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#Padmaavat : इतने बवाल के बाद भी इन नियमों के चलते रिलीज हो पा रही ये मूवी

भारत में कोई भी फिल्म बिना सेंसर बोर्ड की मंजूरी के रिलीज नहीं हो सकती।

Dainik Bhaskar

Jan 24, 2018, 12:48 PM IST
Rules of Film Censoring in India

यूटिलिटी डेस्क। इन दिनों संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को लेकर विवाद चल रहा है। इससे सेंसर बोर्ड चर्चा में है। भारत में कोई भी फिल्म बिना सेंसर बोर्ड की मंजूरी के रिलीज नहीं हो सकती। सेंसर बोर्ड सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 के प्रावधानों के तहत फिल्मों को रिलीज के लिए सर्टिफिकेट जारी करता है। आज हम इससे जुड़े नियम-कायदे आपको बताने जा रहे हैं।

68 दिनों से ज्यादा टाइम नहीं ले सकता बोर्ड
सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म के सर्टिफिकेशन में ज्यादा से ज्यादा 68 दिनों का समय ले सकता है। सर्टिफिकेट लेने से पहले निर्माता को यह बताना होता है कि वह किसके लिए फिल्म बना रहा है। बोर्ड के देशभर में कुल 9 ऑफिस हैं। बोर्ड में 22 से 25 सदस्य होते हैं। सेंसर बोर्ड में सबसे पहले जांच समिति फिल्म देखती है और यह तय करती है कि फिल्म को किस कैटेगरी में रखना है।

कट लगने पर जा सकते हैं ट्रिब्यूनल
फिल्म में कोई आपत्तिजनक सीन है तो उस पर बोर्ड कट लगा सकता है। निर्माता कट लगवाकर सर्टिफिकेट ले सकता है। हालांकि किसी निर्माता को यह लगता है कि कट लगना सही नहीं है तो वे फिल्म सर्टिफिकेशन एपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। फिल्म देखने के बोर्ड निर्धारित करता है कि फिल्म को यू, यूए और ए किस कैटेगरी में रखा जाएगा।

इन नियमों का पालन करना जरूरी, देखिए अगली स्लाइड में...

Rules of Film Censoring in India

इन नियमों का पालन करना जरूरी

 

> कोई भी एंटी सोशल एक्टिविटी जैसे हिंसा, रेप आदि को फिल्म में जस्टिफाइड नहीं बताया जा सकता। 

 

> बच्चों को हिंसक गतिविधियों में शामिल होते हुए (पीड़ित के तौर पर) पर नहीं दिखाया जा सकता। 

 

> बच्चों को केंद्र में रखकर किसी भी रूप में चाइल्ड एब्यूज को दिखाना मना है। 

 

> मेंटली वीक, फिजिकली हेंडीकेप्ड व्यक्ति से अनुचित व्यवहार, या उसका मजाक उड़ाने को अलाउ नहीं किया जाता। 

Rules of Film Censoring in India

> ऐसा कोई भी सीन जो ड्रिंकिंग, स्मोकिंग या तंबाकु उत्पादों को सही बताते हैं, उन्हें प्रतिबंधित किया जाता है। 

 

> ऐसा कोई भी सीन जो एंटी सोशल एक्टिविटी को बढ़ा सकता है, उसे हटाया जाता है। 

 

> महिलाओं के खिलाफ सेक्शुअल हिंसा जैसे रेप, प्रताड़ना जैसे सीन को अवॉइड किया जाता है। 

 

> ऐसे विजुअल या वर्ड्स जो एंटी साइंस्टिफिक, एंटी नेशनल हों या सांप्रदायिकता को भड़का सकते हों, उन्हें प्रेजेंट करने से रोका जाता है। 

 

> राष्ट्रीय चिन्ह, राज्य चिन्ह को प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज, एक्ट 1950 के तहत किए गए प्रोविजन के मुताबिक ही दिखाया जाता है। 

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