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नीम-हकीम मतलब खतरा-ए-जान! अब इनपर चलेगा पुलिस का डंडा

नीम-हकीम दर्द में जल्दी फायदा पहुंचाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों में एंटीबायोटिक जैसी दवाएं मिलाते हैं-सीडीएससीओ

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2018, 07:49 AM IST
Fake Ayurvedic treatment racket busted

नई दिल्ली. नीम-हकीम खतरा-ए-जान। अभी तक तो ये सिर्फ कहावत थी लेकिन सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने बिना डिग्री वाले ऐसे डाक्टर्स को लेकर एक खुलासा किया है। उनका कहना है कि सड़क किनारे या गली-कूचों में आयुर्वेदिक दवाखाने चलाने वाले नीम-हकीम जड़ी-बूटियों से तैयार अपने नुस्खों या दवाओं को असरदार बनाने के लिए इनमें धड़ल्ले से एलोपैथिक दवाएं मिला रहे हैं। इस वजह से लोगों की हेल्थ पर खराब असर पड़ने के अलावा एंटीबायोटिक ड्रग्स रेजिस्टेंस और दूसरे रोगों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

आयुर्वेदिक दवा में पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) का कहना है कि नीम-हकीम आमतौर पर दर्द और फीवर में जल्दी फायदा पहुंचाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों में एंटीबायोटिक, निमोस्लाइड और पैरासिटामॉल जैसी एलोपैथिक दवा मिलाते हैं। ज्यादातर हकीम एलोपैथिक दवा फेनियोबुटाजोन का इस्तेमाल भी करते हैं। जबकि भारत में फेनियाबुटाजोन दवा को किसी भी दवा के साथ मिला कर बेचने की परमीशन नहीं हैं। इस दवा के ज्यादा यूज सेवन से किडनी के अलावा शरीर के दूसरे अंगों के इफेक्ट होने का खतरा रहता है।

- दिल्ली मेडिकल काउंसिल से जुड़े डॉ. अनिल बंसल का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण नीम-हकीम फल-फूल रहे हैं। मरीजों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। आयुर्वेदिक दवाओं में धड़ल्ले से एस्टेरॉइड और एंटीबायोटिक मिलाए जा रहे हैं। ऐसे लोगों पर मुश्किल से ही एक्शन हो पाता है।

सीडीएससीओ लेगा एक्शन
इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ), राज्यों के ड्रग्स कंट्रोलर और पुलिस के साथ मिल कर ऐसे नीम-हकीम की दुकानों और ठिकानों पर छापेमारी करेगा। वहां से बरामद नमूनों की जांच होगी। अगर किसी के आयुर्वेदिक नुस्खे में एलोपैथिक दवाएं मिलीं तो उसे सीधे जेल भेजा जाएगा।

कई जगहों पर की गई छापेमारी
पिछले कुछ समय से इस तरह की काफी शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद पिछले महीने गाजियाबाद और मेरठ में ऐसे ही नीम-हकीम के ठिकानों पर छापेमारी की गई। छापेमारी के बाद जब्त की गई दवाओं को लैब में जांच के लिए भेजा गया। पता लगा कि उसमें फेनियोबुटाजोन दवा मिलाई गई है। यह भी देखने को मिला कि जिस जगह पर दवा तैयार की जा रही थी वहां काफी गंदगी फैली हुई थी। इससे दवा के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। जांच के बाद दोनों हकीमों को जेल भेज दिया गया।

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