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#Did you know: प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते में ही बच्चे को मिल जाते हैं ये Rights

18 साल से कम उम्र के ह्युमन बीइंग को भारत में चाइल्ड माना गया है।

Dainik Bhaskar

Feb 09, 2018, 12:02 AM IST
child rights in india

यूटिलिटी डेस्क। 18 साल से कम उम्र के ह्युमन बीइंग को भारत में चाइल्ड माना गया है। गवर्नमेंट के साथ ही हर पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चे को डेवलप करें। बच्चों को कुछ अधिकार दिए गए हैं। जैसे, प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते से ही बच्चे को सर्वाइवल का अधिकार मिल जाता है।

आज हम बच्चों को मिले ऐसे अधिकारों की जानकारी दे रहे हैं, जो सभी को मालूम होना चाहिए। यूनाइटेड नेशन ने चाइल्ड राइट्स कंवेनशन जारी किया है। इस पर सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत भी उनमें से एक है। इसके अलावा भारतीय संविधान ने भी बच्चों की हिफाजत के लिए कई डायरेक्शंस दिए हैं। यदि इन्हें फॉलो नहीं किया गया तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।

प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते में ही बच्चे को मिल जाते हैं ये Rights, देखिए अगली स्लाइड्स में...

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राइट टू सर्वाइवल


> एक बच्चे को जन्म से पहले सर्वाइवल का अधिकार मिल जाता है। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के 20 हफ्तों बाद बच्चे को सर्वाइवल का अधिकार मिल जाता है। राइट टू सर्वावइल के तहत बच्चे को मिनिमम स्टैंडर्ड का फूड, शेल्टर, क्लॉथ और सम्मान के साथ जीने का हक मिलता है। 

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राइट टू प्रोटेक्शन


> ऐसा कोई भी निर्णय जो बच्चे को सीधे या परोक्ष रुप से प्रभावित कर रहा है, उसमें उसे पार्टिसिपेट करने का अधिकार है। हालांकि यह उम्र और मैच्योरिटी पर भी डिपेंड करता है। बच्चे से जुड़े डिसीजन लेने में बच्चों को शामिल किया जाना चाहिए।  

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राइट टू डेवलपमेंट


> बच्चे को इमोशनल, मेंटल और फिजिकली डेवलपमेंट का अधिकार है। इमोशनल डेवलपमेंट प्रोपर केयर और लव से पूरा होता है। मेंटल डेवलपमेंट एजुकेशन, लर्निंग 

से आता है। वहीं फिजिकल डेवलपमेंट न्यूट्रिशंस, खेलकूद और प्रसन्नता से आता है।

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