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इस खास हथियार को छुपाकर रखते हैं Z+ सिक्योरिटी जवान, जानें कैसे करते हैं काम

Z+ सिक्योरिटी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जहां Z+ सिक्योरिटी होती है, वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 12:02 AM IST

यूटिलिटी डेस्क। वीवीआईपी, वीआईपी, पॉलिटिसियंस, हाई-प्रोफाइल सेलिब्रिटी और स्पोर्ट्सपर्सन को कुछ एजेंसीज SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप), NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स) और CRPF (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) जैसी एजेंसी सिक्योरिटी प्रोवाइड करवाती हैं। जिसको जितना ज्यादा खतरा होता है, उसकी सिक्योरिटी उतनी टाइट होती है। Z+ सिक्योरिटी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जहां Z+ सिक्योरिटी होती है, वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। आज हम आपको दे रहे हैं इन अलग-अलग सिक्योरिटी की जानकारी।

किन लोगों को मिलती है सिक्योरिटी
प्रेसीडेंट, वॉइस प्रेसीडेंट, प्राइम मिनिस्टर, सुप्रीमकोर्ट, हाईकोर्ट के जज, राज्यों के गवर्नर, चीफ मिनिस्टर, केबिनेट मिनिस्टर्स को सिक्योरिटी मिलती ही है। चीफ मिनिस्टर्स और केबिनेट मिनिस्टर्स ऑटोमेटिकली सिक्योरिटी कवर में आ जाते हैं। इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी, होम सेक्रेटरी और होम मिनिस्टर यह मिलकर निर्धारित करते हैं कि किसको सिक्योरिटी दी जाना है और किसको नहीं।

इस खास हथियार को छुपाकर रखते हैं Z+ सिक्योरिटी जवान, देखिए अगली स्लाइड में...

Z+ सिक्योरिटी


> यह इंडिया में दी जाने वाले सबसे हाईलेवल की सिक्योरिटी है। इस कैटेगरी में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। 24 घंटे सुरक्षा दी जाती है। 24 घंटे में अलग-अलग शिफ्ट में मिलाकर 108 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इनके पास अत्याधुनिक हथियार होते हैं। सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल होती है जो एक बार 6 से लेकर 20 राउंड तक फायर कर सकती है।

 

> ग्लोक नाइफ, जीपीएस, बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट के साथ में एडवांस्ड गैजेट होते हैं। इसमें तैनात सुरक्षाकर्मी मार्शल आर्ट में भी माहिर होते हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि यह सुरक्षा अभेद होती है। इसमें 28 नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडोज (NSG), एस्कॉर्ट, पायलट, कोबरा कमांडोज के साथ ही होम गार्ड्स शामिल होते हैं।

 

> इंदिरा गांधी की मौत के बाद 1988 में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का गठन किया गया था। इसके बाद से ही SPG पीएम को सिक्योरिटी देने लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह इंडिया की सबसे महंगी सिक्योरिटी भी है। 


> Z+ सिक्योरिटी में रह चुके एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि Z+ जवानों को हमेशा अपना हथियार छुपाने का ऑर्डर होता है। ऐसा इस कारण होता है जिससे कोई उन्हें आइडेंटिफाई न कर पाए। यह खास हथियार जवान की अत्याधुनिक पिस्टल ही होती है। जो छोटे साइज की रहती है। 

 

क्या डिफरेंस होता है X,Y,Z और Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी में, देखिए अगली स्लाइड्स में....

X कैटेगरी


> इस कैटेगरी में बेसिक प्रोटेक्शन संबंधित व्यक्ति को दिया जाता है। इसमें सिक्योरिटी के लिए दो सुरक्षाकर्मी होते हैं। एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) होता है। 

 

Y कैटेगरी


> इस कैटेगरी में 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इसमें दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) शामिल होते हैं। 

Z कैटेगरी


> यह हाईलेवल की सिक्योरिटी होती है, इस कैटेगरी में 22 सुरक्षाकर्मी तक होते हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी भी तैनात होते हैं। इसमें 1 एस्कॉर्ट कार भी संबंधित व्यक्ति को दी जाती है।