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पुलिस FIR लिखने से मना करे तो आपके पास हैं ये 3 अधिकार, तुरंत होगी कार्रवाई

किसी भी क्रिमिनल ऑफेंस से जुड़ी इंफॉर्मेशन को पुलिस में रजिस्टर करवाना ही फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (FIR) कहलाता है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 11:30 AM IST

यूटिलिटी डेस्क।किसी भी क्रिमिनल ऑफेंस से जुड़ी इंफॉर्मेशन को पुलिस में रजिस्टर करवाना ही फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (FIR) कहलाता है। एफआईआर एक लिखित दस्तावेज होता है, जिसे शिकायत मिलने के बाद पुलिस द्वारा तैयार किया जाता है। अधिकतर शिकायत पीड़ित व्यक्ति द्वारा रजिस्टर करवाई जाती है। कोई भी व्यक्ति लिखित या मौखिक तौर पर अपनी शिकायत पुलिस में दर्ज करवा सकता है। कई बार ऐसा होता है कि पुलिस द्वारा एफआईआर न लिखने की बात सामने आती है। हम बता रहे हैं यदि पुलिस एफआईआर लिखने से मना कर दे तो आप क्या कर सकते हैं।

एफआईआर कब लिखवाई जाती है?
एफआईआर सिर्फ कॉग्निजेबल ऑफेंस (ऐसा ऑफेंस जिसमें पुलिस को अरेस्ट करने के लिए वारंट की जरूरत न हो) के लिए रजिस्टर करवाई जाती है। पुलिस को आरोपी व्यक्ति को अरेस्ट करके पूछताछ करने का अधिकार होता है। वहीं यदि ऑफेंस नॉन कॉग्निजेबल है तो इस केस में एफआईआर दर्ज नहीं होती। इसमें कोर्ट के दखल के बिना एक्शन नहीं हो पाता।

कैसे लिखवाएं एफआईआर

> कोई भी विक्टिम सीधे पुलिस स्टेशन में पहुंचकर लिखित या मौखिक एफआईआर दर्ज करवा सकता है।

> पीसीआर कॉल के जरिए भी एफआईआर रजिस्टर करवाई जा सकती है।

> ऑफेंस की जानकारी मिलते ही ड्यूटी ऑफिसर एएसआई को मौके पर भेजते हैं। एएसआई
विटनेस के स्टेटमेंट रिकॉर्ड करता है। इस शॉर्ट रिपोर्ट के आधार पर पुलिस एफआईआर फाइल करती है। यह प्रक्रिया सिर्फ जघन्य अपराधों के लिए फॉलो की जाती है।

पुलिस एफआईआर न लिखे तो क्या करें, देखिए अगली स्लाइड में....

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