर कर दी।''
    - "ये वही आदर्श है, जिनके लिए यूएन की स्थापना के बाद भारत ने यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशंस में सबसे ज्यादा सैनिक दिए, संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय मानवता, पड़ोसियों की मदद के लिए प्रोत्साहित करती है।'' - "नेपाल का भूकंप हो, या पड़ोसी देशों में बाढ़ हो, तूफान हो... सब में भारत ने फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में सहायता पहुंचना कर्तव्य समझा। यमन में हिंसा ने भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों को नागरिकों को चपेट में लिया। हमने केवल भारतीयों ही नहीं, दूसरे देशों के भी करीब 2000 नागरिकों को यमन से सुरक्षित बाहर निकाला।''

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    स्विस प्रेसिडेंट एलेन बर्सेट ने WEF में मोदी का औपचारिक स्वागत किया।

    इस बार समिट में रिकॉर्ड महिलाएं

    - इस बार समिट में पहली बार 21% रिप्रेजेंटेटिव महिलाएं हैं। यह रिकॉर्ड है। पहली बार सभी को-चेयर महिलाएं हैं। इनमें भारत की आंत्रप्रेन्योर चेतना सिन्हा भी शामिल हैं।
    - दावोस में यह 48वीं मीटिंग है। इसमें 70 देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत 3000 लोग शामिल हो रहे हैं। मीटिंग की थीम- 'बंटी हुई दुनिया के लिए साझा भविष्य का निर्माण' है।

    - सोमवार को मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बर्सेट के साथ बातचीत की। बता दें कि 1997 में एचडी देवेगौड़ा और 1994 में नरसिंह राव शामिल हुए थे।

    समिट में 2000 कंपनियों के सीईओ हिस्सा ले रहे हैं

    - दावोस-2018 में डब्ल्यूटीओ, विश्व बैंक, आईएमएफ समेत 38 संगठनों के हेड शामिल हो रहे हैं। 2,000 कंपनियों के सीईओ भी मौजूद हैं।
    - मीटिंग में 400 सेशन होंगे। इसमें 70 देशों के प्रमुखों समेत 350 नेता हिस्सा लेंगे।
    - दावोस में पहली बार योग सत्र का आयोजन हो रहा है। इसमें योग गुरु बाबा रामदेव के दो शिष्य योग सिखाएंगे।
    - एक सेशन को आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी संबोधित करेंगे।
    - पाक पीएम शाहिद खाकान अब्बासी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा लेंगे।

    क्या है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम?

    - वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की स्थापना 1971 में जेनेवा यूनिवर्सिटी के प्रो. क्लॉज एम श्वाब ने की थी।
    - यह नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के लिए व्यापार, राजनीति, शिक्षा, समाज से जुड़े लोगों की भागीदारी से दुनिया में सुधार के लिए कमिटेड है।

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    मोदी सोमवार को ग्लोबल सीईओ के साथ रूबरू हुए और कहा कि भारत का मतलब ही बिजनेस है।
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