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यात्री को बस में खड़े-खड़े नहीं ले जाया जा सकता, जानें अपने 7 अधिकार

किसी भी यात्री से किराया लिया गया है तो उसे बस में सीट देना जरूरी होता है।

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 12:02 AM IST

यूटिलिटी डेस्क। किसी भी यात्री से किराया लिया गया है तो उसे बस में सीट देना जरूरी होता है। यदि कोई किराया लेने के बाद भी सीट नहीं दे रहा तो यात्री उसकी शिकायत कर सकता है।आरटीओ जितेंद्र सिंह रघुवंशी (इंदौर) ने बताया कि केंद्रीय मोटरयान नियम के तहत अधिकतम 12 यात्रियों को खड़े करके बस में ले जाया जा सकता है लेकिन बस संचालक को इसकी अलग से परमीशन लेना होती है। यदि यह परमीशन संचालक के पास नहीं है तो उसे यात्री को सीट देना ही होगी। ऐसा न होने पर यात्री स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिशनर के साथ ही क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट अधिकारी को शिकायत कर सकते हैं।

यहां से भी निराकरण न हो तो कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत की जा सकती है। ऐसे में संबंधित बस संचालक को यात्री को कम्पनसेशन देना पड़ सकता है dainikbhaskar.com वर्ल्ड कंज्यूमर डे (15 मार्च) के मौके पर कंज्यूमर के अधिकारों से जुड़ी सीरीज चला रहा है। इसमें हम एक्सपर्ट्स के जरिए यह बता रहे हैं कि कंज्यूमर के क्या-क्या अधिकार होते हैं और वे किन मामलों में कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

हादसा होने पर भी कम्पनसेशन का है हक


> यदि कोई यात्री पब्लिक सर्विस व्हीकल में सफर कर रहा है और ड्राइवर की गलती से वो हादसे का शिकार हो जाता है तो ऐसे मामले में संबंधित यात्री कम्पनसेशन क्लैम कर सकता है। गुजरात हाईकोर्ट इस तरह के मामले में आदेश दे चुका है।

> गुजरात स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (GSRTC) की बस में अरविंद मेहता नामक यात्री हादसे का शिकार हुए थे। उन्होंने कम्पनसेशन के लिए कोर्ट में अपील की। इसके बाद मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MACT) ने GSRTC को मेहता को कम्पनसेशन देने के आदेश दिए थे।

> रिटायर्ड एएसपी ट्रैफिक आरएस राणावत का कहना है कि बस संचालक जिन सुविधाओं को देने का वादा करता है, उसे वे सुविधाएं यात्रियों को देना जरूरी है। नहीं देने पर कई यात्री कंज्यूमर कोर्ट गए हैं और उन्हें वहां से न्याय मिला है। आज हम बता रहे हैं कि बस में यात्री को क्या अधिकार मिलते हैं।

हर यात्री को बस में मिलते हैं ये अधिकार, जानिए अगली स्लाइड्स में...