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18 साल पहले शंकराचार्य जयेंद्र को झेलने पड़े थे ऐसे आरोप

कांचीपुरम के वरदराजापेरुमल मंदिर के प्रबंधक ए शंकररमण की तीन सितंबर 2004 को मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 28, 2018, 03:12 PM IST

    • जयेंद्र सरस्वती कांची कामकोटि पीठ के 69वें मठप्रमुख और शंकराचार्य थे।

      नेशनल डेस्क.कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन हो गया। वो 19 साल की उम्र में शंकराचार्य बन गए थे और करीब 65 साल तक इस पद पर रहे। उनकी जिंदगी बहुत उतार-चढ़ाव से भरी रही। उन पर श्रीवर्धराज स्वामी मंदिर के मैनेजर शंकररमण के मर्डर तक के आरोप लगे और जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, बाद में अदालत ने इस मामले में शंकराचार्य समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। 24 लोगों का बनाया गया था आरोपी...

      - कांचीपुरम के वरदराजापेरुमल मंदिर के प्रबंधक ए शंकररमण की सितंबर 2004 को मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी।
      - पुलिस ने जांच में कांची मठ के ही लोगों पर शक जताया। जांच में आरोप लगे कि इस मामले में पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और उनके सहयोगी विजयेंद्र शामिल हैं।
      - ये आरोप भी लगे कि प्रबंधक शंकररमण के पास शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती से जुड़ी कई आपत्तिजनक जानकारी थी, जिसके चलते उनका मर्डर किया गया।
      - इस मर्डर केस में कुल 24 लोगों को अलग-अलग धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया। इसमें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और उनके सहयोगी विजयेंद्र भी आरोपी बनाए गए।

      9 साल कोर्ट में चला मामला
      - शंकररमण के मर्डर की साजिश रचने के आरोप में नवंबर 2004 को जयेंद्र सरस्वती को आंध्रप्रदेश से अरेस्ट तक किया गया।
      - 9 साल तक ये मामला कोर्ट में रहा। मामले की सुनवाई के दौरान 189 लोगों की गवाही हुई, जिनमें से 83 गवाह बाद में मुकर गए। वहीं, 20 गवाह कोई ऐसा सबूत नहीं दे पाए कि ये साबित हो सके कि आरोपी कौन था।
      - आखिरकार नवंबर 2013 में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने अपना फैसला सुनाते हुए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती समेत सभी 24 आरोपियों को बरी कर दिया।

      कांची पीठ के थे शंकराचार्य

      जयेंद्र सरस्वती तमिलनाडु के कांचीपुरम में मौजूद कांची मठ के प्रमुख थे। कांची कामकोटी पीठ के 69वें शंकराचार्य के पद पर बैठने से पहले जयेंद्र सरस्वती का नाम सुब्रहमण्यम था। वो वेदों के ज्ञाता माने जाते थे और करीब 62 साल तक कांची पीठ के शंकराचार्य के पद पर रहे। 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

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      वे 22 मार्च 1954 को चंद्रशेखेंद्ररा सरस्वती स्वामीगल ने के उत्तराधिकारी घोषित हुए थे। उस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी।
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      शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के सहयोगी और उत्तराधिकारी विजयेंद्र।
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      18 जुलाई 1935 को जयेंद्र सरस्वती का तमिलनाडु में जन्म हुआ था। शंकराचार्य बनने से पहले उनका नाम सुब्रमण्यम था।
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      1983 में उन्होंने शंकर विजयेन्द्र सरस्वती को उत्तराधिकारी घोषित किया था।
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      कांची मठ कांचीपुरम में स्थापित एक हिन्दू मठ है। यहां के मठाधीश्वर को शंकराचार्य के नाम से जाना जाता है।
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      कांची कामकोटी पीठ।
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    Web Title: Kanchi Jayendra Saraswathi And Sankararaman Murder Case
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