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चीन का विदेश में दूसरा नेवी बेस PAK में बनेगा, भारत पर प्रभुत्व जमाने के लिए कर रहा प्लानिंग

इससे पहले चीन ने अफ्रीका के जिबूती में नेवी बेस बनाया था।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 08:51 AM IST
चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) ग्वादर से शिनजियांग को जोड़ेगा। चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) ग्वादर से शिनजियांग को जोड़ेगा।

बीजिंग. चीन विदेश में अपना दूसरा नेवी बेस पाकिस्तान में बनाने की प्लानिंग कर रहा है। चीन के मिलिट्री एनालिस्ट झोऊ चेनमिंग के मुताबिक, नेवी बेस पाक के ग्वादर पोर्ट के पास ही बनाया जाएगा। चीन के पाक में नेवी बेस बनाने का मकसद भारत पर दबदबा बनाना है। भारत, ईरान और अफगानिस्तान मिलकर चाबहार पोर्ट बना रहे हैं। इससे पहले चीन ने अफ्रीका के जिबूती में नेवी बेस बनाया था। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका पाक पर दबाव डालता रहा तो पाक चीन के करीब जा सकता है। बता दें कि 46 अरब डॉलर का चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) ग्वादर को चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा।


वॉरशिप के मेंटेनेंस के लिए चीन कर रहा ऐसा

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चेनमिंग के हवाले से साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि चीन को अपने जंगी जहाजों के लिए ग्वादर में एक अन्य बेस की जरूरत है, क्योंकि ग्वादर अभी तक एक सिविलियन पोर्ट है।
- "चूंकि मर्चेंट और वॉरशिप्स दोनों का अलग-अलग ऑपरेशन होता है, लिहाजा दोनों के लिए अलग-अलग फैसिलिटीज की जरूरत होती है। मर्चेंट शिप्स के लिए ज्यादा जगह वाला बड़ा बंदरगाह चाहिए, जिसमें वेयरहाउस और कंटेनर हों। लेकिन वॉरशिप के लिए मेंटेनेंस और लॉजिस्टिकल सपोर्ट सर्विस की जरूरत होती है।''

ग्वादर वॉरशिप की जरूरतें पूरी करने में कैपेबल नहीं

- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA-चीनी आर्मी) से जुड़े एक अन्य अफसर ने भी ग्वादर के करीब नेवी बेस बनाने की पुष्टि की है।
- "ग्वादर पोर्ट वॉरशिप्स को खास तरह की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काफी नहीं है। यहां से मिलिट्री लॉजिस्टिकल सपोर्ट नहीं मिल सकता।''
- साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर से पहले वॉशिंगटन की एक वेबसाइट द डेली कॉलर ने भी ग्वादर के पास चीन के नेवी बेस बनाने की बात कही थी।
- यूएस आर्मी में कर्नल रहे लॉरेंस सेलिन के मुताबिक, पाक और चीन अफसरों के बीच हुई बातचीत में ग्वादर के पास जीवानी पेनिनसुला में नए नेवी बेस स्थापित करने को लेकर सहमति बनी थी। ये ईरान की बॉर्डर के नजदीक है।

भारत पर कैसे पड़ेगा असर?

- बलूचिस्तान में स्थित ग्वादर मुंबई से पास है। ग्वादर के पास नेवी बेस बनाकर चीन अरब सागर में पैठ बनाना चाहता है।
- जीवानी चाबहार (ईरान) से बेहद कम दूरी पर है। बता दें कि भारत, ईरान और अफगानिस्तान मिलकर चाबहार पोर्ट बना रहे हैं, जो भारत-अफगानिस्तान के बीच एक ट्रेड कॉरिडोर की तरह काम करेगा।

...तो चीन के करीब जा सकता है पाक

- चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका पाक पर दबाव डालता रहा तो वह चीन के साथ इकोनॉमिक और डिफेंस रिलेशन और मजबूत कर सकता है। साथ ही, चीन ईरान के चाबहार पोर्ट के पास पाक मिलिट्री बेस को अपने कब्जे में ले सकता है।
- ट्रम्प ने 1 जनवरी को ट्वीट कर पाक को अपनी जमीन पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया था।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि पाक ने बाइलेटरल ट्रेड और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन्स के लिए चीनी करंसी को पहले ही मंजूरी दे चुका है।

चीन के ग्वादर के पास नेवी बेस बनाने का मकसद अरब सागर में दखल बढ़ाना है। (फाइल) चीन के ग्वादर के पास नेवी बेस बनाने का मकसद अरब सागर में दखल बढ़ाना है। (फाइल)
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चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) ग्वादर से शिनजियांग को जोड़ेगा।चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) ग्वादर से शिनजियांग को जोड़ेगा।
चीन के ग्वादर के पास नेवी बेस बनाने का मकसद अरब सागर में दखल बढ़ाना है। (फाइल)चीन के ग्वादर के पास नेवी बेस बनाने का मकसद अरब सागर में दखल बढ़ाना है। (फाइल)
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