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आखिर कब दिवालिया होती है कोई कंपनी? जानें फिर इन्वेस्टर्स के पैसों का क्या होता है

क्या आप जानते हैं कि किसी कंपनी के दिवालिया होने पर क्या होता है?

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 12:02 AM IST

यूटिलिटी डेस्क। इन दिनों नीरव मोदी का नाम चर्चा में है। हाल ही में मोदी के स्वामित्व वाली कंपनी फायरस्टार डायमंड ने न्यूयॉर्क की एक अदालत में दिवालिया होने की अर्जी दी है। क्या आप जानते हैं कि किसी कंपनी के दिवालिया होने पर क्या होता है? हमने इस बारे में इंदौर सीए एसोसिएशन के चेयरमेन अभय शर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि आखिरी कंपनी के दिवालिया होने पर क्या होता है?

कंपनी दिवालिया कब होती है?
किसी भी कंपनी की जब असेट (संपत्ति) से ज्यादा देनदारी हो जाती है, और वह उसे चुकाने में फेल हो जाती है तब कंपनी दिवालिया घोषित की जा सकती है। इसके अलावा कुछ मामलों में सरकार भी कंपनी को दिवालिया घोषित कर सकती है। जैसे किसी कंपनी की एक्टिविटी से देश को खतरा हो, इंटीग्रिटी पर खतरा हो तो ऐसी कंपनी को सरकार द्वारा दिवालिया घोषित किया जा सकता है। हालांकि यह बहुत रेयर होता है।

दिवालिया होने के बाद क्या होता है?, देखिए अगली स्लाइड में....

दिवालिया होने के बाद क्या होता है?


> कंपनी के दिवालिया होने पर निवेशक क्रेडिटर बन जाते हैं। क्रेडिटर दो तरह के होते हैं एक सिक्योर्ड और दूसरा अनसिक्योर्ड। कंपनी के दिवालिया होने पर मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास जाता है। ऐसे मामलों में इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल नियुक्त किए जाते हैं। इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल कंपनी को दोबारा रिवाइव करने की कोशिश करते हैं। शुरुआत में इसके लिए 180 दिनों का समय दिया जाता है। अलग-अलग केस के हिसाब से यह अवधि बढ़ भी जाती है। 

 

> इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल के दखल के बाद भी यदि कंपनी की हालत ठीक नहीं हो पाती तो फिर संबंधित कंपनी को दिवालिया मानकर आगे की कार्रवाई की जाती है।

 

निवेशकों को क्या होता है?, देखिए अगली स्लाइड में...


निवेशकों को क्या होता है?


> ऐसा होने पर निवेशक कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे में यदि निवेशक कोर्ट डॉक्टराइन ऑफ कॉर्पोरेट वेल यानी यह साबित कर दें कि शुरूआत से ही कंपनी की मंशा निवेशकों का पैसा लेकर भागने की थी, तो इससे कंपनी के प्रमोटर्स को जवाबदेह बनाया जा सकता है और इस सूरत में प्रमोटर्स को पैसा लौटाना होता है। कंपनी लॉ बोर्ड में पिटीशन दाखिल की जा सकती है। 

 

ऐसे में कंपनी क्या करती है?


> दिवालिया होने के बाद कंपनी विंडअप पिटीशन दाखिल करती है। इसके बाद कंपनी की कुल एसेट्स की बिक्री कर क्रेडिटर को पैसा चुकाया जाता है। गवर्नमेंट 

क्रेडिटर को फर्स्ट प्रायोरिटी दी जाती है। सरकार का टैक्स या दूसरे सरकारी विभागों की बकाया राशी इसमें आती है।