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दुनिया के सबसे फेमस सिंफनी संगीतकार जैसा बनना चाहता था नीरव

12000 करोड़ से भी ज्यादा का बैक फ्रॉड करने वाले नीरव मोदी संगीतकार बनना चाहते थे।

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 06:12 PM IST

मशूहर हीरा कारोबारी और हजारों करोड़ के बैक फ्रॉड करने वाले नीरव मोदी ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे हीरे का बिजनेस कर आसमान की बुलंदियां छुएंगे। 12000 करोड़ से भी ज्यादा का बैक फ्रॉड करने वाले नीरव मोदी संगीतकार बनना चाहते थे। लेकिन मामा मेहुल चौकसी की वजह से उनकी ये ख्वाहिश पूरी न हो सकी। चौकसी गीतांजलि जेम्स के प्रमोटर हैं, उन्हें कारोबार में ले आए थे। वे ये जानते थे कि हीरे के कारोबार में नीरव कामयाब हो सकते थे।

ऐसा बताया जाता है कि नीरव की दिलचस्पी हमेशा से आर्ट और डिजाइन के साथ ही संगीत में भी थी। नीरव चाहते थे वे मशहूर इस्राइली संगीतकार जुबिन मेहता की तरह बनें। ये वही जुबिन मेहता हैं जिन्हें भारत सरकार की ओर से 1966 में पद्म भूषण और 2001 में पद्म विभूषण से नवाजा गया। ये वही जुबिन मेहता हैं जिन्हें संगीत की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ सम्मान ग्रेमी अवॉर्ड 3 बार मिला।

कौन हैं जुबिन मेहता

जुबिन मेहता वर्ल्ड फेमस सिम्फनी आर्टिस्ट हैं। जुबिन का जन्म 29 अप्रैल 1936 को मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ। जुबिन के पिता मेहली मेहता उस जमाने के जाने-माने संगीतकार थे। वे फेमस वायलीन वादक थे और मुंबई सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के फाउंडर थे। जुबिन को संगीत की शुरुआती शिक्षा पिता से ही मिली।

शुरुआती पढ़ाई मुंबई में करने के बाद 1954 में जुबिन विएना चले गए। वहां उन्होंने म्यूजिक कंडक्टिंग प्रोग्राम में दाखिला लिया। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के बाद ही जुबिन का हुनर दुनिया के सामने आने लगा। 1958 में जुबिन ने Liverpool International Conducting Competition जीता। इसके बाद म्यूजिक कंडक्टिंग की दुनिया में तेजी से जुबिन के जाना-पहचाना नाम हो गया। विएना से लेकर बर्लिन, इस्राइली और लॉस एंजलस तक जुबिन कंसर्ट करने लगे। जुबिन 1961 से 1967 तक मॉन्ट्रियल सिम्फनी आर्केट्रा के डायरेक्टर और उसके बाद लॉस एंजलस फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा के डायरेक्टर भी रहे।


1969 में जुबिन इस्रायल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा में म्यूजिक एडवाइजर के रूप में जुड़े। साल 1977 में उन्हें वहां का म्यूजिक डायरेक्टर बना दिया गया। साल 1981 में इस्रायल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा ने जूबिन को 'म्यूजिक डायरेक्टर ऑफ लाइफ' से सम्मानित किया। पिछले करीब 50 सालों में जुबिन इस्राइल और अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में मौजूद Symphony Orchestra के डायरेक्टर रह चुके हैं। पद्म पुरुस्कारों के साथ ही 2013 में भारत सरकार द्वारा टेगौर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


क्या होती है Symphony

वेस्टर्न क्लासिक म्यूजिक के कंपोजिशन को सिम्फनी कहा जाता है। सिम्फनी शब्द ग्रीक शब्द सिंफोनिया से लिया गया है जिसका मतलब होता है agreement or concord of sound, यानी संगीत का सामंजस्य।


आगे की स्लाइड में पढ़िए सितार वादक रवि शंकर के साथ भी जुबिन ने बनाई थी सिम्फनी

यूरोपियन कम्यूनिटी यूथ ऑर्केस्ट्रा में मौजूद जुबिन मेहता और पं. रविशंकर यूरोपियन कम्यूनिटी यूथ ऑर्केस्ट्रा में मौजूद जुबिन मेहता और पं. रविशंकर

पं रविशंकर दुनिया के जानेमाने सितार वादक रहे हैं। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। अप्रैल 1920 में बनारस में जन्में पंडित रविशंकर और जुबिन मेहता बेहद करीबी दोस्त रहे हैं। 60 के दशक में जहां म्यूजिक कंडक्टर के रूप में जुबिन दुनिया में धाक जमा रहे थे, तो उसी दौर पंडित रविशंकर अपने सितार वादन से भारतीय क्लासिकल संगीत का परचम दुनिया में लहरा रहे थे। 

 

इन दोनों की पहली मुलाकात 1960 हुई थी जब जुबिन ने रविशंकर को मॉन्ट्रियल सिम्फनी में निर्देशित किया था। दोनों ने मिलकर न्यूयार्क फिलहारमोनिक में सिम्फनी बनाई थी। इसके बाद लंदन फिलहारमोनिक आॅर्केस्ट्रा में भी दोनों ने साथ काम किया। 

 

 

5 ग्रेमी अवर्ड मिले थे पं रविशंकर को

 

 

पं रविशंकर को 1967 में पहला ग्रेमी अवार्ड मिला था। इसके बाद 1973, 2002 2003 और 2013 में 55th एन्यूअल ग्रेमी अवार्ड में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।  

 

 

2012 में हुअा निधन

 

 

पं रविशंकर को 6 दिसंबर 2012 को सांस लेने में तकलीफ के चलते केलिफोर्निया के अस्पताल में भर्ती कराया था। 11 दिसंबर 2012 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी।