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सरकार ने खुद दिए हैं टैक्स बचाने के तरीके, 80C के अलावा इन तरीकों से बचाएं

इनकम टैक्स की धारा 80सी के अलावा भी आप कई धाराओं के जरिए टैक्स बचा सकते हैं।

Danik Bhaskar | Jan 27, 2018, 01:54 PM IST

यूटिलिटी डेस्क। इनकम टैक्स की धारा 80सी के अलावा भी आप कई धाराओं के जरिए टैक्स बचा सकते हैं। सरकार ने खुद यह प्रावधान कर रखा है। अधिकतर लोग इनके बारे में जानते नहीं। आज हमें इन धाराओं की जानकारी आपको दे रहे हैं।

सेक्शन 80D

मेडिक्लेम पॉलिसी अब जरूरी हो चुकी है। यदि आप या आपकी फैमिली अचानक बीमार पड़ जाती है या एक्सीडेंट हो जाता है तो यह पॉलिसी आपके बड़े काम आती है। मेडिकल इंश्योरेंस में आप जो अमाउंट पे करते हैं, वे सेक्शन 80D के तहत कर छूट में आता है। आप हेल्थ पॉलिसी अपने खुद के नाम के साथ ही पत्नि या पैरेंट्स, बच्चों (डिपेंडेंट) के नाम से ले सकते हैं।

यदि आप हिंदु अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) से हैं तो किसी भी मेम्बर के नाम से पॉलिसी ले सकते हैं। कर छूट मिलने के पहले आपको प्रीमियम पे करना जरूरी है। जो इंश्योरर है वो इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) से अप्रूवड होना चाहिए। इसमें अधिकतम 60 हजार रुपए तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। कोई एक इनडिविजुअल जो प्रीमियम पे करता है उस पर 25 हजार रुपए तक का डिडक्शन क्लेम कर सकता है वहीं पैरेंट्स के नाम पर प्रीमियम पे करने पर आप एडिशनल 25 हजार रुपए तक की छूट पा सकते हैं। पॉलिसी लेने वाला पर्सन यदि सीनियर सिटीजन है तो यह लिमिट दोनों ही केस में 30-30 हजार रुपए की हो जाती है। इस तरह 60 हजार रुपए तक की छूट पाई जा सकती है।

सेक्शन 80DD
यदि किसी विकलांग व्यक्ति के इलाज पर आप खर्चा कर रहे हैं तो इस सेक्शन के तहत कर छूट पा सकते हैं। विकलांग व्यक्ति में माता-पिता, पत्नि, बच्चे, भाई और बहन हो सकते हैं, जो संबंधित व्यक्ति पर डिपेंडेंट हों। हिंदु अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) केस में फैमिली का कोई भी व्यक्ति हो सकता है। इस सेक्शन के तहत कुल कटौती की सीमा 75 हजार रुपए तक है।

और आप कैसे बचा सकते हैं टैक्स, जानिए आगे की स्लाइड्स में...

सेक्शन 80DDB


> अगर कोई व्यक्ति किसी विशेष बीमारी में खर्च करता है तो वह सेक्शन 80DDB के तहत कर छूट पा सकता है। डिपेंडेंट पत्नि, माता-पिता, चिल्ड्रन, भाई-बहन का भी इलाज करवा रहे हैं तो इस नियम के तहत छूट पाई जा सकती है। कटौती खर्च की गई राशी या 40 हजार रुपए के बराबर हो सकती है। यदि संबंधित व्यक्ति की उम्र 60 साल या इससे अधिक है तो यह लिमिट 60 हजार हो जाती है। वहीं उम्र 80 वर्ष से अधिक है तो लिमिट 80 हजार तक पहुंच जाती है। इस 

सेक्शन के तहत कवर होने वाली बीमारियों की लिस्ट इनकम टैक्स रुल्स 11DD में देखी जा सकती है। इसमें न्यूरोलॉजिकल, एड्स जैसी बीमारियां शामिल हैं। 

 

सेक्शन 80E


यदि आपने किसी भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट से एजुकेशन लोन लिया है तो इस सेक्शन के तहत फायदा उठाया जा सकता है। इसमें लोन खुद के अलावा पत्नि या बच्चों से नाम से लिया गया हो, तब भी छूट पाई जा सकती है। आप डिडक्शन क्लेम तभी कर सकते हैं, जब आपने हायर एजुकेशन के लिए लोन लिया हो। यानी 12वीं क्लास के बाद की पढ़ाई के लिए लिया गया लोन इसमें मान्य होगा। 

 

सेक्शन 80EE


रेसीडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने पर लिए गए लोन के तहत भी आप इस सेक्शन के जरिए डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसमें अधिकतम डिडक्शन 50 हजार रुपए साल तक का क्लेम किया जा सकता है।हालांकि इसमें डिडक्शन की और भी कई शर्तें होती हैं। 

सेक्शन 80G


> सेंट्रल गर्वनमेंट द्वारा नोटिफाइड किए गए स्वयंसेवी संगठन को आप फंड डोनेट करते हैं तो इस सेक्शन के तहत डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह डिडक्शन मंदिर, मस्जिद, चर्च के रिनोवेशन पर भी क्लेम किया जा सकता है। हालांकि इनका सेंट्रल गवर्नमेंट से अप्रूवड होना जरूरी है। साथ ही आपको 80जी सर्टिफिकेट लेना होगा। 

 

सेक्शन 80TTA


> सेविंग बैंक अकाउंट पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसमें अधिकतम 10 हजार रुपए तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।