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पुलिस ने शिकायत नहीं सुनी तो अधिकारी को हो सकती है जेल, जानें अपने अधिकार

पुलिस से जुड़े ये अधिकार हर व्यक्ति को पता होना चाहिए।

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 12:02 AM IST
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यूटिलिटी डेस्क। पुलिस यदि आपकी शिकायत नहीं सुन रही और एफआईआर लिखने से मना कर रही है तो आप हायर रैंक वाले ऑफिसर के पास इसकी कम्पलेंड कर सकते हैं। इसके बाद भी पुलिस की और से कार्रवाई नहीं की जा रही तो आप नजदीकी ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट को इसकी फॉर्मल कम्पलेंड कर सकते हैं।

मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर लिखने का निर्देश दे सकते हैं। आपने कोई शिकायत की है तो आप पुलिस से इसकी रिसिप्ट ले सकते हैं। पुलिस आपके साथ सहयोग नहीं कर रही या आपको जबरन प्रताड़ित किया जा रहा है तो आप नेशनल ह्युमन राइट्स कमीशन में कम्पलेंड कर सकते हैं। कम्पलेंड की सुविधा ऑनलाइन मौजूद है।

क्या पुलिस शिकायत लिखने से मना कर सकती है?
इसका जवाब हां और न दोनों में हो सकता है। यदि पुलिस ऑफिसर को ऐसा लगता है कि छोटा-मोटा केस है और समझाईस से ही सॉल्व हो सकता है तो पुलिस शिकायत लिखने से मना कर सकती है। क्राइम सामान्यत कॉग्निजबल और नॉन कॉग्निजबल होते हैं। एफआईआर सिर्फ कॉग्निजबल क्राइम में लॉक की जाती है। नॉन कॉग्निजबल में मजिस्ट्रेट के पास शिकायत जाती है। वहां से पुलिस को आगे की कार्रवाई के लिए डायरेक्शन मिलता है।

कौन से होते हैं कॉग्निजबल क्राइम
कॉग्निजबल क्राइम में मर्डर, रेप, दंगा, डकैती जैसे क्राइम आते हैं। इसमें पुलिस को बिना वारंट के अपराधी को अरेस्ट करने का अधिकार होता है। वहीं नॉन कॉग्निजबल क्राइम में चीटिंग, फ्रॉड, जालसाजी, एक पति या पत्नि के रहते हुए दूसरा विवाह करना, दूषित फूड प्रोडक्ट्स बनाना जैसे क्राइम आते हैं। इसमें पुलिस बिना वारंट के अपराधी को अरेस्ट नहीं कर सकती। यह सीरियस नेचर के क्राइम नहीं होते।

थाने में शिकायत न सुनी जाए तो जाएं इस अधिकारी के पास, देखिए अगली स्लाइड्स में...

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