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इस वजह के चलते काले रंग का ही कोट पहनते हैं देश भर के वकील, आप भी जानें

आज हम बता रहे हैं कि वकील आखिर काला कोट ही क्यों पहनते हैं?

Danik Bhaskar

Mar 13, 2018, 07:38 PM IST

यूटिलिटी डेस्क। अलग-अलग प्रोफेशन का अलग-अलग ड्रेस कोड होता है। ड्रेस कोड के जरिए संबंधित व्यक्ति की पहचान भी होती है। जैसे डॉक्टर्स व्हाइट कलर का एप्रन पहनते हैं। सिविल इंजीनियर्स हेलमेट पहनते हैं। इसी तरह वकील हमेशा ब्लैक कलर का कोट पहनते हैं।

वकीलों को काले और सफेद पोशाक में पहचाना जाता है। कई देशों में वकीलों का ड्रेस कोड अलग भी है। जैसे कनाडा में वकील रेड और व्हाइट ड्रेस में होते हैं, लेकिन अधिकतर देशों में ड्रेस कोड ब्लैक-व्हाइट ही है। इंडिया में मैन और वुमन दोनों ही यह ड्रेस कोड फॉलो करते हैं। आज हम बता रहे हैं कि वकील आखिर काला कोट ही क्यों पहनते हैं?

इंग्लैंड से हुई थी शुरुआत

ब्लैक और व्हाइट ड्रेस कोड का चलन 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड से शुरू हुआ। इस कलर को ऐसी ही नहीं चुन लिया गया बल्कि इसके पीछे कुछ रीजन रहे। फरवरी 1685 में किंग चार्ल्स दि्तीय का निधन हुआ। तब लोगों ने शोक प्रकट करने के लिए ब्लैक और व्हाइट गाउन पहनी। उसके बाद से ही लॉयर्स के लिए यह यूनिफॉर्म डिजाइन हुई।

और क्या हैं कारण, जानिए अगली स्लाइड्स में....

यूनिफॉर्म चुनने के पीछे दो रीजन भी रहे

 

> ब्लैक कलर की यूनिफॉर्म चुनने के पीछे दो रीजन भी रहे। पहला तो यह कि पुराने समय में कलर बहुत ज्यादा संख्या में अवेलेबल नहीं थे। ब्लैक कलर आसानी से अवेलेबल था।

 

> इसके अलावा इस कलर को चुनने के पीछे दूसरा रीजन ये रहा कि ब्लैक कलर को अधिकारियों के कलर में जाना जाता था। ब्लैक 

कोट में व्यक्ति दूसरों से ज्यादा प्रभावी नजर आता है। इसके अलावा ब्लैक कलर को समर्पण का भी प्रतीक माना गया है।

 

> जैसे कुछ पुजारी काले रंग का कुर्ता पहनकर भगवान के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं, उसी तरह एक वकील काला कोट पहनकर न्याय के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं।

एडवोकेट एक्ट 1961 में यह कहा गया है

 

> वहीं व्हाइट कलर को इसके प्योर फील के कारण चुना गया है। सफेद कलर शुद्धता, अच्छाई और सरलता का प्रतीक होता है। हर एक लीगल केस में वकील से ही न्याय दिलाने की आशा की जाती है।

 

> एडवोकेट एक्ट 1961 में यह कहा गया है कि हर लॉयर को ब्लैक कोट, व्हाइट शर्ट और सफेद रंग की टाई 

पहनना है। 

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