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दिल्ली में स्मॉग: पराली से ज्यादा धूलभरा तूफान जिम्मेदार, पॉल्यूशन में 40% हिस्सा

पराली से होने वाले पॉल्यूशन को लेकर अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की थी।

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 04:44 PM IST
दिल्ली में पॉल्यूशन से बचने के लिए बेटी के साथ मास्क पहनकर खड़ा पिता। (फाइल) दिल्ली में पॉल्यूशन से बचने के लिए बेटी के साथ मास्क पहनकर खड़ा पिता। (फाइल)

नई दिल्ली. राजधानी में स्मॉग के लिए पराली से ज्यादा वेस्ट एशिया का धूलभरा तूफान जिम्मेदार है। पुणे बेस्ड एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) सिस्टम के मुताबिक, दिल्ली में एयर क्वालिटी खराब होने के लिए पराली 25% जिम्मेदार है, वहीं वेस्ट एशियन डस्ट स्टॉर्म 40% जिम्मेदार है। बता दें कि पराली से होने वाले पॉल्यूशन को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से बुधवार को मुलाकात की और इससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। वहीं, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल से मुलाकात पर कहा कि इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

Q&A में दिल्ली पॉल्यूशन पर जानें क्या कहती है रिपोर्ट

सबसे ज्यादा खराब कब थी एयर क्वालिटी, वजह क्या थी?
- SAFAR की साइंटिफिक असेसमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, 8 नवंबर को दिल्ली में स्मॉग के लिए पराली से ज्यादा वेस्ट एशिया का डस्ट स्टॉर्म जिम्मेदार था। इस दिन दिल्ली का पॉल्यूशन लेवल सबसे ऊंचे स्तर पर था। इस दिन हवा में PM2.5 की मात्रा 640 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर था। इसके अलावा बाकी पॉल्यूशन के लिए गाड़ियां जिम्मेदार थीं। इस दौरान PM2.5 की मात्रा बढ़ाने में बाहरी सोर्सेस जिम्मेदार नहीं थे। अगर इस दिन बाहरी सोर्स जिम्मेदार नहीं होते तो हवा में PM2.5 की मात्रा 200 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर होती।

सुधार के लिए उठाए गए कदमों का क्या असर पड़ा?
- SAFAR के मुताबिक, ट्रकों की एंट्री और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज बंद किए जाने के जो सुधार के कदम उठाए गए उनका नतीजा पॉजिटिव रहा। अगर परसेंटेज में बात की जाए तो इससे 15% का सुधार हुआ।

डस्ट स्टॉर्म से कैसे बढ़ा पॉल्यूशन?
- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (IITM) की विंग SAFAR ने कहा, "इराक, कुवैत, सऊदी अरब में अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से 4 नवंबर तक धूलभरा तूफान आया था। इसके पर्टिकुलेट्स दिल्ली और दूसरे इलाकों के अपर एटमॉस्फियर की लेयर में आ गए।"

पराली ने कब असर दिखाया?
- पंजाब, यूपी और हरियाणा में 6 नवंबर को सबसे ज्यादा पराली जलाई गई। इस दौरान अपर एयर विंड्स नॉर्थ वेस्टर्न यानी दिल्ली की तरफ हो गई। इसी दौरान पॉल्यूटेंट बहुत ज्यादा मात्रा में हवा में घुल गए और हालात खराब हो गए।

पराली और डस्ट स्टॉर्म का असर कब कम हुआ?

- रिपोर्ट के मुताबिक, "8 नवंबर को दिल्ली की एयर क्वालिटी सबसे ज्यादा खराब थी। इससे पहले 6 नवंबर तक PM2.5 का एवरेज लेवल 140-190 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर के बीच था, जो कि साल के इस वक्त में नॉर्मल है। 10 नवंबर के आसपास वेस्ट एशिया के डस्ट स्टॉर्म से एटमॉस्फियर में पॉल्यूटेंट घुलने बंद हो गए। पराली जलाने से होने वाला पॉल्यूशन भी कम हो गया। इसके साथ ही अपर एयर विंड ने भी अपना डायरेक्शन बदल लिया और ये धीमी भी हो गई। इसके चलते पॉल्यूशन से थोड़ी राहत मिली।"

असर कम होने पर अचानक क्यों बढ़ा स्मॉग?
- "11 नवंबर की शाम से दिल्ली में मौसम बदल गया। इससे पहले कि पॉल्यूटेंट पूरी तरह गायब हो पाते, इनवर्जन लेयर (जिसके आगे पॉल्यूटेंट नहीं जा पाते) 1600 मीटर से घटकर 45 मीटर पर आ गई। 8 घंटों के भीतर ये हुआ। इसके बाद दिल्ली फिर गंभीर हालात में पहुंच गई। इन हालात से पूरी तरह उबरने में दो दिन का वक्त लगा।"

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Dust storm in West Asia precipitated Delhi smog crisis: SAFAR
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