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बीच वाली सीट खोलने से लेकर पैसा रिफंड पाने तक क्या हैं वो नियम जो आपको जानने ही चाहिए

रेलवे में जब आप यात्रा कर रहे होते हैं उस दौरान कई ऐसी बातें या अधिकार होते हैं जो आपको मालूम नहीं होते।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 16, 2017, 04:38 PM IST

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    यूटिलिटी डेस्क। रेलवे में जब आप यात्रा कर रहे होते हैं उस दौरान कई ऐसी बातें या अधिकार होते हैं जो आपको मालूम नहीं होते। आपकी कम जानकारी होने की वजह से कोई दूसरा आपके अधिकारों का हनन कर सकता है या आपको उन फायदों से वंचित कर सकता है। ये वो नियम हैं जिनकी जानकारी आपकी यात्रा को आरामदायक और टेंशन फ्री बना सकती है।

    कब खोल सकते हैं बीच वाली सीट

    थर्ड एसी, स्लीपर कोच में बीच वाली सीट कई बार परेशानी का सबब बन जाती है। उस सीट के खुलने के बाद नीचे वाली सीट में इतना स्पेस नहीं बचता कि कोई उसमें बैठ सके। अगर आपकी सीट बीच वाली है तो भी समस्या, नीचे की है तो भी। आप कई बार सीट में बैठने के मूड में होते हैं लेकिन जिस बंदे की सीट बीच वाली होती है वह उसे खोलना चाहता है। क्या बीच वाली सीट कोई कभी भी खोल या बंद कर सकता है? तो यदि आपको ये बात ना पता हो तो जान लीजिए। रेलवे ने बीच वाली सीट को खोलने और बंद करने का भी एक नियम बना रखा है।

    रेलवे के नियमों के अनुसार मिडिल बर्थ पर सफर करने वाले यात्रियों को रात 10 से सुबह छह बजे तक ही सीट को खोलने की अनुमति मिलती है। इस समय के अलावा बाकी समय आप सीट नहीं खोल सकते। हां ये बात अलग है कि नीचे वाला यात्रा भी दोपहर में सोना चाहे और मिडिल बर्थ का भी तो आपसी सहमित से सीट खोली जा सकती है।

    रेलवे के नियम के अनुसार ही साइड लोअर बर्थ पर सफर करने वाले यात्री को साइड अपर के यात्री को दिन में नीचे बैठने की जगह देनी होगी। ऐसा तब भी होगा जब लोअर बर्थ में आरएसी वाले दो यात्री पहले से सफर कर रहे हैं। हालांकि अपर बर्थ का यात्री रात 10 से सुबह छह बजे तक लोअर बर्थ का दावा नहीं कर सकेगा।

    जा सकते हैं स्लीपर से एसी में, देखिए अगली स्लाइड्स में...

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    जा सकते हैं स्लीपर से एसी में
    > ये रेलवे की ऐसी योजना है जिसका लाभ मिलना किस्मत खुलने जैसा होता है। रेलवे में क्लास अपग्रेड करने का सिस्टम है। यदि आपकी टिकट स्लीपर में वेटिंग है और थर्ड एसी में सीटे खाली हैं तो रेलवे आपको अपग्रेड करके थर्ड एसी की सीट दे सकता है। थर्ड एसी में वेटिंग होने और सेकेंड एसी में सीट खाली होने पर भी यह लाभ मिल सकता है।
    > रेलवे इसके लिए कोई अलग से शुल्क नहीं लेता। हालांकि अपग्रेड की यह सुविधा फिक्स नहीं होती। कई बार सीट खाली होने पर भी यात्रियों की सीट अपग्रेड नहीं होती। साथ ही किस यात्री की सीट अपग्रेड होगी और किसकी नहीं इसका भी कोई नियम नहीं होता। रेलवे के अनुसार रिजर्वेशन फॉर्म में सीट अपग्रेड करने का एक आप्शन होता है। उसे टिक करने पर ही लोगों को उस सुविधा का लाभ मिलता है।
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    ट्रेन लेट हुई तो होगा पैसा वापस
    > यदि आपकी ट्रेन आपके बोर्डिंग वाले स्टेशन में तीन घंटे से ज्यादा लेट आती है और आप उसका टिकट कैंसिल कराते हैं तो आपको पूरा का पूरा पैसा रिफंड मिलेगा। इसमें एक भी रुपए की कटौती नहीं होगी। इसके लिए आपको रेलवे को कैंसिलेशन के साथ ही टिकट डिपॉजिट रिसिप्ट होगी। अगर ये दूरी 200 किमी तक की है तो आपको 3 घंटे पहले अप्लाई करना होगा। तो वहीं डिस्टेंस 500 किमी तक के डिस्टेंस में आपको 6 घंटे का समय मिल जाएगा।
    > ट्रेन यदि लेट नहीं होती और आपका टिकट कन्फर्म है तो रेलवे जुर्माने के रुप में कुछ रकम काटता है। यदि आप ट्रेन आने के 48 घंटे से लेकर 8 घंटे तक अपना टिकट कैंसिल कराते हैं तो आपके जुर्माने के तौर पर टिकट की 25 प्रतिशत राशि काट ली जाएगी। यदि आप 8 घंटे से 4 घंटे के बीच टिकट कराते हैं तो जुर्माने में 50 प्रतिशत की रकम कटती है। ट्रेन छूट जाने के बाद यदि आप टिकट कैंसिल कराते हैं तो उसके बदले आपको कुछ नहीं मिलता है।
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    हर हाल में जरुरी है वैलिड आईडी प्रूव
    > ऑनलाइन टिकट के साथ आपका वैलिड आईडी प्रूव जरुरी है। ऐसा ना होने पर आप सीट के अधिकृत हकदार नहीं माने जाएंगे। कई बार टीसी टिकट चेक करने के दौरान सिर्फ आपसे आपका नाम और सीट नंबर पूछ लेते हैं। आप आईडी कार्ड उनकी तरफ बढ़ाते हैं तो वह सरसरी निगाह डालकर आपको वापस कर देते हैं कई बार उसे देखते ही नहीं।
    > लेकिन यदि टीसी आपका ओरिजनल आईडी प्रूव देखना चाहे और आप उसे मिस कर दें तो फिर आप नियमत: बिना टिकट हो जाएंगे। फिर यह टीसी पर डिपेंड करेगा कि वह मानवीय आधार पर आपको यात्रा करने देता है या नहीं। नियम के तहत आप बिना टिकट हो चुके होते हैं।
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